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Plastic surgery day: प्लास्टिक सर्जरी केवल सौंदर्य बढ़ाने तक ही सीमित नहीं, गंभीर बीमारियों में भी आशा की किरण
Tue, 15 Jul 2025 07:14 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Tue, 15 Jul 2025 07:14 PM IST
सार
गांधी चिकित्सा महाविद्यालय के बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग में 15 जुलाई को विश्व प्लास्टिक सर्जरी दिवस के रूप में मंगलवार को मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डीन डॉ. कविता एन सिंह द्वारा किया गया।
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जीएमसी भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्लास्टिक सर्जरी न केवल सौंदर्य वृद्धि तक सीमित है बल्कि यह उन मरीजों के लिए आशा की किरण है जो गंभीर चोटों जलने या कैंसर जैसी स्थितियों से जूझ रहे हैं। यह बात राजधानी भोपाल स्थित गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में मंगलवार को प्लास्टिक सर्जरी दिवस के अवसर पर आयोजित प्लास्टिक सर्जरी जागरूकता कार्यक्रम में जीएमसी के डीन डॉ. कविता एन सिंह ने कही। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन में प्लास्टिक सर्जरी की भूमिका को लेकर जागरूकता फैलाना था। यह कार्यक्रम बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग द्वारा आयोजित किया गया। इस अवसर की मुख्य अतिथि रहीं डॉ. कविता एन. सिंह डीन ने विभाग के प्रयासों की सराहना की और इसे मरीजों के प्रति समर्पण का प्रतीक बताया।
जन्मजात विकृतियों में प्लास्टिक सर्जरी कारगर
कार्यक्रम के संयोजक अध्यक्ष डॉ. अरुण भटनागर विभागाध्यक्ष बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी जिन्होंने प्लास्टिक सर्जरी के विभिन्न पहलुओं जैसे कि माइक्रो सर्जरी जन्मजात विकृतियों का सुधार कैंसर के बाद पुनर्निर्माण और हाथ की सर्जरी पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान फैकल्टी रेजिडेंट डॉक्टर और छात्रों ने जागरूकता सत्र लाइव सर्जरी केस डिस्कशन और मरीजों की सफलता की कहानियों को साझा किया। पोस्टर विजुअल डिस्प्ले और इंटरएक्टिव सत्रों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि प्लास्टिक सर्जरी केवल सौंदर्य से संबंधित नहीं है बल्कि यह जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कार्यक्रम का समापन एक प्रश्नोत्तर सत्र और यह संकल्प के साथ हुआ कि प्लास्टिक सर्जरी के क्षेत्र में नवाचार शिक्षा और सहानुभूति के साथ कार्य करते रहेंगे।
अलग हुए हिस्सों को जोड़ने की भी सर्जरी
डॉ. आनंद गौतम और डॉ. हरिशंकर ने भी प्लास्टिक सर्जरी को लेकर जानकारी दी। डॉ. आनंद गौतम ने बताया, हमारे यहां कटे हुए हाथ से लेकर शरीर से अलग हुए हिस्सों को जोड़ने की भी सर्जरी हो रही है। यह सर्जरी प्रदेश के सरकारी अस्पताल में सिर्फ हमीदिया अस्पताल में उपलब्ध है। उन्होने बताया कि बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग में कैंसर सर्जरी में जो मास, हड्डी, चमड़ी को निकाल दिया जाता है। उसकी जगह में दोबारा मांस, चमड़ी और हड्डी का काम भी किया जाता है।
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यह भी पढ़ें-रेलवे आरक्षण चार्टिंग प्रक्रिया में परिवर्तन,अब 4 की जगह 8 घंटे पहले तैयार होगा पहला चार्ट, आज से लागू
कॉस्मेटिक सर्जरी भी उपलब्ध
डॉ. हरिशंकर ने बताया किबताया, चोट के दौरान चेहरे व जबड़े की हड्डियां टूटती हैं, उनको जोड़ने के लिए प्लेट और स्क्रू भी विभाग में लगाए जाते हैं। इसके अलावा, यहां कॉस्मेटिक सर्जरी में ब्रेस्ट इंप्लांट लगाने का काम व कैंसर के बाद ब्रेस्ट निकालने के बाद नया ब्रेस्ट बनाने का काम भी प्लास्टिक सर्जरी विभाग में किया जाता है।
