भोपाल: कोरोना से गई माता-पिता की जान, अब मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए बेटा परेशान, कैसे मिलेगा सरकारी योजना का लाभ?
भोपाल के रहने वाले कक्षा 10 के छात्र के माता-पिता की मृत्यु कोरोना के कारण हो गई लेकिन उसकी मां का मृत्यु प्रमाणपत्र सिवनी अस्पताल से मिल नहीं रहा और भोपाल नगर निगम ने उसके पिता के प्रमाण पत्र में मृत्यु का कारण कोरोना नहीं लिखा। इस कारण भविष्य में उसे परेशानी हो सकती है।
विस्तार
केंद्र व विभिन्न राज्य सरकारें कोरोना से मरने वालों के परिजनों के लिए कई योजनाएं ला रही हैं, लेकिन इन योजनाओं का लाभ लेने से कुछ लोग वंचित रह सकते हैं। दरअसल, कोरोना से मरने वालों के मृत्यु प्रमाणपत्र में स्थानीय निकायों की तरफ से मौत का कारण कोविड-19 नहीं लिखा जा रहा है। ऐसी सूरत में लोग भविष्य में यह बताने में असमर्थ हो जाएंगे कि उनके परिजन की मौत कोविड-19 के कारण हुई थी। ऐसे लोगों को सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने में दिक्कत आ सकती है। इसी तरह की समस्या से मध्यप्रदेश के भोपाल में रहने वाला दसवीं का छात्र हनुशीष डहरिया भी गुजर रहा है। कोरोना के कारण जान गंवाने वाले उसके माता-पिता के मृत्यु प्रमाणपत्र में मौत की वजह कोविड-19 नहीं लिखा गया है।
पहले हुई पिता की मौत फिर मां की भी गई जान
बता दें, माता-पिता की मौत के बाद हनुशीष अब भोपाल के त्रिलंगा इलाके में अपने चाचा के पास रहता है। वह दसवीं कक्षा का छात्र है। बीते कुछ दिन उसकी जिंदगी के सबसे काले दिन थे क्योंकि पहले उसके पिता गिरीश डहरिया सिवनी में कोरोना का शिकार हो गए। इलाज के लिए उन्हें भोपाल लाया गया, लेकिन वे बच न सके। 18 अप्रैल को उनकी मौत हो गई। इस बीच में हनुशीष की मां दिव्या भी कोरोना संक्रमित हो गईं और उनका उपचार सिवनी के सरकारी अस्पताल में हुआ। हालांकि, उनकी भी 19 अप्रैल को मौत हो गई।
प्रमाणपत्र में मृत्यु का कारण कोरोना नहीं लिखा
माता-पिता को खोने वाले हनुशीष की समस्या और तब बढ़ गई जब भोपाल नगर निगम ने उसके पिता के प्रमाणपत्र में मृत्यु का कारण कोरोना नहीं लिखा। वहीं, सिवनी अस्पताल से हनुशीष की मां का मृत्यु प्रमाणपत्र मिला ही नहीं। हनुशीष का कहना है कि उसे यह मदद नहीं मिली तो भविष्य में उसे कई तरह की समस्याओं से दो-चार होना पड़ेगा। गौरतलब है कि केंद्र और राज्य सरकार ने अनाथ बच्चों के कल्याण के लिए जो योजना चलाई हैं, उनका फायदा उसे मिल सकता है लेकिन उसके लिए मां-बाप के मृत्यु प्रमाणपत्र में कोरोना से मृत्यु लिखा होना जरूरी है वरना वो निराश्रित ही रह जाएगा।
मध्यप्रदेश सरकार की योजना
इधर, मध्यप्रदेश सरकार ने कोरोना से अनाथ हुए बच्चों के लिए मुख्यमंत्री कोविड बाल सेवा योजना लागू की है, जिसके पहले चरण में रविवार को 130 परिवारों के 173 बच्चों के खातों में पांच हजार रुपये डाले गए। यह सहायता इन बच्चों को हर महीने मिलेगी। इनकी पढ़ाई लिखाई का खर्चा भी सरकार उठाएगी। इसके अलावा कोरोना से मरने वालों के परिजन को एक लाख रुपये भी राज्य सरकार देगी, लेकिन प्रमाणपत्र पर मौत का कारण कोरोना नहीं लिखा होगा तो यह फायदा मिलना मुश्किल होगा। हालांकि, कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि सरकार कुछ दिनों में ऐसी योजना लाने पर काम कर रही है, जिसमें ऐसे किसी प्रमाणपत्र की जरूरत रह नहीं जाएगी इसलिए अनाथ बच्चे और लोग किसी प्रमाणपत्र की चिंता ना करें।
