{"_id":"66bf17d76bd35befc90e2db3","slug":"damoh-in-the-school-where-i-studied-three-students-built-a-building-for-a-computer-lab-with-rs-40-lakh-damoh-news-c-1-1-noi1223-1999424-2024-08-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Damoh News: जिस स्कूल में की पढ़ाई वहां 40 लाख रुपए से तीन छात्रों ने बनवा दिया कंप्यूटर लैब के लिए भवन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Damoh News: जिस स्कूल में की पढ़ाई वहां 40 लाख रुपए से तीन छात्रों ने बनवा दिया कंप्यूटर लैब के लिए भवन
Fri, 16 Aug 2024 05:19 PM IST
दमोह ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: दमोह ब्यूरो
Updated Fri, 16 Aug 2024 05:19 PM IST
सार
उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य एसएल अहिरवार ने बताया कि तीनों भाई सन् 1955 में इसी स्कूल में पढ़ते थे। 1958 की बोर्ड परीक्षा में देवेंद्र कुमार शुक्ला ने मप्र में नौवां स्थान प्राप्त किया था। जबकि सत्येंद्र कुमार शुक्ला ने 13वां स्थान प्राप्त किया था।
विज्ञापन
दमोह में पूर्व छात्रों ने बनवाया स्कूल भवन
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
दमोह के उत्कृष्ट विद्यालय के तीन पूर्व छात्रों ने अपनी मां की स्मृति में 40 रुपए की लागत से कंप्यूटर लैब के लिए भवन बनवाया है, जो आज छात्रों के लिए वरदान से कम नहीं है। क्योंकि इस स्कूल का रिजल्ट जिले में हर वर्ष टॉप पर रहा है। इससे यहां पर बच्चों की संख्या भी काफी अधिक है। इन बच्चों को बैठने के लिए पर्याप्त जगह एवं लैब की कमी आड़े आ रही थी। जब इस बात की जानकारी स्कूल के तीन पूर्व छात्रों को लगी तो उन्होंने स्कूल के लिए 40 लाख रुपए की लागत से सर्वसुविधायुक्त भवन तैयार कराया।
वर्तमान में इस भवन में आईटी लैब, सिक्युरिटी लैब, व्यवसायिक शिक्षा आईटीसी कम्प्यूटर लैब संचालित है। इसके अलावा कक्षा नवमीं की तीन कक्षाएं भी इसी नए भवन में संचालित हो रही हैं। जबकि भवन के ऊपरी हिस्से में जिले का सबसे बड़ा प्रशिक्षण हॉल बनाया गया है। जहां पर एक साथ 200 से अधिक लोगों को बैठने की व्यवस्था है। इससे शिक्षा विभाग के अधिकांश प्रशिक्षण इसी हाल में दिए जाते हैं। हालांकि कुछ राशि कम पड़ने से पालक-शिक्षक संघ की तरफ से निर्माण कराया गया।
बता दें कि स्कूल के पूर्व छात्र देवेंद्र कुमार शुक्ला, सत्येंद्र कुमार शुक्ला और जितेंद्र कुमार शुक्ला ने 40 लाख रुपए की लागत से स्कूल में यह लैब भवन तैयार कराया है। वर्तमान में यह तीनों भाई मुंबई में रहते हैं। इनमें जितेंद्र कुमार शुक्ला इनकम टैक्स कमिश्नर के पद से रिटायर्ड हो चुके हैं। वहीं देवेंद्र कुमार शुक्ला सेंट्रल इंटेलीजेंस ब्यूरो के पद पर रहे एवं छोटे भाई सत्येंद्र कुमार शुक्ला रेलवे में चीफ इंजीनियर के पद से रिटायर्ड हो चुके हैं।
विज्ञापन
टॉपर भाइयों के स्कूल के बोर्ड में हैं नाम
उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य एसएल अहिरवार ने बताया कि तीनों भाई सन् 1955 में इसी स्कूल में पढ़ते थे। 1958 की बोर्ड परीक्षा में देवेंद्र कुमार शुक्ला ने मप्र में नौवां स्थान प्राप्त किया था। जबकि सत्येंद्र कुमार शुक्ला ने 13वां स्थान प्राप्त किया। आज भी इन दोनों भाइयों का नाम स्कूल के बोर्ड पर टॉपरों की सूची में अंकित है। जो समय-समय पर अपने पैतृक नगर में आते रहते हैं। कुछ माह पहले ये लोग दमोह आए थे और अपने स्कूल में बिताई गईं पुरानी यादें एवं उस समय की शैक्षणिक व्यवस्था के बारे में सभी से अपने विचार साझा किए थे।
