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Damoh: आधारशिला संस्थान के बाल भवन की मान्यता निरस्त; धर्मांतरण मामले में शासन ने की कार्रवाई

Sat, 09 Sep 2023 01:59 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Sat, 09 Sep 2023 01:59 PM IST
सार

हिंदू बच्चों को बाइबिल ग्रंथ पढ़ाना और एक नाबालिग से छेड़छाड़ होने की शिकायत मिली थी। नाबालिग से छेड़छाड़ का मामला भी आया था सामने। 

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Recognition of Bal Bhawan of Damoh Adharshila Institute canceled
बाल भवन की मान्यता निरस्त - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

धर्मांतरण मामले में दमोह के आधारशिला संस्थान के बाल भवन की मान्यता शासन ने निरस्त कर दी है। महिला बाल विकास विभाग भोपाल के उप सचिव अजय कटसारिया ने दमोह में धर्मांतरण के मामले को लेकर ईसाई मिशनरी संचालक डॉ. अजय लाल की संस्था आधारशिला संस्थान द्वारा संचालित बाल गृह की मान्यता निरस्त कर दी है।

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इससे पहले संस्थान के खिलाफ शिकायत मिलने पर मप्र बाल संरक्षण आयोग की दो सदस्यीय टीम ने दमोह आकर निरीक्षण किया था। वहां हिंदू बच्चों को बाइबिल ग्रंथ पढ़ाना और एक नाबालिग से छेड़छाड़ होने की शिकायत मिली थी। जिस पर टीम ने अपना प्रतिवेदन महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंपा था। इसके आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था।
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बता दें इससे पहले जून में बाल आयोग को डॉ. अजय लाल के संस्थान आधारशिला के बाल भवन की एक शिकायत मिली थी। उसमें बाल गृह के कर्मचारी देवेंद्र डोनियल नामक कर्मचारी पर एक नाबालिग के साथ अभद्र चैटिंग करना और उसका छेड़छाड़ जैसी शिकायत मिली थी। इसके बाद आयोग से दो सदस्यीय टीम दमोह जांच करने के लिए पहुंचीं थी। टीम को आधारशिला के बालगृह में 16 बच्चे मिले थे। जांच में पाया कि यहां पर बालक और बालिकाओं को साथ रखा जा रहा था। इनमें एक बच्ची के साथ संस्था के वार्डन डेनियल द्वारा छेड़छाड़ करने का मामला भी था। इतना ही नहीं, आरोपी और उसकी पत्नी दोनों हास्टल में कर्मचारी थे। बाद में दोनों को नौकरी से हटा दिया गया।
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जांच के बाद मामले का खुलासा
राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य ओंकार सिंह ठाकुर ने जांच के बाद इस मामले का खुलासा किया था। उन्होंने बताया कि पॉस्को एक्ट के मामले में संस्था का कर्मचारी आरोपी है। जांच में ईसाई मिशनरी के आधारशिला संस्थान के बाल भवन में हिंदू बच्चों के पास बाइबिल मिली थीं। कई धर्मांतरण के सबूत भी हाथ लगे थे। साथ ही बाल गृह में पढ़ने वाली बच्चियों के कक्षा एक से कक्षा पांचवीं तक बाइबिल दी गई थीं।


शासन के आदेश पर कार्रवाई 
बाल आयोग ने मौके से किताबें भी जब्त की थीं। संस्था की अंतिम बार मान्यता 2018 में रिन्यू हुई थी। जिसे विभाग के उप सचिव ने निरस्त कर दिया। इस संबंध में महिला बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी संजीव मिश्रा ने बताया कि शासन के आदेश पर यह कार्रवाई की गई है। वहीं, राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने भी इस मामले में ट्वीट किया है और कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री का आभार जताया है।

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