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छिंदवाड़ा: किसानों के मुद्दे पर भाजपा से टकराव, अमित सक्सेना ने छोड़ी पार्टी; जिला अध्यक्ष को भेजा इस्तीफा
Fri, 16 Oct 2026 06:53 PM IST
छिंदवाड़ा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा
Published by: छिंदवाड़ा ब्यूरो
Updated Fri, 16 Oct 2026 06:53 PM IST
सार
किसानों की समस्याओं को लेकर आंदोलन करने वाले जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित सक्सेना ने भाजपा की प्राथमिक और सक्रिय सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के कारण उन्हें अनुशासनहीनता का नोटिस मिला और लोगों को प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए फोन किए गए।
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अमित सक्सेना
विस्तार
किसानों की समस्याओं को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब भाजपा के भीतर सियासी टकराव की बड़ी वजह बन गया है। जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित सक्सेना ने भाजपा संगठन से बढ़ते मतभेदों के बीच पार्टी की प्राथमिक और सक्रिय सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र भाजपा जिला अध्यक्ष शेषराव यादव को भेजा है। सक्सेना ने इस्तीफे में साफ कहा कि किसानों और आम जनता की समस्याओं को लेकर आवाज उठाने पर उन्हें अनुशासनहीनता का नोटिस दिया गया। इतना ही नहीं, उनके आरोप के मुताबिक, किसान आंदोलन में लोगों की भागीदारी रोकने के लिए भी फोन किए गए। सक्सेना ने इसे अपने आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए पार्टी छोड़ने का फैसला किया।
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सक्सेना के इस्तीफे से जिले की राजनीति में एक बार फिर भाजपा के भीतर असंतोष और संगठनात्मक अनुशासन को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। खास बात यह है कि विवाद किसी व्यक्तिगत राजनीतिक बयान से नहीं, बल्कि सूखे की स्थिति, किसानों के मुआवजे और अन्य जनहित के मुद्दों को लेकर शुरू हुआ था। सक्सेना इन मांगों को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय थे और किसानों के समर्थन में आंदोलन कर रहे थे। इसी गतिविधि को लेकर संगठन ने उन्हें नोटिस जारी कर दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच खींचतान बढ़ती गई और अब मामला इस्तीफे तक पहुंच गया है।
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किसानों के मुद्दों पर सक्रियता बनी विवाद की वजह
जिले में बारिश की कमी से फसलों पर संकट के बीच अमित सक्सेना ने ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर किसानों की समस्याएं उठाई थीं। उनकी प्रमुख मांगों में जिले को सूखाग्रस्त घोषित करना, डूब क्षेत्र के किसानों को चार गुना मुआवजा देना और न्यूक्लियर पावर प्लांट की स्थापना से जुड़े मुद्दे शामिल थे। इसके अलावा वे अन्य जनसमस्याओं को लेकर भी प्रदर्शन की तैयारी कर रहे थे।
सक्सेना इन मुद्दों को लेकर गांवों में पहुंच रहे थे और किसानों के बीच अपनी बात रख रहे थे। इसी बीच भाजपा जिला अध्यक्ष शेषराव यादव ने उन्हें अनुशासनहीनता का नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब मांगा। संगठन की ओर से उनकी गतिविधियों को पार्टी की रीति-नीति के विपरीत बताते हुए आगामी दौरा कार्यक्रम निरस्त करने के निर्देश भी दिए गए थे। नोटिस जारी होने के बाद विवाद और गहरा गया। सक्सेना ने किसानों की समस्याओं को लेकर अपनी सक्रियता जारी रखी, वहीं संगठन की कार्रवाई को लेकर उनके असंतोष की बात सामने आई। अब उन्होंने इस्तीफा देकर संगठन के साथ अपने मतभेदों को खुलकर सामने रख दिया है।
जिला कार्यालय से फोन कर लोगों को रोकने का आरोप
