फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal News ›   Salaries of 70,000 teachers may increase; they could receive arrears worth lakhs, as the High Court grants the

70 हजार शिक्षकों की बढ़ सकती है सैलरी: मिल सकता है लाखों का एरियर, हाईकोर्ट ने सरकार को 4 हफ्ते दिए

Thu, 24 Sep 2026 07:53 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Thu, 24 Sep 2026 07:53 PM IST
सार

पहली नियुक्ति से सेवा जोड़ने के मामले में हाईकोर्ट ने सरकार को चार सप्ताह का समय दिया है। सुप्रीम कोर्ट से एसएलपी खारिज होने के बाद अब 70 हजार शिक्षकों के वरिष्ठता, वेतन और अन्य सेवा लाभ से जुड़ा मामला सरकार के आदेश पालन पर टिका है।

विज्ञापन
Salaries of 70,000 teachers may increase; they could receive arrears worth lakhs, as the High Court grants the
डीपीआई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 मध्य प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों की सेवा अवधि पहली नियुक्ति से जोड़ने के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने सरकार को समय दिया है। कोर्ट ने आदेश के पालन के लिए राज्य सरकार को चार सप्ताह की मोहलत दी है। पहली नियुक्ति से सेवा की गणना होने पर शिक्षकों को वरिष्ठता, वेतनवृद्धि, पेंशन और अन्य सेवा लाभ मिलने का रास्ता खुल सकता है। शिक्षक संगठनों का दावा है कि इससे कई शिक्षकों को करीब 10 साल के वेतन अंतर का एरियर मिल सकता है। कुछ मामलों में एरियर की राशि 7 से 8 लाख रुपये तक होने का अनुमान जताया गया है। वहीं, मासिक वेतन में करीब 15 से 20 हजार रुपये तक का अंतर आने का दावा भी किया जा रहा है। हालांकि अंतिम राशि सरकार की गणना और लागू नियमों के आधार पर तय होगी।
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट से सरकार की एसएलपी खारिज, अब अवमानना पर सुनवाई
हाईकोर्ट के शिक्षकों के पक्ष में आदेश के बाद राज्य सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सरकार की ओर से दायर एसएलपी को 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद शिक्षकों ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर आदेश का पालन कराने की मांग की। इसी मामले की सुनवाई जस्टिस दीपक खोट की एकल पीठ में हुई। सरकार की ओर से आदेश के पालन के लिए समय मांगा गया। कोर्ट ने सरकार को चार सप्ताह का समय दे दिया। मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।
विज्ञापन


2006 से छठे वेतनमान का लाभ देने की मांग
शिक्षकों का कहना है कि छठा वेतनमान 1 जनवरी 2006 से लागू हुआ था, लेकिन उन्हें इसका लाभ वर्ष 2016 से दिया गया। उनका तर्क है कि यदि पहली नियुक्ति से सेवा की गणना की जाती है तो वेतनमान का लाभ भी उसी आधार पर पहले से मिलना चाहिए। इसी आधार पर करीब 10 साल के वेतन अंतर का भुगतान करने की मांग की जा रही है। शिक्षक संगठनों के मुताबिक, बकाया राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज की मांग भी सामने आई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह भी पढ़ें-दाल ने बिगाड़ा रसोई का बजट: एक हफ्ते में तुवर 10 रुपए महंगी, चना-मूंग-उड़द-मसूर के भाव भी बढ़े, और बढ़ेगा दाम



497 शिक्षकों ने शुरू की थी कानूनी लड़ाई
मामले की कानूनी लड़ाई राजेश पांडेय समेत 497 शिक्षकों ने शुरू की थी। शिक्षकों का कहना था कि शिक्षा विभाग में संविलियन के दौरान वर्ष 2018 से पहले की उनकी शिक्षकीय सेवा को मान्यता नहीं दी गई। उन्होंने मांग की थी कि उनकी नौकरी की अवधि पहली नियुक्ति की तारीख से मानी जाए। इससे वरिष्ठता, वेतन, पेंशन और दूसरे सेवा लाभों की गणना भी उसी आधार पर करने का रास्ता साफ होगा।

यह भी पढ़ें-34 लाख मतदाताओं के नाम हटे: निर्वाचन आयोग घेरेगी कांग्रेस, पटवारी बोले- ज्ञानेश कुमार पर कार्रवाई तक आंदोलन


शिक्षक नेता बोले- अब आदेश लागू करे सरकार
शिक्षक नेता उपेंद्र कौशल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से सरकार की चुनौती खारिज होने के बाद अब हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया जाना चाहिए। शिक्षकों को उम्मीद है कि पहली नियुक्ति से सेवा जोड़ने के साथ उनके लंबित सेवा लाभ भी मिलेंगे।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed