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Dhar News: कब्जा मुक्त कार्रवाई के बाद इमामबाड़ा की सुरक्षा में तैनात जवान, वाहनों के प्रवेश पर लगाया प्रतिबंध
Fri, 22 Aug 2025 08:36 AM IST
धार ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धार
Published by: धार ब्यूरो
Updated Fri, 22 Aug 2025 08:36 AM IST
सार
धार जिले में स्थित विवादित इमामबाड़ा पर 19-20 अगस्त की दरमियानी रात जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए गेट लगाकर ताला जड़ दिया और संपत्ति को लोक निर्माण विभाग (PWD) की घोषित किया। प्रशासन ने परिसर में भारी पुलिस बल, STF, वज्र वाहन और फायर ब्रिगेड तैनात कर सुरक्षा कड़ी कर दी है।
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सुरक्षा में तैनात जवान।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इमामबाड़ा में जिला प्रशासन ने 19-20 अगस्त दरमियानी रात लगभग 4 बजे कार्रवाई करते हुए लोहे का लगभग 13x9 का गेट लगाकर ताला लगा दिया। साथ ही एक बोर्ड लगा दिया है जिस पर लिखा गया है कि 'यह संपत्ति लोक निर्माण विभाग मध्य प्रदेश शासन की है।' कार्रवाई के बाद ही स्पेशल टास्क फोर्स और पुलिस बल के अधिकारी और बड़ी संख्या में पुलिस जवान इमामबाड़ा परिसर में तैनात किए गए हैं, जबकि भवन के दोनों और मार्गन पर लगभग 50-50 मीटर की दूरी पर बैरिकेडिंग लगाकर चार पहिया वाहनों को प्रतिबंधित किया गया है। वहीं वज्र वाहन और फायर ब्रिगेड भी मौके पर तैनात हैं।
इमारत कब बनाई गई थी
इमारत के निर्माण को लेकर पुख्ता जानकारी तो नहीं, लेकिन बताया जाता है कि आजादी के काफी पहले यह इमारत धार के महाराजा आनंद राव पंवार के समय बनाई गई थी।
फिर कैसे PWD के पास आ गई
जब 1947 में भारत देश आजाद हुआ उसके बाद सन 1955 में यह संपत्ति (पीडब्ल्यूडी) लोक निर्माण विभाग के अधिकार में दे दी गई थी। इसके बाद PWD इस इमारत को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए किराए पर देने लगा।
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मुस्लिमों को कैसे मिली
जानकारी के अनुसार लगभग 1960 में मुसलमानों को सरकारी ताजिया रखने के लिए इमारत को किराए पर लिया कुछ समय तक तो वह इमारत का किराया देते रहे, लेकिन धीरे-धीरे किराया देना बंद कर दिया और अनाधिकृत रूप से पूरी इमारत पर कब्जा कर लिया।
इमारत पर विवाद कब से शुरू हुआ
लगभग 4 वर्ष पूर्व संस्कृति धरोहर रक्षा मंच ने सूचना एवं अधिकार के माध्यम से इमारत की जानकारी ली। इसके बाद इमामबाड़े को लेकर मामला प्रकाश में आया और संस्कृति धरोहर रक्षा मंच एसडीएम कोर्ट में इसकी शिकायत दर्ज कराई गई और अनधिकृत कब्जा छुड़वाने को लेकर मांग की। प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने पर लगभग डेढ़ साल पहले संस्कृति धरोहर रक्षा मंच हजारों की संख्या में एकत्रित होकर पैदल रैली निकाल कर ज्ञापन भी सौंपा था। वहीं हिंदू पंचायत का आयोजन भी किया गया था, जिसमें निर्णय लिया गया था कि प्रशासन कब्जा नहीं लेता है तो हिंदू समाज खुद इमारत पर ताला लगाएगा।
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इमारत कब बनाई गई थी
इमारत के निर्माण को लेकर पुख्ता जानकारी तो नहीं, लेकिन बताया जाता है कि आजादी के काफी पहले यह इमारत धार के महाराजा आनंद राव पंवार के समय बनाई गई थी।
फिर कैसे PWD के पास आ गई
जब 1947 में भारत देश आजाद हुआ उसके बाद सन 1955 में यह संपत्ति (पीडब्ल्यूडी) लोक निर्माण विभाग के अधिकार में दे दी गई थी। इसके बाद PWD इस इमारत को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए किराए पर देने लगा।
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मुस्लिमों को कैसे मिली
जानकारी के अनुसार लगभग 1960 में मुसलमानों को सरकारी ताजिया रखने के लिए इमारत को किराए पर लिया कुछ समय तक तो वह इमारत का किराया देते रहे, लेकिन धीरे-धीरे किराया देना बंद कर दिया और अनाधिकृत रूप से पूरी इमारत पर कब्जा कर लिया।
इमारत पर विवाद कब से शुरू हुआ
लगभग 4 वर्ष पूर्व संस्कृति धरोहर रक्षा मंच ने सूचना एवं अधिकार के माध्यम से इमारत की जानकारी ली। इसके बाद इमामबाड़े को लेकर मामला प्रकाश में आया और संस्कृति धरोहर रक्षा मंच एसडीएम कोर्ट में इसकी शिकायत दर्ज कराई गई और अनधिकृत कब्जा छुड़वाने को लेकर मांग की। प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने पर लगभग डेढ़ साल पहले संस्कृति धरोहर रक्षा मंच हजारों की संख्या में एकत्रित होकर पैदल रैली निकाल कर ज्ञापन भी सौंपा था। वहीं हिंदू पंचायत का आयोजन भी किया गया था, जिसमें निर्णय लिया गया था कि प्रशासन कब्जा नहीं लेता है तो हिंदू समाज खुद इमारत पर ताला लगाएगा।
