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यूसीसी के खिलाफ मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक: 17 को जंतर-मंतर पहुंचने की अपील,कानूनी लड़ाई के लिए टीम तैयार

Mon, 14 Sep 2026 05:31 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Mon, 14 Sep 2026 05:31 PM IST
सार

भोपाल में यूसीसी के विरोध में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक में आंदोलन के साथ कानूनी लड़ाई की रणनीति पर चर्चा हुई। 17 सितंबर को जंतर-मंतर के कार्यक्रम में मध्यप्रदेश से लोगों के शामिल होने की अपील की गई। बोर्ड ने कानूनी टीम और याचिका के मसौदे की तैयारी की जानकारी देते हुए अलग-अलग याचिकाओं के बजाय एकजुट कानूनी लड़ाई की बात कही।

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Muslim Personal Law Board meeting against UCC: Appeal to gather at Jantar Mantar on the 17th; team ready for l
बैठक के बाद प्रेसवार्ता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी यूसीसी के विरोध को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सोमवार को भोपाल के खानूगांव कैंपस में बैठक की। बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में शहर काजी मुश्ताक अली नदवी और बोर्ड के रुक्न-ए-आमला व कांग्रेस नेता आरिफ मसूद ने यूसीसी को लेकर मुस्लिम समाज का पक्ष रखा। बैठक में आंदोलन के साथ-साथ कानूनी लड़ाई की रणनीति पर भी चर्चा हुई। शहर काजी मुश्ताक अली नदवी ने कहा कि संविधान धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की गारंटी देता है। ऐसे में यूसीसी की जरूरत और उसके संभावित असर पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज यूसीसी को स्वीकार नहीं करता और इस मुद्दे पर पहले भी अपनी बात रखता आया है।
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17 सितंबर को दिल्ली में जुटने की अपील
बैठक के बाद अब 17 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले कार्यक्रम को लेकर मध्यप्रदेश से लोगों के शामिल होने की अपील की गई है। आरिफ मसूद ने बताया कि मध्यप्रदेश से बोर्ड से जुड़े पांच सदस्यों ने बैठक में चर्चा की है। बोर्ड की अनुमति के बाद प्रदेश के लोगों से दिल्ली के कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की जा रही है। शहर काजी ने मुस्लिम समाज के साथ सेक्युलर नागरिकों से भी कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि बोर्ड की ओर से आगे जो निर्देश दिए जाएंगे, उनके अनुसार आंदोलन को समर्थन दिया जाएगा।
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यूसीसी के खिलाफ कानूनी टीम भी तैयार
आरिफ मसूद ने कहा कि यूसीसी के खिलाफ कानूनी लड़ाई के लिए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की लीगल टीम तैयार है। मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों में भी वकील अपने स्तर पर तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बोर्ड की ओर से पिटीशन का मसौदा भी तैयार है। उन्होंने लोगों से अपील की कि जल्दबाजी में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल न करें। कानूनी लड़ाई को एकजुट तरीके से आगे बढ़ाने के लिए विशेषज्ञ वकीलों से चर्चा की जाए। उन्होंने कहा कि यूसीसी को संवैधानिक मान्यता मिलती भी है तो बोर्ड कानूनी लड़ाई जारी रखेगा।
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संविधान के अधिकारों के आधार पर लड़ाई की बात
आरिफ मसूद ने कहा कि यूसीसी को लेकर लड़ाई संविधान में दिए गए प्रावधानों और अधिकारों के आधार पर लड़ी जाएगी। उनका कहना था कि बोर्ड इस मामले को केवल राजनीतिक मुद्दे के तौर पर नहीं, बल्कि संवैधानिक और कानूनी विषय के रूप में देख रहा है। उन्होंने न्यायपालिका से राहत की उम्मीद जताते हुए कहा कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में मामले को मजबूती से रखा जाएगा।
शहर काजी ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी के खिलाफ दुश्मनी पैदा करना नहीं है। वे चाहते हैं कि देश में सभी लोग अमन और चैन के साथ रहें। उन्होंने सरकार और जिम्मेदार लोगों से यूसीसी के मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
गोलवलकर के बयान का दिया हवाला
शहर काजी ने आरएसएस के पूर्व सरसंघचालक एमएस गोलवलकर के 1972 में दिल्ली में दीनदयाल रिसर्च इंस्टीट्यूट के कार्यक्रम में दिए भाषण का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि गोलवलकर ने भी कहा था कि कौमी इत्तेहाद के लिए सिविल कोड जरूरी नहीं है। शहर काजी ने कहा कि इस भाषण का उल्लेख उस समय की मीडिया रिपोर्टों में भी हुआ था। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े विषयों पर मुस्लिम समाज और उसके जानकारों की बात भी सुनी जानी चाहिए। उनका कहना था कि पर्सनल लॉ को समझने के लिए उसे पढ़ना और उस पर अमल करना जरूरी है।


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महिलाओं के अधिकारों पर भी रखी बात
यूसीसी में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को लेकर होने वाली बहस पर शहर काजी ने कहा कि इस्लाम में महिलाओं को पहले से ही अधिकार और सम्मान दिया गया है। उन्होंने मां, बेटी, पत्नी और संपत्ति में हिस्सेदारी के अधिकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकारों के मामले में मुस्लिम समाज किसी से पीछे नहीं है।
 
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