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मध्यप्रदेश: एक बस, चार राज्यों के कागज और छह राज्यों का नेटवर्क; यमुना हादसे का एमपी से जुड़ा लिंक सामने आया

Thu, 24 Sep 2026 04:23 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Thu, 24 Sep 2026 04:23 PM IST
सार

यमुना एक्सप्रेसवे बस हादसे के बाद बस के दस्तावेज और ऑपरेटर के नेटवर्क को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। दुर्घटनाग्रस्त बस का ऑपरेटर छतरपुर से जुड़ा बताया जा रहा है, जबकि उसके कागज चार अलग-अलग राज्यों से जारी हुए हैं।

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MP: One Bus, Documents From Four States and a Six-State Network; Yamuna Crash Link to MP Emerges
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

विस्तार

यमुना एक्सप्रेसवे पर गुरुवार को यात्री बस में आग लगने और यात्रियों की मौत के बाद बसों के अंतरराज्यीय संचालन और उनके दस्तावेजों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हादसे से जुड़ी जानकारी में सामने आया है कि दुर्घटनाग्रस्त बस का ऑपरेटर मध्यप्रदेश के छतरपुर से है, जबकि बस के अलग-अलग दस्तावेज दूसरे राज्यों से जारी हुए हैं। जानकारी के अनुसार, बस का पंजीकरण बिहार में हुआ था। इसका फिटनेस प्रमाणपत्र राजस्थान से और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र हरियाणा से जारी हुआ था। वहीं बस संचालित करने वाली एजेंसी राज कल्पना ट्रैवल्स का कार्यालय छतरपुर में बताया गया है। बस दिल्ली से महोबा के बीच चल रही थी। इस तरह बस के संचालन से जुड़े दस्तावेज और गतिविधियां कम से कम छह राज्यों मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली से जुड़ती हैं।
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एक बस के कागज अलग-अलग राज्यों में
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब किसी बस का रजिस्ट्रेशन एक राज्य, फिटनेस दूसरे राज्य और प्रदूषण प्रमाणपत्र तीसरे राज्य से हो, जबकि उसका ऑपरेटर और वास्तविक कारोबार किसी अन्य राज्य से जुड़ा हो, तो उसकी पूरी जांच और निगरानी कौन करेगा। परिवहन विभागों की कार्रवाई आम तौर पर उनके अपने क्षेत्राधिकार से जुड़ी होती है। ऐसे में अंतरराज्यीय रूट पर चलने वाली बसों के मामले में अलग-अलग राज्यों के दस्तावेजों की एक साथ जांच करना चुनौती बन सकता है।
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छतरपुर से दूसरे राज्यों तक फैला नेटवर्क
जानकारी के अनुसार, मध्यप्रदेश के छतरपुर को इस नेटवर्क की अहम कड़ी बताया गया है। दावा है कि यहां से जुड़े कुछ बस संचालक दूसरे राज्यों में भी यात्री बसों का संचालन कर रहे हैं। जुलाई 2026 तक छतरपुर क्षेत्र में ओवरलोड बसों के मामले भी सामने आए हैं। यहीं नहीं बताया जा रहा है कि दूसरे राज्यों में पंजीकृत बसें मध्यप्रदेश से जुड़े रूटों पर चल रही हैं। हालांकि इन सभी मामलों में अलग-अलग बसों के परमिट, फिटनेस और अन्य दस्तावेजों की आधिकारिक जांच जरूरी है। 

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पहले से 19 चालान पेंडिंग, फिर भी सड़क पर दौड़ रही थी बस
हादसे में शामिल बस के खिलाफ पहले से ही 19 चालान लंबित बताए जा रहे हैं। इन चालानों की कुल बकाया राशि करीब 1.75 लाख रुपये बताई गई है। जानकारी के अनुसार, बस पर अलग-अलग समय में नियमों के उल्लंघन के मामले दर्ज हुए थे। इसके बावजूद बकाया चालानों के भुगतान या बस को सड़क से हटाने की व्यवस्था प्रभावी तरीके से काम नहीं कर पाई।  जनवरी 2026 में नाबालिग चालक से बस चलवाने का मामला भी दर्ज बताया गया है। इसके अलावा जून 2025 में फ्यूल चेंज और रेट्रोफिटिंग से जुड़े नियमों के उल्लंघन, 19 अगस्त को बिना परमिट बस चलाने पर 15 हजार रुपये का चालान और 7 अप्रैल को एक्सप्रेसवे पर ओवरस्पीड, बिना लाइसेंस और बिना यूनिफॉर्म से जुड़े उल्लंघन का उल्लेख है। इन मामलों में 6,900 रुपये का चालान दर्ज बताया गया है। अन्य तारीखों पर भी 12 हजार, 10,500 और 10 हजार रुपये समेत अलग-अलग राशि के चालान होने की जानकारी सामने आई है। परमिट से जुड़े उल्लंघन भी रिकॉर्ड में बताए गए हैं।

पहले भी उठे सवाल
जुलाई 2026 के दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे हादसे और अगस्त में लखनऊ-इंदौर रूट पर हुई बस दुर्घटना में भी इसी तरह के मामले सामने आए थे। अगस्त की दुर्घटना में चार लोगों की मौत होने और बस नागालैंड में पंजीकृत थी। इसी तरह सितंबर में सागर में एक ही नंबर की दो बसें पकड़ी गई थी। यह अंतरराज्यीय बसों की निगरानी और दस्तावेज सत्यापन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। 

त्योहारों से पहले निगरानी की जरूरत
त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है। ऐसे में अंतरराज्यीय रूट पर चलने वाली यात्री बसों के परमिट, फिटनेस, प्रदूषण प्रमाणपत्र, बीमा और सुरक्षा मानकों की संयुक्त जांच की जरूरत है। यमुना एक्सप्रेसवे हादसे ने यह सवाल फिर सामने ला दिया है कि जब एक बस के दस्तावेज कई राज्यों से जुड़े हों और उसका संचालन भी कई राज्यों की सीमाओं से होकर हो, तो यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी तय करने और नियमों का पालन कराने के लिए राज्यों के बीच कितना प्रभावी समन्वय है।

 
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