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34 लाख मतदाताओं के नाम हटे: निर्वाचन आयोग घेरेगी कांग्रेस, पटवारी बोले- ज्ञानेश कुमार पर कार्रवाई तक आंदोलन
Thu, 24 Sep 2026 02:37 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Thu, 24 Sep 2026 02:37 PM IST
सार
कांग्रेस सोमवार को भोपाल में निर्वाचन सदन का घेराव करेगी। पार्टी ने अंतिम मतदाता सूची से हटाए गए 34.25 लाख नामों का विधानसभा, जिला और कारणवार ब्योरा मांगा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों और फॉर्म-6 में एसआईआर से जुड़े बदलाव को लेकर भी जवाब मांगा है।
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पीसीसी चीफ जीतू पटवारी की प्रेसवार्ता
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। प्रदेश कांग्रेस सोमवार को भोपाल स्थित निर्वाचन सदन का घेराव करेगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहेगा। कांग्रेस ने अंतिम मतदाता सूची से हटाए गए 34 लाख 25 हजार 78 नामों का विधानसभा, जिला और कारणवार ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग भी की है। पटवारी ने कहा कि निर्वाचन सदन के घेराव के बाद प्रदेश के सभी जिलों में जिला निर्वाचन अधिकारियों के कार्यालयों का घेराव किया जाएगा। उनका कहना है कि कलेक्टर ही जिला निर्वाचन अधिकारी होते हैं, इसलिए मतदाता सूची से जुड़े सवालों को लेकर जिला स्तर पर भी कांग्रेस आंदोलन करेगी। यह ऐलान चुनाव आयोग के भीतर दर्ज कथित आपत्तियों, एसआईआर और मध्य प्रदेश की मतदाता सूची में हुए बदलाव को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया गया। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस का सवाल किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि मतदाता सूची की पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकार से जुड़ा है।
14 लिखित आपत्तियों को लेकर आयोग से जवाब मांगा
पटवारी ने एक न्यूज पेपर की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट के मुताबिक इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटाने और बहाली, फॉर्म-6 तथा चुनावी सूचना प्रौद्योगिकी व्यवस्था से जुड़े मुद्दे शामिल थे। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस इन दस्तावेजों के आधार पर सवाल उठा रही है। उन्होंने मांग की कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने किन फैसलों पर आपत्ति जताई, उनकी आपत्तियों में क्या कहा गया और उन पर क्या कार्रवाई हुई, इसका ब्योरा सार्वजनिक किया जाए।
नए मतदाताओं के फॉर्म-6 में एसआईआर का जिक्र क्यों?
कांग्रेस ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में एसआईआर से जुड़े सवाल जोड़े जाने पर भी सवाल उठाए हैं। पेपर की रिपोर्ट के मुताबिक ऑनलाइन फॉर्म में आवेदक से उसके या माता-पिता के पिछले एसआईआर की मतदाता सूची में दर्ज होने से संबंधित जानकारी मांगी गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दो चुनाव आयुक्तों ने नियमों में बदलाव के बिना इस तरह का परिवर्तन किए जाने पर आपत्ति दर्ज की थी। पटवारी ने पूछा कि अगर फॉर्म में बदलाव को लेकर आयोग के भीतर आपत्ति थी तो इसे किस प्रक्रिया और कानूनी प्रावधान के तहत लागू किया गया।
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ड्राफ्ट में 42.74 लाख नाम बाहर, अंतिम सूची में 34.25 लाख हटे
पटवारी के मुताबिक एसआईआर से पहले मध्य प्रदेश में 5 करोड़ 74 लाख 6 हजार 143 मतदाता दर्ज थे। प्रक्रिया के दौरान 5 करोड़ 31 लाख 31 हजार 983 गणना प्रपत्र प्राप्त हुए और उनका डिजिटलीकरण किया गया।लदिसंबर 2025 में जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में 42 लाख 74 हजार 160 नाम बाहर हुए थे। इनमें करीब 31.51 लाख नाम स्थानांतरित या अनुपस्थित, 8.46 लाख मृत और 2.77 लाख एक से अधिक स्थान पर पंजीकृत बताए गए थे। पटवारी ने कहा कि यह अंतिम रूप से हटाए गए नामों की संख्या नहीं थी। दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद आंकड़े में बदलाव हुआ। 21 फरवरी 2026 को जारी अंतिम मतदाता सूची में मध्य प्रदेश में 5 करोड़ 39 लाख 81 हजार 65 मतदाता दर्ज हुए। कांग्रेस के मुताबिक अंतिम प्रक्रिया में कुल 34 लाख 25 हजार 78 नाम हटे, जबकि ड्राफ्ट सूची के बाद 8 लाख 49 हजार 82 मतदाताओं की शुद्ध वृद्धि हुई।
7.17 लाख ने नाम जुड़वाने के लिए किया आवेदन
