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फिर उलझे कटारे: एमपी के उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म मामले की जांच दोबारा होगी

Mon, 04 Aug 2025 11:37 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Mon, 04 Aug 2025 11:37 PM IST
सार

मध्य प्रदेश कांग्रेस विधायक और विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे एक बार फिर पुराने दुष्कर्म केस को लेकर कानूनी मुश्किलों में घिरते नजर आ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उस मामले की दोबारा जांच कराने के आदेश दिए हैं, जिसे हाईकोर्ट ने पहले रद्द कर दिया था। ये मामला वर्ष 2018 का है, जब कटारे पर एक पत्रकारिता छात्रा ने दुष्कर्म और अपहरण के आरोप लगाए थे। अब सुप्रीम कोर्ट ने जांच फिर से शुरू करने की अनुमति दी है, जिससे कटारे की परेशानियां बढ़ सकती हैं।

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The swords are again entangled: The rape case registered against MP's Deputy Leader of Opposition Hemant will
कांग्रेस विधायक और उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश के कांग्रेस विधायक और विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे एक बार फिर दुष्कर्म के पुराने मामले में उलझते नजर आ रहे हैं। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा जिस दुष्कर्म मामले की एफआईआर को रद्द कर दिया था, सर्वोच्च न्यायालय ने उस मामले में दोबारा जांच कराने के आदेश राज्य सरकार को दिए हैं। राज्य सरकार की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय के दो न्यायमूर्ति की पीठ ने यह आदेश दिया है। अगर जांच दोबारा शुरू होती है तो कटारे उलझ सकते हैं। हालांकि, दुष्कर्म पीड़िता कुछ साल पहले प्रयागराज जिले में एक रिश्तेदार के यहां आत्महत्या कर चुकी है।
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जानकारी के अुनसार भिंड जिले के अटेर से विधायक हेमंत कटारे ने वर्ष 2018 के जनवरी महीने में 17-18 तारीख की दरमियानी रात भोपाल क्राइम ब्रांच में एक युवती के खिलाफ ब्लैकमेलिंग का प्रकरण दर्ज कराया था। आरोप लगाया था कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की 21 वर्षीय छात्रा आकांक्षा कुमारी (परिवर्तित नाम) दुष्कर्म का झूठा प्रकरण दर्ज कराने के बदले दो करोड़ रुपये की मांग कर रही है। बाद में युवती ने 25 लाख लेकर प्रकरण दर्ज कराने से इंकार कर दिया है। क्राइम ब्रांच ने कटारे की शिकायत पर प्रकरण दर्ज कर युवती को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान युवती ने कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे द्वारा अपहरण कर दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगाया। इसके बाद 23-24 जनवरी 2018 को भोपाल के महिला थाने में कटारे के खिलाफ अपहरण कर दुष्कर्म करने का प्रकरण दर्ज किया गया था।
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फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट गए थे कटारे
पुलिस सूत्रों के अनुसार फॉरेंसिक रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हो पाई थी। इसी फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर हेमंत कटारे ने जबलपुर उच्च न्यायालय में एफआईआर को चुनौती थी। कटारे की याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म की एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया था। उच्च न्यायालय के इस फैसले के खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। सर्वोच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस विश्वनाथन की पीठ ने राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए दुष्कर्म की एफआईआर को निरस्त करने के उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगा दी है। साथ ही कटारे पर दर्ज किए गए दुष्कर्म मामले की नए सिरे से जांच के आदेश मध्य प्रदेश सरकार को दिए हैं। सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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बयान भी बदल चुकी थी पीड़िता
दुष्कर्म का प्रकरण दर्ज कराने वाली पीड़िता जब ब्लैकमेलिंग मामले में जमानत पर जेल से बाहर निकली को उसने सनसनीखेज आरोप लगाए थे। पीड़ित युवती ने भाजपा के दो कद्दावर नेताओं के कथित गुर्गों के दबाव में दुष्कर्म का प्रकरण दर्ज कराने की बात कही थी। पीड़िता ने कहा था कि कुछ लोग हमसे मिलने भोपाल केंद्रीय जेल आए थे और कहा था कि ब्लैकमेलिंग केस से बचने के लिए दुष्कर्म का मामला दर्ज कराओ। हम लोग तुम्हारी मदद करेंगे। बाद में पीड़िता ने भोपाल जिला अदालत में दुष्कर्म के मामले में कटारे के पक्ष में हलफनामा प्रस्तुत कर दिया था। इसको लेकर उसे अलग-अलग माध्यमों से धमकियां मिल रही थीं, इसके बाद पीड़िता ने भी अपनी सुरक्षा के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, कुछ वर्ष पहले पीड़िता ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक रिश्तेदार के घर में आत्महत्या कर ली थी। परिजनों द्वारा कहा गया था कि वह कई महीने से डिप्रेशन में थी और कॅरियर व अन्य कारणों से परेशान थी।

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