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जाते-जाते कैलाश विजयवर्गीय और अमित शाह में क्या हुई बात? हालिया विवादों के बीच मुलाकात ने बढ़ाई सियासी चर्चा
Sun, 04 Oct 2026 03:52 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Sun, 04 Oct 2026 03:52 PM IST
सार
मध्य प्रदेश भाजपा में कैलाश विजयवर्गीय और सीएम मोहन यादव के बीच कथित मतभेद की चर्चाओं के बीच अमित शाह से उनकी मुलाकात ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। भोपाल एयरपोर्ट पर अमित शाह से जाते-जाते हुई बातचीत को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि दोनों नेताओं के बीच आखिर क्या चर्चा हुई?
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अमित शाह और कैलाश विजयवर्गीय
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्रदेश भाजपा में पिछले कुछ समय से अंदरूनी खींचतान और नेताओं के बीच मतभेद की चर्चाएं लगातार सामने आती रही हैं। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ताजा मध्य प्रदेश दौरे के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की उनसे हुई मुलाकात ने इन चर्चाओं को फिर हवा दे दी है। अमित शाह के भोपाल एयरपोर्ट से रवाना होते समय कैलाश विजयवर्गीय उनसे अकेले में मिले। दोनों के बीच कुछ देर बातचीत हुई। इस मुलाकात में क्या चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
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मुख्यमंत्री के साथ अनबन की चर्चाएं
प्रदेश में राजनीतिक मतभेद की सबसे ज्यादा चर्चा मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बीच को लेकर होती रही है। हालांकि, दोनों नेताओं की ओर से किसी विवाद की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की गई है। मंत्री विजयवर्गीय और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बीच मतभेद की चर्चाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। इनमें इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल से हुई मौतों के मामले में अधिकारियों द्वारा उनकी बात नहीं सुनने से लेकर कथित 'लेटर बम' तक चर्चित रहे। दरअसल, कथित तौर पर एक पत्र कैलाश विजयवर्गीय की ओर से मुख्यमंत्री को लिखे जाने की बात सामने आई थी। इसमें बीते ढाई साल में उनकी उपेक्षा और असहयोग मिलने की बात का दावा किया गया था। हालांकि, पत्र वायरल होने के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने इसे लिखने से इनकार करते हुए खंडन किया था। इसके बाद से दोनों नेताओं के बीच सबकुछ ठीक नहीं चलने को लेकर कयास लगाए जाने लगे। हालांकि, सरकार और संगठन की ओर से सार्वजनिक तौर पर इस तरह के किसी विवाद की बात सामने नहीं आई। इसके बावजूद कुछ राजनीतिक घटनाक्रमों को दोनों नेताओं के बीच खींचतान से जोड़कर देखा जाता रहा है।
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इंदौर में नितिन नवीन के सामने मंच से तंज
हाल ही में इंदौर में स्वामित्व अधिकार योजना के रजिस्ट्री कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी में अपने बयान में कार्यक्रम की रूपरेखा का पूरा श्रेय प्रदेश भाजपा के महामंत्री गौरव रणदिवे को दिया था। तब मंच से ही मंत्री विजयवर्गीय ने इस पर तंज कसा था। उसे भी सीएम व मंत्री के बीच मतभेद से जोड़कर देखा जा रहा है।
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बिप्लब कुमार देब के सामने भी उठा था मुद्दा
हाल ही में प्रदेश भाजपा के प्रभारी बिप्लब कुमार देब और सह प्रभारी रेखा वर्मा के मध्य प्रदेश दौरे के दौरान भी पार्टी के अंदर की स्थिति और नेताओं के बीच समन्वय से जुड़े मुद्दों की चर्चा होने की बात सामने आई थी। संगठन के स्तर पर लगातार नेताओं से संवाद और फीडबैक लेने का दौर भी चल रहा है।
अब अमित शाह से मुलाकात ने बढ़ाई हलचल
इन घटनाक्रमों के बीच अमित शाह के शनिवार को भोपाल दौरे के बाद एयरपोर्ट पर कैलाश विजयवर्गीय से उनकी मुलाकात को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। सवाल उठ रहा है कि शाह के जाते-जाते दोनों नेताओं के बीच हुई क्या बातचीत हुई? क्या मध्य प्रदेश भाजपा की अंदरूनी स्थिति को लेकर भी कोई चर्चा हुई? हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि अमित शाह और कैलाश विजयवर्गीय के बीच किस मुद्दे पर बातचीत हुई। इसलिए इस मुलाकात को किसी खास विवाद या संगठनात्मक फैसले से जोड़ना फिलहाल सिर्फ राजनीतिक अटकल ही माना जाएगा।