कठिन परिस्थितियों में बीता बचपन
सत्येंद्र शुक्ला ने बताया कि उनका परिवार 1955 में दमोह के बिलवारी मोहल्ले में निवास करता था। पिता रायगढ़ में ओएफओ थे। उनका युवावस्था में निधन हो गया था। परिवार की जिम्मेदारी उनकी मां पर आ गई। मां सावित्री देवी ने कठिन परिस्थितियों में तीनों भाइयों को पढ़ाया। इसलिए तीनों भाइयों ने अपनी मां की स्मृति में एक्सीलेंस स्कूल में बच्चों के लिए सर्वसुविधायुक्त आधुनिक कम्प्यूटर लैब बनवाने का निर्णय लिया। जिसे तीनों ने मिलकर बनाया। उन्होंने बताया कि हमें खुशी है कि हम अपने स्कूल के लिए कुछ कर पाए।
विज्ञापन
वर्तमान में इस भवन में आईटी लैब, सिक्युरिटी लैब, व्यवसायिक शिक्षा आईटीसी कम्प्यूटर लैब संचालित है। इसके अलावा कक्षा नवमीं की तीन कक्षाएं भी इसी नए भवन में संचालित हो रही हैं। जबकि भवन के ऊपरी हिस्से में जिले का सबसे बड़ा प्रशिक्षण हॉल बनाया गया है। जहां पर एक साथ 200 से अधिक लोगों को बैठने की व्यवस्था है। इससे शिक्षा विभाग के अधिकांश प्रशिक्षण इसी हाल में दिए जाते हैं। हालांकि कुछ राशि कम पड़ने से पालक-शिक्षक संघ की तरफ से निर्माण कराया गया।
विज्ञापन
बता दें कि स्कूल के पूर्व छात्र देवेंद्र कुमार शुक्ला, सत्येंद्र कुमार शुक्ला और जितेंद्र कुमार शुक्ला ने 40 लाख रुपए की लागत से स्कूल में यह लैब भवन तैयार कराया है। वर्तमान में यह तीनों भाई मुंबई में रहते हैं। इनमें जितेंद्र कुमार शुक्ला इनकम टैक्स कमिश्नर के पद से रिटायर्ड हो चुके हैं। वहीं देवेंद्र कुमार शुक्ला सेंट्रल इंटेलीजेंस ब्यूरो के पद पर रहे एवं छोटे भाई सत्येंद्र कुमार शुक्ला रेलवे में चीफ इंजीनियर के पद से रिटायर्ड हो चुके हैं।
विज्ञापन
टॉपर भाइयों के स्कूल के बोर्ड में हैं नाम
उत्कृष्ट विद्यालय के प्राचार्य एसएल अहिरवार ने बताया कि तीनों भाई सन् 1955 में इसी स्कूल में पढ़ते थे। 1958 की बोर्ड परीक्षा में देवेंद्र कुमार शुक्ला ने मप्र में नौवां स्थान प्राप्त किया था। जबकि सत्येंद्र कुमार शुक्ला ने 13वां स्थान प्राप्त किया। आज भी इन दोनों भाइयों का नाम स्कूल के बोर्ड पर टॉपरों की सूची में अंकित है। जो समय-समय पर अपने पैतृक नगर में आते रहते हैं। कुछ माह पहले ये लोग दमोह आए थे और अपने स्कूल में बिताई गईं पुरानी यादें एवं उस समय की शैक्षणिक व्यवस्था के बारे में सभी से अपने विचार साझा किए थे।
कठिन परिस्थितियों में बीता बचपन
सत्येंद्र शुक्ला ने बताया कि उनका परिवार 1955 में दमोह के बिलवारी मोहल्ले में निवास करता था। पिता रायगढ़ में ओएफओ थे। उनका युवावस्था में निधन हो गया था। परिवार की जिम्मेदारी उनकी मां पर आ गई। मां सावित्री देवी ने कठिन परिस्थितियों में तीनों भाइयों को पढ़ाया। इसलिए तीनों भाइयों ने अपनी मां की स्मृति में एक्सीलेंस स्कूल में बच्चों के लिए सर्वसुविधायुक्त आधुनिक कम्प्यूटर लैब बनवाने का निर्णय लिया। जिसे तीनों ने मिलकर बनाया। उन्होंने बताया कि हमें खुशी है कि हम अपने स्कूल के लिए कुछ कर पाए।
