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MP: बाल संरक्षण या सियासी दांव पेंच, मदरसों को लेकर फैलाई जा रही वैमनस्यता के खिलाफ उठने लगे स्वर, जानें मामला
Wed, 16 Oct 2024 01:06 PM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Wed, 16 Oct 2024 01:06 PM IST
सार
MP: सियासी घमासान के बीच उठे शोर ने मदरसों को आतंकी अड्डे और यहां शिक्षा हासिल करने वाले बच्चों को जेहादी घोषित कर दिया। सरकार से लेकर बच्चों के संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने वाले आयोग तक एक स्वर में प्रदेश समेत देशभर के मदरसों को बंद करने की पैरवी करते नजर आ रहे हैं।
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मदरसा बोर्ड
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को प्रस्तुत प्रस्ताव में मप्र आधुनिक मदरसा कल्याण संघ ने सिलसिलेवार बात रखी है। शिक्षा मंत्री को दिए गए प्रस्ताव में कहा गया है कि राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग द्वारा भारत के हर राज्य के मुख्य सचिवों को अनुशंसा पत्र लिखा गया है।
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उस पत्र में राज्य बाल संरक्षण आयोग द्वारा रिपोर्ट के आधार पर मदरसों एवं मदरसा बोर्ड को भंग व राज्य अनुदान न देने को कहा गया है। संघ ने कहा है कि मप्र में प्रत्येक मदरसा अनुच्छेद 28 भारतीय संविधान के अंतर्गत संचालित होता है। राज्य बाल संरक्षण आयोग द्वारा उल्लेखित किया गया कि मदरसों में अध्ययनरत छात्र के दायरों का उल्लंघन होता है।
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RTE की पूर्ति कर रहे मदरसा
आधुनिक मदरसा कल्याण संघ का कहना है कि मदरसे/2009 RTE के दायरे के बाहर हैं। यह RTE एक्ट में शामिल नहीं हैं, किन्तु वह RTE एक्ट के उद्देश्य की पूर्ति करते हैं। RTE एक्ट का उद्देश्य है कि 6 से 14 साल के प्रत्येक बालक-बालिका को को कक्षा 1 से 8 तक निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान की जाना है। मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त मदरसों द्वारा RTE एक्ट के उद्देश्यों की पूर्ति करते हुए निःशुल्क अथवा नाममात्र शुल्क में प्रत्येक बालक-बालिका को राज्य शिक्षा केन्द्र के निर्धारित पाठ्यक्रम अनुसार शिक्षा प्रदान की जा रही है। कक्षा 5 एवं 8 की राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा आयोजित की जाने वाली बोर्ड परीक्षा में सम्मिलित कराया जा रहा है।
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भेदभाव भरी सुविधा
आधुनिक मदरसा कल्याण संघ ने कहा कि संस्कृत बोर्ड और संस्कृत भाषा के विकास के लिए राज्य शासन द्वारा 3 करोड़ का अनुदान दिया जाता है, जबकि मदरसा बोर्ड को मात्र 32 लाख मिल रहा है। जिसमें मदरसा बोर्ड अपने प्रशासनिक एवं स्थापना व्यय की भी पूर्ति नहीं कर पाता है। इस स्थिति के चलते मदरसों का विकास होना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन ही है। कल्याण संघ ने शिक्षा मंत्री राव को याद दिलाया कि विगत 2 वर्षों से मदरसा बोर्ड को स्वीकृत 32 लाख का अनुदान भी पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं हुआ है। जिसके कारण बोर्ड के कर्मचारियों के वेतन में भी कठिनाई उत्पन्न हो रही है।
7 साल से नहीं कार्यकारिणी
वर्ष 2017 के बाद से मदरसा बोर्ड की एक्ट के अनुसार कार्यकारिणी घोषित नहीं की गई है। वर्ष 2002 के बाद से मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली मदरसा बोर्ड सलाहकार समिति की बैठक आयोजित नहीं की गई है। जिसके कारण मदरसों एवं मदरसा बोर्ड के विकास पर विराम लग गया है।
संविधान विरुद्ध भेदभाव
भारतीय संविधान में सम्मिलित अनुच्छेद 29 के द्वारा राज्य में चलाए जा रहे किसी भी अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों मुख्य रुप से मदरसों के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता है। भारत के संविधान में सम्मिलित अनुच्छेद 30 में राज्य के पिछड़े क्षेत्रों में अल्पसंख्यक वर्ग भारी संख्या में रहता है। वहां शिक्षा के क्षेत्र में सुविधा कराना होगी। इसके लिए फारसी व अरबी भाषा संचालित करने वाली संस्थाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना चाहिए।
बंद करने की बजाए हों सुधार
आधुनिक मदरसा कल्याण संघ ने शिक्षा मंत्री से कहा है कि मध्य प्रदेश मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त मदरसों में मध्य प्रदेश राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा हर नीति व नियम का पालन किया जाता है। मदरसे भी शासकीय स्कूलों के समान कार्य करते हैं। मदरसों में अध्ययनरत छात्र छात्राओं की समग्र मैपिंग की जाती है।
मध्यप्रदेश राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा संचालित कक्षा 5वीं व 8वीं में मदरसा के छात्र छात्राओं को परीक्षा में सम्मिलित किया जाता है। आधुनिक मदरसा कल्याण संघ ने कहा कि राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग द्वारा मदरसा छात्रों में डर और खौफ फैलाया जा रहा है। मदरसा छात्रों को भारत के संविधान ने आधिकार दिया है। उसका उपयोग करते हुए वह स्वेच्छा से और अभिभावकों की सहमति से शिक्षा ग्रहण करते हैं। कल्याण संघ ने शिक्षा मंत्री राव से कहा कि मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त मदरसों के संचालन में यदि कोई कमी है तो निर्देशानुसार कमियों को दूर किया जाएगा। मदरसों और मदरसा बोर्ड को सश्क्त बनाए जाने हेतु प्रयास किया जाए।