यह भी पढ़ें-कांग्रेस के जिला अध्यक्षों की अगस्त में होगी घोषणा,ऑब्जर्वर की रिपोर्ट पेश,होगा थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन
हर साल एक हजार से ज्यादा हो रही प्लास्टिक सर्जरी
डॉ. अरुण भटनागर ने कहा कि प्लास्टिक सर्जरी को लेकर हमीदिया लगातार नए-नए प्रयोग कर रहे हैं यहां पर हर साल लगभग 1000 से ज्यादा प्लास्टिक सर्जरी की जा रही है। लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए भी हम तरह-तरह की प्रयोग कर रहे हैं। डॉ भटनागर ने कहा है कि लोगों में प्लास्टिक सर्जरी के लेकर अभी भी भ्रांति है। उन्होंने कहा कि गांधी मेडिकल कॉलेज का बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग समाज में जागरूकता फैलाने और मरीजों को बेहतर जीवन देने के अपने संकल्प के साथ इस प्लास्टिक सर्जरी डे को एक सफल और प्रेरणादायक आयोजन बनाने में सफल रहा।
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जन्मजात विकृतियों में प्लास्टिक सर्जरी कारगर
कार्यक्रम के संयोजक अध्यक्ष डॉ. अरुण भटनागर विभागाध्यक्ष बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी जिन्होंने प्लास्टिक सर्जरी के विभिन्न पहलुओं जैसे कि माइक्रो सर्जरी जन्मजात विकृतियों का सुधार कैंसर के बाद पुनर्निर्माण और हाथ की सर्जरी पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान फैकल्टी रेजिडेंट डॉक्टर और छात्रों ने जागरूकता सत्र लाइव सर्जरी केस डिस्कशन और मरीजों की सफलता की कहानियों को साझा किया। पोस्टर विजुअल डिस्प्ले और इंटरएक्टिव सत्रों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि प्लास्टिक सर्जरी केवल सौंदर्य से संबंधित नहीं है बल्कि यह जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कार्यक्रम का समापन एक प्रश्नोत्तर सत्र और यह संकल्प के साथ हुआ कि प्लास्टिक सर्जरी के क्षेत्र में नवाचार शिक्षा और सहानुभूति के साथ कार्य करते रहेंगे।
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अलग हुए हिस्सों को जोड़ने की भी सर्जरी
डॉ. आनंद गौतम और डॉ. हरिशंकर ने भी प्लास्टिक सर्जरी को लेकर जानकारी दी। डॉ. आनंद गौतम ने बताया, हमारे यहां कटे हुए हाथ से लेकर शरीर से अलग हुए हिस्सों को जोड़ने की भी सर्जरी हो रही है। यह सर्जरी प्रदेश के सरकारी अस्पताल में सिर्फ हमीदिया अस्पताल में उपलब्ध है। उन्होने बताया कि बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग में कैंसर सर्जरी में जो मास, हड्डी, चमड़ी को निकाल दिया जाता है। उसकी जगह में दोबारा मांस, चमड़ी और हड्डी का काम भी किया जाता है।
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कॉस्मेटिक सर्जरी भी उपलब्ध
डॉ. हरिशंकर ने बताया किबताया, चोट के दौरान चेहरे व जबड़े की हड्डियां टूटती हैं, उनको जोड़ने के लिए प्लेट और स्क्रू भी विभाग में लगाए जाते हैं। इसके अलावा, यहां कॉस्मेटिक सर्जरी में ब्रेस्ट इंप्लांट लगाने का काम व कैंसर के बाद ब्रेस्ट निकालने के बाद नया ब्रेस्ट बनाने का काम भी प्लास्टिक सर्जरी विभाग में किया जाता है।
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हर साल एक हजार से ज्यादा हो रही प्लास्टिक सर्जरी
डॉ. अरुण भटनागर ने कहा कि प्लास्टिक सर्जरी को लेकर हमीदिया लगातार नए-नए प्रयोग कर रहे हैं यहां पर हर साल लगभग 1000 से ज्यादा प्लास्टिक सर्जरी की जा रही है। लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए भी हम तरह-तरह की प्रयोग कर रहे हैं। डॉ भटनागर ने कहा है कि लोगों में प्लास्टिक सर्जरी के लेकर अभी भी भ्रांति है। उन्होंने कहा कि गांधी मेडिकल कॉलेज का बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग समाज में जागरूकता फैलाने और मरीजों को बेहतर जीवन देने के अपने संकल्प के साथ इस प्लास्टिक सर्जरी डे को एक सफल और प्रेरणादायक आयोजन बनाने में सफल रहा।