कांग्रेस ने दावा किया कि दावे-आपत्तियों के दौरान करीब 7.17 लाख लोगों ने नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया, जबकि लगभग 83 हजार नाम हटाने से संबंधित आपत्तियां मिलीं। पटवारी ने सवाल उठाया कि नाम जोड़ने के लिए आए आवेदनों में कितने स्वीकार किए गए और कितने खारिज हुए। उन्होंने यह भी पूछा कि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से हटने पर इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।
कांग्रेस ने रखीं ये प्रमुख मांगें
कांग्रेस ने अंतिम मतदाता सूची से हटाए गए 34.25 लाख नामों का विधानसभा, जिला और कारणवार विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है। इसके साथ ही ड्राफ्ट सूची में बाहर हुए 42.74 लाख नामों में से कितने दावे-आपत्तियों के बाद वापस जुड़े, इसका पूरा आंकड़ा जारी करने को कहा है। पार्टी ने नाम बहाली के आवेदनों की स्वीकृति-अस्वीकृति का कारणवार ब्योरा, मतदाता सूची के डिजिटल ढांचे में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और बूथ लेवल अधिकारी की भूमिका तथा डिजिटल रिकॉर्ड का ऑडिट ट्रेल सार्वजनिक करने की मांग भी की है।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और कार्रवाई की मांग
पटवारी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर कांग्रेस आंदोलन जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि तीन दिन बाद कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक होगी, जिसमें देशभर में आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी। रिपोर्ट में आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से 10 महीनों में कम से कम 14 आपत्तियां दर्ज किए जाने का उल्लेख है। आयोग ने इन नोट्स के अस्तित्व और तारीखों पर विवाद नहीं किया है, लेकिन उन्हें सुझाव बताया और कहा कि पिछले एक साल के फैसले सर्वसम्मति से हुए।
नियुक्ति प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
पटवारी ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चयन प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की जगह केंद्रीय गृहमंत्री को शामिल किया गया। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से इस व्यवस्था का विरोध करती रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की नियुक्ति और उसके कामकाज में पारदर्शिता लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
यह भी पढ़ें-मध्य प्रदेश में फिर बदला मौसम: दो दिन भारी बारिश का अलर्ट, मानसून की विदाई में 6 दिन बाकी
दूसरे राज्यों के चुनाव और अमेरिका का भी जिक्र
पटवारी ने एसआईआर के बाद विभिन्न राज्यों की चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पश्चिम बंगाल, बिहार और मध्य प्रदेश में चुनाव प्रक्रिया पर दोबारा विचार की मांग की और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत की चुनाव व्यवस्था की तारीफ किए जाने का भी जिक्र किया। उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भी केंद्र सरकार पर राजनीतिक आरोप लगाए। ये पटवारी के राजनीतिक आरोप हैं, जिन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। पटवारी ने कहा कि मतदाता सूची में दर्ज हर नाम केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि नागरिक के मतदान के अधिकार से जुड़ा है। कांग्रेस की मांग है कि नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने की पूरी प्रक्रिया का डेटा सार्वजनिक हो और मतदाता सूची तैयार करने की व्यवस्था पारदर्शी हो।
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14 लिखित आपत्तियों को लेकर आयोग से जवाब मांगा
पटवारी ने एक न्यूज पेपर की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट के मुताबिक इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटाने और बहाली, फॉर्म-6 तथा चुनावी सूचना प्रौद्योगिकी व्यवस्था से जुड़े मुद्दे शामिल थे। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस इन दस्तावेजों के आधार पर सवाल उठा रही है। उन्होंने मांग की कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने किन फैसलों पर आपत्ति जताई, उनकी आपत्तियों में क्या कहा गया और उन पर क्या कार्रवाई हुई, इसका ब्योरा सार्वजनिक किया जाए।
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नए मतदाताओं के फॉर्म-6 में एसआईआर का जिक्र क्यों?