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मुलाकात के सियासी मायने
ऐसी मुलाकातों के मायने निकाला जाना स्वाभाविक
सियासी जानकारों का मानना है कि भाजपा जैसे संगठन में वरिष्ठ नेताओं के बीच होने वाली मुलाकातें सामान्य भी हो सकती हैं, लेकिन जब किसी राज्य में अंदरूनी खींचतान की चर्चाएं चल रही हों, तब ऐसी मुलाकातों के राजनीतिक मायने निकाले जाना स्वाभाविक है। आने वाले दिनों में संगठन की बैठकों और नेताओं के बयानों से तस्वीर और साफ हो सकती है।
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मुख्यमंत्री के साथ अनबन की चर्चाएं
प्रदेश में राजनीतिक मतभेद की सबसे ज्यादा चर्चा मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बीच को लेकर होती रही है। हालांकि, दोनों नेताओं की ओर से किसी विवाद की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की गई है। मंत्री विजयवर्गीय और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बीच मतभेद की चर्चाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। इनमें इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल से हुई मौतों के मामले में अधिकारियों द्वारा उनकी बात नहीं सुनने से लेकर कथित 'लेटर बम' तक चर्चित रहे। दरअसल, कथित तौर पर एक पत्र कैलाश विजयवर्गीय की ओर से मुख्यमंत्री को लिखे जाने की बात सामने आई थी। इसमें बीते ढाई साल में उनकी उपेक्षा और असहयोग मिलने की बात का दावा किया गया था। हालांकि, पत्र वायरल होने के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने इसे लिखने से इनकार करते हुए खंडन किया था। इसके बाद से दोनों नेताओं के बीच सबकुछ ठीक नहीं चलने को लेकर कयास लगाए जाने लगे। हालांकि, सरकार और संगठन की ओर से सार्वजनिक तौर पर इस तरह के किसी विवाद की बात सामने नहीं आई। इसके बावजूद कुछ राजनीतिक घटनाक्रमों को दोनों नेताओं के बीच खींचतान से जोड़कर देखा जाता रहा है।
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इंदौर में नितिन नवीन के सामने मंच से तंज
हाल ही में इंदौर में स्वामित्व अधिकार योजना के रजिस्ट्री कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी में अपने बयान में कार्यक्रम की रूपरेखा का पूरा श्रेय प्रदेश भाजपा के महामंत्री गौरव रणदिवे को दिया था। तब मंच से ही मंत्री विजयवर्गीय ने इस पर तंज कसा था। उसे भी सीएम व मंत्री के बीच मतभेद से जोड़कर देखा जा रहा है।
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बिप्लब कुमार देब के सामने भी उठा था मुद्दा
हाल ही में प्रदेश भाजपा के प्रभारी बिप्लब कुमार देब और सह प्रभारी रेखा वर्मा के मध्य प्रदेश दौरे के दौरान भी पार्टी के अंदर की स्थिति और नेताओं के बीच समन्वय से जुड़े मुद्दों की चर्चा होने की बात सामने आई थी। संगठन के स्तर पर लगातार नेताओं से संवाद और फीडबैक लेने का दौर भी चल रहा है।
अब अमित शाह से मुलाकात ने बढ़ाई हलचल
इन घटनाक्रमों के बीच अमित शाह के शनिवार को भोपाल दौरे के बाद एयरपोर्ट पर कैलाश विजयवर्गीय से उनकी मुलाकात को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। सवाल उठ रहा है कि शाह के जाते-जाते दोनों नेताओं के बीच हुई क्या बातचीत हुई? क्या मध्य प्रदेश भाजपा की अंदरूनी स्थिति को लेकर भी कोई चर्चा हुई? हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि अमित शाह और कैलाश विजयवर्गीय के बीच किस मुद्दे पर बातचीत हुई। इसलिए इस मुलाकात को किसी खास विवाद या संगठनात्मक फैसले से जोड़ना फिलहाल सिर्फ राजनीतिक अटकल ही माना जाएगा।
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मुलाकात के सियासी मायने
ऐसी मुलाकातों के मायने निकाला जाना स्वाभाविक
सियासी जानकारों का मानना है कि भाजपा जैसे संगठन में वरिष्ठ नेताओं के बीच होने वाली मुलाकातें सामान्य भी हो सकती हैं, लेकिन जब किसी राज्य में अंदरूनी खींचतान की चर्चाएं चल रही हों, तब ऐसी मुलाकातों के राजनीतिक मायने निकाले जाना स्वाभाविक है। आने वाले दिनों में संगठन की बैठकों और नेताओं के बयानों से तस्वीर और साफ हो सकती है।
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