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भोपाल गैस त्रासदी मामले में कोर्ट सख्त: कोर्ट ने परिपालन रिपोर्ट पर जताई नाराजगी, दिया अंतिम अवसर

Tue, 21 Dec 2021 08:38 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Tue, 21 Dec 2021 08:38 PM IST
सार

भोपाल गैस त्रासदी मामले में मॉनिटरिंग कमेटी तथा हाईकोर्ट की अनुशंसाओं पर केंद्र सरकार ने परिपालन रिपोर्ट पेश की। हाईकोर्ट ने रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद नाराजगी जाहिर की और केंद्र सरकार को जमकर फटकार लगाई। 

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Court strict in Bhopal gas tragedy: Court expressed displeasure over compliance report, gave last opportunity
Jabalpur High Court - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भोपाल गैस त्रासदी मामले में मॉनिटरिंग कमेटी तथा हाईकोर्ट की अनुशंसाओं पर केंद्र सरकार ने परिपालन रिपोर्ट पेश की। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस विजय शुक्ला की युगलपीठ ने रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद नाराजगी जाहिर की और केंद्र सरकार को जमकर फटकार लगाई। केंद्र सरकार के आग्रह पर युगलपीठ ने अंतिम अवसर प्रदान किया, साथ ही संतोषजनक रिपोर्ट पेश नहीं करने पर कैबिनेट सचिव को तलब करने की चेतावनी दी है। याचिका पर अगली सुनवाई 10 जनवरी को निर्धारित की गई है।

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 गौरतलब है कि 2012 में भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन सहित अन्य की ओर से दायर की गई याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल गैस पीड़ितों के उपचार व पुनर्वास के संबंध में 20 निर्देश जारी किए थे। इन बिंदुओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित कर मॉनिटरिंग कमेटी गठित करने के निर्देश भी जारी किए थे। मॉनिटरिंग कमेटी प्रत्येक तीन माह में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष पेश करने तथा रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने के निर्देश भी दिए थे। जिसके बाद उक्त याचिका पर हाईकोर्ट द्वारा सुनवाई की जा रही थी।

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याचिका के लंबित रहने के दौरान मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसाओं का राज्य सरकार द्वारा परिपालन नहीं किए जाने के खिलाफ भी अवमानना याचिका दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों का परिपालन केंद्र व राज्य सरकार द्वारा नहीं किया जा रहा है। गैस त्रासदी के पीड़ित व्यक्तियों के हेल्थ कार्ड तक नहीं बने हैं। इसके अलावा अस्पतालों में आवश्यकता अनुसार उपकरण व दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। बीएमएचआरसी के भर्ती नियम निर्धारित होने के कारण डॉक्टर व पैरा मेडिकल स्टाफ स्थाई तौर पर अपनी सेवाएं प्रदान नहीं करते।

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याचिका की सुनवाई करते हुए पूर्व में युगलपीठ ने गैस पीड़ितों के उपचार के संबंध में वास्तविक स्थिति जानने के लिए केंद्र के अतिरिक्त सचिव के अधिकारी, प्रदेश सरकार के सचिव स्तर के अधिकारी, भोपाल गैस राहत एवं पुनर्वास विभाग तथा एमसीआई के एक-एक प्रतिनिधि सहित याचिकाकर्ता की कमेटी बनाई थी। मॉनिटरिंग कमेटी की तरफ से पेश किए गए आवेदन में कहा गया था कि गैस पीड़ित कैंसर मरीजों को अस्पताल में उपचार नहीं मिल पा रहा है। मजबूरन उन्हें प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करवाना पड़ रहा है। 

पिछली सुनवाई के दौरान पेश की गई परिपालन रिपोर्ट पर युगलपीठ ने नाराजगी व्यक्त की थी। कैंसर के अलावा अन्य बीमारियों का समुचित उपचार नहीं मिलने पर युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि क्या आप चाहते हैं कि मजबूरन हम यह आदेश पारित कर दें कि पीड़ित अपनी मर्जी से किसी भी अस्पताल में उपचार करवाए, उनका खर्च सरकार उठाएगी। याचिका पर मंगलवार को सुनवाई के दौरान पेश की गई परिपालन रिपोर्ट संतोषजनक नहीं पाते हुए युगलपीठ ने केंद्र सरकार को जमकर फटकार लगाई। केंद्र सरकार के आग्रह पर युगलपीठ ने चेतावनी के साथ अंतिम अवसर प्रदान किया है। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ उपस्थित हुए। 
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