भाजपा जिला अध्यक्ष को भेजे त्यागपत्र में सक्सेना ने किसान आंदोलन में लोगों की भागीदारी को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि भाजपा जिला कार्यालय से फोन कर लोगों को आंदोलन में शामिल नहीं होने के लिए कहा गया। सक्सेना के मुताबिक, किसानों की समस्याओं को लेकर आंदोलन करना उनका जनहित से जुड़ा प्रयास था, लेकिन इस तरह लोगों को रोकने की कोशिश ने उन्हें आहत किया। उन्होंने इस्तीफे में कहा कि अपने क्षेत्र और जिले में बारिश की कमी से पैदा हुए हालात को देखते हुए उन्होंने किसानों की आवाज उठाई थी। इसके बदले उन्हें अनुशासनहीनता का नोटिस मिला। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को अपने आत्मसम्मान से जोड़ते हुए पार्टी की सदस्यता छोड़ने का निर्णय लिया। हालांकि, आंदोलन में शामिल होने से लोगों को रोकने के आरोपों पर भाजपा संगठन का पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में इस पूरे मामले में संगठन की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
'किसानों के लिए आगे भी उठाऊंगा आवाज'
सक्सेना ने अपने इस्तीफे में यह भी कहा कि किसानों और आम जनता की समस्याओं को लेकर वे आगे भी प्रदर्शन करेंगे और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपेंगे। उनका कहना है कि जनहित के मुद्दों को उठाना उनका उद्देश्य है और इसके लिए वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की मांगों को लेकर आंदोलन करने के बाद भी भाजपा संगठन और मध्यप्रदेश सरकार की ओर से अपेक्षित सहयोग या कार्रवाई नहीं की गई। इसी असंतोष के बीच उन्होंने पार्टी की प्राथमिक और सक्रिय सदस्यता से स्वेच्छा से त्यागपत्र देने की घोषणा की।
सक्सेना के इस रुख से साफ है कि वे किसानों और क्षेत्रीय समस्याओं के मुद्दे पर अपनी राजनीतिक सक्रियता जारी रखने की बात कह रहे हैं। हालांकि, आगे उनकी भूमिका क्या होगी और वे किस मंच से इन मुद्दों को उठाएंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
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लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे
अमित सक्सेना लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। कांग्रेस में रहते हुए उनकी ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छी पकड़ मानी जाती थी। भाजपा में शामिल होने के बाद वे जिला पंचायत उपाध्यक्ष के रूप में सक्रिय रहे। अब किसानों के मुद्दों को लेकर संगठन से टकराव और इस्तीफे ने उनकी राजनीतिक स्थिति को फिर चर्चा में ला दिया है। सक्सेना का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब जिले में किसानों की समस्याओं को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। बारिश की कमी से फसलों पर संकट और मुआवजे की मांग जैसे मुद्दों पर आंदोलन के बीच भाजपा के एक जिला पंचायत उपाध्यक्ष का पार्टी छोड़ना राजनीतिक रूप से अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।
अब संगठन के रुख पर नजर
अमित सक्सेना के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि भाजपा संगठन इस मामले में क्या रुख अपनाता है। क्या संगठन उनके आरोपों पर जवाब देगा या इस घटनाक्रम को पार्टी के आंतरिक अनुशासन से जुड़ा मामला मानकर आगे बढ़ेगा, इस पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं। दूसरी ओर, सक्सेना ने किसानों और जनसमस्याओं को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कही है। ऐसे में आने वाले दिनों में वे किन मुद्दों को लेकर मैदान में उतरते हैं और उनके अगले राजनीतिक कदम क्या होते हैं, यह जिले की राजनीति की दिशा तय करने वाले घटनाक्रमों में शामिल हो सकता है। फिलहाल, किसानों की समस्याओं को लेकर शुरू हुआ विवाद भाजपा संगठन और अमित सक्सेना के बीच खुली दूरी के रूप में सामने आया है। इस्तीफे ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि जनहित के मुद्दों पर आंदोलन करने वाले पार्टी नेताओं और संगठनात्मक अनुशासन के बीच संतुलन कैसे बनेगा।
