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जटाशंकर में दिखा प्रकृति का अद्भुत श्रृंगार: गोमुख की धार हुई तेज, श्रद्धालुओं ने किया भगवान शंकर का जलाभिषेक
Fri, 03 Jul 2026 09:29 AM IST
छतरपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,छतरपुर
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Published by: छतरपुर ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jul 2026 09:29 AM IST
सार
छतरपुर में हुई झमाझम बारिश के बाद बुंदेलखंड के केदारनाथ कहे जाने वाले श्री जटाशंकर धाम का मनमोहक स्वरूप देखने को मिला। पहाड़ियों से झरने उफान पर आ गए और गोमुख की तेज जलधारा के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद लिया गया।
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श्री जटाशंकर धाम का मनमोहक स्वरूप देखने को मिला।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छतरपुर में गुरुवार को हुई झमाझम बारिश ने बुंदेलखंड के केदारनाथ कहे जाने वाले श्री जटाशंकर धाम का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया। तेज बारिश के बाद पहाड़ियों से झरने उफान पर आ गए और सीढ़ियों से पानी बहता हुआ सीधे मंदिर परिसर तक पहुंच गया। गोमुख की जलधारा भी तेज हो गई, जिससे पूरा धाम प्राकृतिक सौंदर्य से सराबोर नजर आया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की, वहीं कई लोग झरनों के बीच प्राकृतिक नजारों का आनंद लेते दिखे।
छतरपुर जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर और बिजावर तहसील से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित श्री जटाशंकर धाम चारों ओर से पहाड़ियों और हरियाली से घिरा हुआ है। बारिश के दौरान पहाड़ियों से बहता पानी मंदिर परिसर, गुफा, गोमुख और चौक तक पहुंच गया। पानी का बहाव इतना तेज था कि कुछ समय के लिए श्रद्धालुओं का वहां रुकना भी मुश्किल हो गया।
यहां गोमुख से वर्षभर प्राकृतिक जलधारा बहती है
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जटाशंकर धाम में गोमुख से वर्षभर प्राकृतिक जलधारा बहती रहती है, जिससे भगवान शिव का निरंतर जलाभिषेक होता है। यही वजह है कि यह मंदिर क्षेत्र के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल है। यहां अमावस्या और सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में बने तीनों कुंड भी वर्षभर जल से भरे रहते हैं।
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ये भी पढ़ें- हाशिए पर इंदौर पार्ट 3: दस वर्षों में न एयरपोर्ट का विस्तार हुआ, न कान्ह नदी की हो सकी सफाई
'बारिश में धाम का प्राकृतिक श्रृंगार देखते ही बनता है'
जटाशंकर धाम ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने बताया कि इस सीजन की पहली तेज बारिश के बाद धाम का अद्भुत और मनमोहक दृश्य देखने को मिला। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान जटाशंकर महादेव का प्राकृतिक श्रृंगार होता है और यही नजारा देखने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंचते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि तेज बारिश के दौरान सीढ़ियों और कुंडों के आसपास विशेष सावधानी बरतें, क्योंकि पानी का बहाव तेज होने और फिसलन बढ़ने से दुर्घटना की आशंका रहती है।
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छतरपुर जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर और बिजावर तहसील से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित श्री जटाशंकर धाम चारों ओर से पहाड़ियों और हरियाली से घिरा हुआ है। बारिश के दौरान पहाड़ियों से बहता पानी मंदिर परिसर, गुफा, गोमुख और चौक तक पहुंच गया। पानी का बहाव इतना तेज था कि कुछ समय के लिए श्रद्धालुओं का वहां रुकना भी मुश्किल हो गया।
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यहां गोमुख से वर्षभर प्राकृतिक जलधारा बहती है
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जटाशंकर धाम में गोमुख से वर्षभर प्राकृतिक जलधारा बहती रहती है, जिससे भगवान शिव का निरंतर जलाभिषेक होता है। यही वजह है कि यह मंदिर क्षेत्र के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल है। यहां अमावस्या और सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में बने तीनों कुंड भी वर्षभर जल से भरे रहते हैं।
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'बारिश में धाम का प्राकृतिक श्रृंगार देखते ही बनता है'
जटाशंकर धाम ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने बताया कि इस सीजन की पहली तेज बारिश के बाद धाम का अद्भुत और मनमोहक दृश्य देखने को मिला। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान जटाशंकर महादेव का प्राकृतिक श्रृंगार होता है और यही नजारा देखने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंचते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि तेज बारिश के दौरान सीढ़ियों और कुंडों के आसपास विशेष सावधानी बरतें, क्योंकि पानी का बहाव तेज होने और फिसलन बढ़ने से दुर्घटना की आशंका रहती है।
