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मध्यप्रदेश: इंदौर ने बनाया खुद का होम आइसोलेशन नियम, मरीजों पर होती है 24 घंटे निगरानी
Sat, 20 Jun 2020 02:20 PM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अनवर अंसारी
Updated Sat, 20 Jun 2020 02:20 PM IST
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Doctor Hemant jain
- फोटो : Amar Ujala
कोरोना वायरस से ठीक होने वाले मरीजों के लिए केंद्र सरकार ने होम आइसोलेशन की गाइडलाइन बनाई है, जिसका अस्पताल से लौटने वाले हर मरीज को पालन करना होता है। इसके अलावा स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जिन लोगों को होम आइसोलेशन में जाने को कहा जाता है, उन्हें भी इस गाइडलाइन का पालन करना होता है।
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वहीं, मध्यप्रदेश का इंदौर देश का ऐसा पहला शहर है, जिसने होम आइसोलेशन का एक हाईटेक पैटर्न बनाया है, जिससे सफलतापूर्वक मरीजों का घर पर इलाज किया जा सकता है। इसकी सफलता का सेहरा इंदौर के जिला कलेक्टर मनीष सिंह को जाता है। गौरतलब है कि, मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित शहर इंदौर ही है।
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इंदौर में कोरोना मरीजों को घर में रखकर इलाज की जो व्यवस्था बनाई गई है, उससे काफी मदद मिल रही है। इसका बेहतर परिणाम मिलना शुरू हो गया है। साथ ही अत्याधुनिक सुविधा से युक्त कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। कंट्रोल रूम में एप के माध्यम से सतत निगरानी की जा रही है और मरीजों को परामर्श तथा आवश्यकता के अनुसार उपचार और अन्य मदद मुहैया कराई जा रही है।
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मरीजों के लिए बनाया गया होम आइसोलेशन एप
इंदौर नगर निगम की 311 एप में होम आइसोलेशन का फीचर जोड़ा गया है। जिसके द्वारा कोविड-19 संक्रमण के प्रीसिम्पटोमैटिक (जिनमें लक्षण सामने नहीं आए हैं) मामलों को निर्धारित मापदंडो के अनुसार होम आइसोलेशन में भेजकर सतत निगरानी रखी जा रही है। होम आइसोलेट किए गए मरीज को रैपिड रिस्पांस टीम द्वारा मेडिसिन किट और एक पल्स ऑक्सीमीटर दिया जाता है। मेडिसिन किट में एलोपैथी, होम्योपैथी और आयुर्वेदिक दवाइयां होती हैं। पल्स ऑक्सीमीटर द्वारा ऑक्सीजन सैचुरेशन और पल्स रेट को मापा जाता है।
पहले एप में पंजीकरण करना होता है
दरअसल, प्रशासन ने एक होम आइसोलेशन के लिए एक पूरी व्यवस्था का इजाद किया है। किसी भी मरीज को होम आइसोलेशन की शुरुआत करने से पहले इंदौर की एक लोकल एप में पंजीकरण करना होता है। इसमें मरीज को एक स्व घोषणा पत्र भरना होता है, जिसके माध्यम से मरीज की फोटो और मेडिकल जानकारी एप पर अपलोड कर ली जाती है।
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मरीज एप पर देता है जानकारी, गड़बड़ लगने पर डॉक्टर करते हैं वीडियो कॉल
आइसोलेट किए गए व्यक्ति द्वारा एप के माध्यम से ऑक्सीजन सैचुरेशन और पल्स रेट को हर चार घंटे के अंतराल में फीड किया जाता है। जैसे ही कोई मरीज आंकड़े फीड करता है, वह एसजीआईटीएस कॉलेज स्थित कंट्रोल रूम में लगे मॉनिटर पर प्रदर्शित होता है। यदि किसी मरीज द्वारा डाटा फीड नहीं किया जाता है तो कंट्रोल रूम से फोन कर मरीज से जानकारी ली जाती है। अगर किसी मरीज के आंकड़े गड़बड़ लगते हैं तो कंट्रोल रूम के डॉक्टर उससे वीडियो कॉल पर जानकारी लेते हैं। कंट्रोल रूम में चार डॉक्टर उपस्थित है, जिनका काम आइसोलेट मरीज पर 24 घंटे निगरानी रखना है।
हर रोज मरीज को किया जाता कॉल
कंट्रोल रूम में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर हर रोज कम से कम दो बार मरीज को कॉल कर उसका हाल जानते हैं। ताकि उसके स्वास्थ्य पर निगरानी रखी जा सके। यदि किसी मरीज की ऑक्सीजन सैचुरेशन 90 फीसदी से कम हो जाए, पल्स रेट 60 से कम आए और उसे सांस लेने में परेशानी हो तो आरआरटी द्वारा ऐसे मरीज के घर जाकर उसकी जांच की जाती है। इसके बाद जरूरत पड़ने पर उसे अस्पताल रेफर किया जाता है।
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ये अधिकारी संभाल रहे हैं जिम्मा
होम आइसोलेशन ग्रुप के मुख्य समन्वयक के रूप में डॉ हेमंत जैन को नियुक्त किया गया है। वहीं, होम आइसोलेशन कंट्रोल रूम के प्रशासनिक इंजार्ज के तौर पर जिला पंचायत सीईओ रोहन सक्सेना को नियुक्त किया गया है। इसके अलावा एसडीएम, आरआरटी कंट्रोल रूम डॉक्टर, कंप्यूटर ऑपरेटर और मरीज एवं सहयोगी से समन्वय स्थापित करने के लिए डॉक्टर सुनील गंगराड़े को नियुक्त किया गया है।
कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहर अस्पतालों में बेड की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में उनके लिए इंदौर का यह होम आइसोलेशन पैटर्न एक आदर्श बन सकता है।