कांग्रेस ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में एसआईआर से जुड़े सवाल जोड़े जाने पर भी सवाल उठाए हैं। पेपर की रिपोर्ट के मुताबिक ऑनलाइन फॉर्म में आवेदक से उसके या माता-पिता के पिछले एसआईआर की मतदाता सूची में दर्ज होने से संबंधित जानकारी मांगी गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दो चुनाव आयुक्तों ने नियमों में बदलाव के बिना इस तरह का परिवर्तन किए जाने पर आपत्ति दर्ज की थी। पटवारी ने पूछा कि अगर फॉर्म में बदलाव को लेकर आयोग के भीतर आपत्ति थी तो इसे किस प्रक्रिया और कानूनी प्रावधान के तहत लागू किया गया।
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ड्राफ्ट में 42.74 लाख नाम बाहर, अंतिम सूची में 34.25 लाख हटे
पटवारी के मुताबिक एसआईआर से पहले मध्य प्रदेश में 5 करोड़ 74 लाख 6 हजार 143 मतदाता दर्ज थे। प्रक्रिया के दौरान 5 करोड़ 31 लाख 31 हजार 983 गणना प्रपत्र प्राप्त हुए और उनका डिजिटलीकरण किया गया।लदिसंबर 2025 में जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में 42 लाख 74 हजार 160 नाम बाहर हुए थे। इनमें करीब 31.51 लाख नाम स्थानांतरित या अनुपस्थित, 8.46 लाख मृत और 2.77 लाख एक से अधिक स्थान पर पंजीकृत बताए गए थे। पटवारी ने कहा कि यह अंतिम रूप से हटाए गए नामों की संख्या नहीं थी। दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद आंकड़े में बदलाव हुआ। 21 फरवरी 2026 को जारी अंतिम मतदाता सूची में मध्य प्रदेश में 5 करोड़ 39 लाख 81 हजार 65 मतदाता दर्ज हुए। कांग्रेस के मुताबिक अंतिम प्रक्रिया में कुल 34 लाख 25 हजार 78 नाम हटे, जबकि ड्राफ्ट सूची के बाद 8 लाख 49 हजार 82 मतदाताओं की शुद्ध वृद्धि हुई।
7.17 लाख ने नाम जुड़वाने के लिए किया आवेदन
कांग्रेस ने दावा किया कि दावे-आपत्तियों के दौरान करीब 7.17 लाख लोगों ने नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया, जबकि लगभग 83 हजार नाम हटाने से संबंधित आपत्तियां मिलीं। पटवारी ने सवाल उठाया कि नाम जोड़ने के लिए आए आवेदनों में कितने स्वीकार किए गए और कितने खारिज हुए। उन्होंने यह भी पूछा कि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से हटने पर इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।
कांग्रेस ने रखीं ये प्रमुख मांगें
कांग्रेस ने अंतिम मतदाता सूची से हटाए गए 34.25 लाख नामों का विधानसभा, जिला और कारणवार विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है। इसके साथ ही ड्राफ्ट सूची में बाहर हुए 42.74 लाख नामों में से कितने दावे-आपत्तियों के बाद वापस जुड़े, इसका पूरा आंकड़ा जारी करने को कहा है। पार्टी ने नाम बहाली के आवेदनों की स्वीकृति-अस्वीकृति का कारणवार ब्योरा, मतदाता सूची के डिजिटल ढांचे में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और बूथ लेवल अधिकारी की भूमिका तथा डिजिटल रिकॉर्ड का ऑडिट ट्रेल सार्वजनिक करने की मांग भी की है।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और कार्रवाई की मांग
पटवारी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर कांग्रेस आंदोलन जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि तीन दिन बाद कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक होगी, जिसमें देशभर में आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी। रिपोर्ट में आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से 10 महीनों में कम से कम 14 आपत्तियां दर्ज किए जाने का उल्लेख है। आयोग ने इन नोट्स के अस्तित्व और तारीखों पर विवाद नहीं किया है, लेकिन उन्हें सुझाव बताया और कहा कि पिछले एक साल के फैसले सर्वसम्मति से हुए।
नियुक्ति प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
पटवारी ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चयन प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की जगह केंद्रीय गृहमंत्री को शामिल किया गया। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से इस व्यवस्था का विरोध करती रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की नियुक्ति और उसके कामकाज में पारदर्शिता लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
यह भी पढ़ें-मध्य प्रदेश में फिर बदला मौसम: दो दिन भारी बारिश का अलर्ट, मानसून की विदाई में 6 दिन बाकी
दूसरे राज्यों के चुनाव और अमेरिका का भी जिक्र
पटवारी ने एसआईआर के बाद विभिन्न राज्यों की चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पश्चिम बंगाल, बिहार और मध्य प्रदेश में चुनाव प्रक्रिया पर दोबारा विचार की मांग की और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत की चुनाव व्यवस्था की तारीफ किए जाने का भी जिक्र किया। उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भी केंद्र सरकार पर राजनीतिक आरोप लगाए। ये पटवारी के राजनीतिक आरोप हैं, जिन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। पटवारी ने कहा कि मतदाता सूची में दर्ज हर नाम केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि नागरिक के मतदान के अधिकार से जुड़ा है। कांग्रेस की मांग है कि नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने की पूरी प्रक्रिया का डेटा सार्वजनिक हो और मतदाता सूची तैयार करने की व्यवस्था पारदर्शी हो।
