{"_id":"67e220e4d8575230530982a2","slug":"woman-declared-dead-on-government-papers-wandering-from-door-to-door-for-justice-government-mistake-became-the-biggest-problem-of-life-no-ration-no-government-help-chhindwara-news-c-1-1-noi1218-2761588-2025-03-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chhindwara News: जीवित महिला सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित, दस महीनों से काट रही दफ्तरों के चक्कर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chhindwara News: जीवित महिला सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित, दस महीनों से काट रही दफ्तरों के चक्कर
Tue, 25 Mar 2025 02:03 PM IST
छिंदवाड़ा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा
Published by: छिंदवाड़ा ब्यूरो
Updated Tue, 25 Mar 2025 02:03 PM IST
सार
पति की मृत्यु के बाद जब उन्होंने संबल योजना का लाभ लेने की कोशिश की, तब उन्हें पता चला कि सरकारी रिकॉर्ड में वह खुद मृत दर्ज हैं। बच्चों की पढ़ाई छूट गई और परिवार मजदूरी करने को मजबूर हो गया।
विज्ञापन
पीड़ित संध्या।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छिंदवाड़ा जिले में सरकारी लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक जीवित महिला पिछले 10 महीनों से खुद को जिंदा साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रही है। समग्र आईडी में गलती के कारण सरकार ने उन्हें मृत घोषित कर दिया, जिसके चलते उनकी सभी सरकारी योजनाओं का लाभ बंद कर दिया गया है। पटाखा गोदाम, सिवनी रोड में रहने वाली संध्या मंडराह इस प्रशासनिक लापरवाही की शिकार हुई हैं। अगस्त 2024 में उन्हें समग्र आईडी पोर्टल में मृत दिखा दिया गया और तब से उनकी लाडली बहना योजना, संबल योजना, आयुष्मान योजना और राशन योजना जैसी सभी सरकारी सुविधाएं बंद हो गई हैं।
विज्ञापन
पति की मौत के बाद सामने आया सच
संध्या और उनके पति मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। 11 मई 2024 को उनके पति की तबीयत अचानक बिगड़ी, जिसके बाद उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पति की मौत के बाद संध्या संबल योजना का लाभ लेने के लिए नगर पालिका निगम के दफ्तर पहुंचीं, लेकिन जब दस्तावेजों की जांच हुई तो अधिकारियों ने बताया कि सरकारी रिकॉर्ड में वह खुद अगस्त 2024 में मृत हो चुकी हैं। यह सुनकर संध्या के पैरों तले जमीन खिसक गई।
विज्ञापन
मदद बंद होते ही बच्चों को छोड़नी पड़ी पढ़ाई
सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित होने के बाद संध्या को हर महीने मिलने वाली लाडली बहना योजना की राशि मिलनी बंद हो गई। इसके अलावा गरीबों के लिए मिलने वाला मुफ्त राशन भी अब उन्हें नहीं मिल रहा। पति के गुजरने और सरकारी योजनाओं के लाभ बंद होने के कारण घर की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई। मजबूरी में संध्या के दोनों बेटों ने पढ़ाई छोड़कर मजदूरी करनी शुरू कर दी।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- चीतों ने गाय को पकड़ा तो ग्रामीणों ने मारे पत्थर, वन विभाग के मना करने पर भी नहीं माने
जनसुनवाई, हेल्पलाइन में शिकायतें, लेकिन नहीं मिला समाधान
संध्या ने पिछले 8 महीनों में सीएम हेल्पलाइन (181), जनसुनवाई और कई सरकारी कार्यालयों में शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। वह हर दिन सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रही हैं, अधिकारियों के सामने गुहार लगा रही हैं, लेकिन अब तक उन्हें जिंदा मानने के लिए कोई तैयार नहीं है।
सरकारी गलती की सजा संध्या को
यह पूरा मामला सरकारी लापरवाही का बड़ा उदाहरण है। एक छोटी सी प्रशासनिक गलती ने संध्या मंडराह की पूरी जिंदगी अंधेरे में धकेल दी। एक जिंदा इंसान को मृत घोषित कर देना न केवल अमानवीय है, बल्कि यह सरकार की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
ये भी पढ़ें- सरपंच पति पर युवक को धमकाने का आरोप, मनरेगा फर्जीवाड़े से जुड़ा मामला, थाने पहुंची शिकायत
क्या बोले अधिकारी?
जब इस मामले में नगर पालिका के अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि यह समग्र आईडी पोर्टल में हुई गलती के कारण हुआ है। इस मामले की जांच करवाई जाएगी और जल्द से जल्द सही किया जाएगा।
संध्या की प्रशासन से अपील
संध्या मंडराह ने प्रशासन से अपील की है कि उनकी समग्र आईडी में सुधार किया जाए, ताकि वह फिर से सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सके। संध्या ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मदद की गुहार लगाई है।
