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Damoh News: बड़ा मगरमच्छ अभी भी आज़ाद, पिंजरे में फंसा बच्चा, धनेटा तालाब में दहशत
Fri, 22 Aug 2025 09:07 AM IST
दमोह ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: दमोह ब्यूरो
Updated Fri, 22 Aug 2025 09:07 AM IST
सार
पकड़े गए मगरमच्छ के बच्चे को स्वास्थ्य परीक्षण के बाद सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाएगा। तालाब में अभी भी बड़े मगरमच्छ के होने की पुष्टि हुई है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि फिलहाल तालाब के पास न जाएं और न ही मवेशियों को वहां ले जाएं।
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मगरमच्छ। (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Amar ujala
विस्तार
दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लॉक में आने वाली ग्राम पंचायत धनेटा के तालाब में एक बहुत बड़ा मगरमच्छ है। जिसे पकड़ने वन विभाग ने पिंजरा रखा था, लेकिन पिंजरे में एक छोटा मगरमच्छ फंस गया। जिसे शुक्रवार की सुबह पकड़ा गया और ग्रामीण अभी भी दहशत में हैं, क्योंकि तालाब में अभी भी मगरमच्छ हैं, जिससे खतरा बना हुआ है। ग्राम पंचायत धनेटा के तालाब में एक माह पहले बड़ा मगरमच्छ ग्रामीणों को दिखाई दिया था। जिसको पकड़वाने के लिए वन विभाग से गुहार लगाई गई थी।
दमोह डीएफओ के निर्देश पर वन अमला लगातार मगरमच्छ को पकड़ने का प्रयास कर रहा था। हर बार मगरमच्छ दिखता जरूर था, लेकिन पकड़ में नहीं आ रहा था। गुरुवार को पुनः वन विभाग ने पिंजरा रखा और उसमें मगरमच्छ फंस गया, लेकिन जिस मगरमच्छ के लिए जाल बिछाया गया था। वह नहीं पकड़ा गया। उसकी जगह मगरमच्छ का बच्चा पिंजरे में कैद हो गया। वनकर्मी उसे झलोन रेंज लेकर पहुंचे हैं, जहां पशु विभाग से डॉक्टर स्वस्थ परीक्षण करने के बाद मगरमच्छ के बच्चे को सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाएगा।
ये भी पढ़ें: कब्जा मुक्त कार्रवाई के बाद इमामबाड़ा की सुरक्षा में तैनात जवान, वाहनों के प्रवेश पर लगाया प्रतिबंध
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बड़ा देखा था फंस गया छोटा
एक माह पूर्व धनेटा के तालाब में ग्रामीण नहाने पहुंचे थे, जहां उनको भारी भरकम मगरमच्छ दिखाई दिया। उन्होंने तत्काल मामले से सरपंच प्रतिनिधि को अवगत कराया। जानकारी मिलने के बाद धनेटा ग्राम पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि मनीष जैन ने मामले की सूचना झलोन रेंजर को दी। उन्होंने मगरमच्छ को पकड़ने के लिए तालाब के समीप पिंजरा रखवाया मगरमच्छ प्रतिदिन दिखाई देता, लेकिन वह पिंजरे में नहीं आ रहा था। मनीष जैन के अनुसार ग्रामीणों ने जिस मगरमच्छ को देखा था। वह करीब आठ फुट लंबा था, जबकि शुक्रवार को जो मगरमख्छ पकड़ा गया है वह मात्र तीन फुट का है। डिप्टी रेंजर शंकर ठाकुर ने बताया तालाब में जिस मगरमख्छ के लिए रेस्क्यू किया जा रहा था। वह अभी भी तालाब में है। पिंजरे में जो मगरमख्छ कैद हुआ है वह बच्चा है। वन विभाग के अनुसार तालाब में और भी मगरमच्छ हैं। इसलिए ग्रामीणों से अपील की गई है। अभी तालाब की ओर न जाएं और न ही अपने मवेशियों को भेंजे। झलोन वन परिक्षेत्र अधिकारी सतीश मसीह ने बताया मगरमच्छ को वन बिहार भोपाल भेजा जा रहा है। बड़े मगरमच्छ को पकड़ने पिंजरे में मुर्गा रखा गया था, जिसमें बच्चा फंस गया। तालाब में और भी मगरमच्छ हैं इसलिए लोग यहां न जाएं।
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दमोह डीएफओ के निर्देश पर वन अमला लगातार मगरमच्छ को पकड़ने का प्रयास कर रहा था। हर बार मगरमच्छ दिखता जरूर था, लेकिन पकड़ में नहीं आ रहा था। गुरुवार को पुनः वन विभाग ने पिंजरा रखा और उसमें मगरमच्छ फंस गया, लेकिन जिस मगरमच्छ के लिए जाल बिछाया गया था। वह नहीं पकड़ा गया। उसकी जगह मगरमच्छ का बच्चा पिंजरे में कैद हो गया। वनकर्मी उसे झलोन रेंज लेकर पहुंचे हैं, जहां पशु विभाग से डॉक्टर स्वस्थ परीक्षण करने के बाद मगरमच्छ के बच्चे को सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाएगा।
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बड़ा देखा था फंस गया छोटा
एक माह पूर्व धनेटा के तालाब में ग्रामीण नहाने पहुंचे थे, जहां उनको भारी भरकम मगरमच्छ दिखाई दिया। उन्होंने तत्काल मामले से सरपंच प्रतिनिधि को अवगत कराया। जानकारी मिलने के बाद धनेटा ग्राम पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि मनीष जैन ने मामले की सूचना झलोन रेंजर को दी। उन्होंने मगरमच्छ को पकड़ने के लिए तालाब के समीप पिंजरा रखवाया मगरमच्छ प्रतिदिन दिखाई देता, लेकिन वह पिंजरे में नहीं आ रहा था। मनीष जैन के अनुसार ग्रामीणों ने जिस मगरमच्छ को देखा था। वह करीब आठ फुट लंबा था, जबकि शुक्रवार को जो मगरमख्छ पकड़ा गया है वह मात्र तीन फुट का है। डिप्टी रेंजर शंकर ठाकुर ने बताया तालाब में जिस मगरमख्छ के लिए रेस्क्यू किया जा रहा था। वह अभी भी तालाब में है। पिंजरे में जो मगरमख्छ कैद हुआ है वह बच्चा है। वन विभाग के अनुसार तालाब में और भी मगरमच्छ हैं। इसलिए ग्रामीणों से अपील की गई है। अभी तालाब की ओर न जाएं और न ही अपने मवेशियों को भेंजे। झलोन वन परिक्षेत्र अधिकारी सतीश मसीह ने बताया मगरमच्छ को वन बिहार भोपाल भेजा जा रहा है। बड़े मगरमच्छ को पकड़ने पिंजरे में मुर्गा रखा गया था, जिसमें बच्चा फंस गया। तालाब में और भी मगरमच्छ हैं इसलिए लोग यहां न जाएं।
