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टीईटी के खिलाफ प्रदेशभर से शिक्षक पहुंचे भोपाल: बोले-किसी हाल में नहीं देंगे परीक्षा,पुरानी पेंशन भी लागू करें

Sun, 04 Oct 2026 04:22 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Sun, 04 Oct 2026 04:22 PM IST
सार

भोपाल में प्रदेशभर से जुटे शिक्षकों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा का विरोध करते हुए परीक्षा नहीं देने का ऐलान किया। शिक्षकों ने वर्षों की सेवा के बाद दोबारा परीक्षा कराने पर सवाल उठाया और सांसद-विधायकों की तर्ज पर पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग की।

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Teachers from across the state arrived in Bhopal to protest against the TET; they declared they would not take
शिक्षकों का अनिश्चितकालीन धरना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर मध्य प्रदेश के शिक्षकों का विरोध तेज हो गया है। रविवार को प्रदेश के अलग-अलग संभागों से शिक्षक भोपाल पहुंचे और लिंक रोड नंबर-2 स्थित अंबेडकर पार्क में धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि वे किसी भी हाल में शिक्षक पात्रता परीक्षा नहीं देंगे। इसके साथ ही शिक्षकों ने पुरानी पेंशन योजना लागू करने और वरिष्ठता बहाल करने की मांग भी उठाई। शिक्षक संघर्ष समिति एवं वरिष्ठता बहाली मंच के बैनर तले हुए प्रदर्शन में भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर-चंबल, जबलपुर, शहडोल, सागर और रीवा संभाग के जिलों से शिक्षक-शिक्षिकाएं पहुंचे। शिक्षक सुबह 11 बजे से पार्क में जुटने लगे थे। दोपहर एक बजे से धरना शुरू हुआ।
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वर्षों की सेवा के बाद परीक्षा क्यों, शिक्षकों का सवाल
प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने डीएड और बीएड जैसी निर्धारित शैक्षणिक योग्यता के आधार पर नियुक्ति पाई है। ऐसे में वर्षों की सेवा के बाद दोबारा पात्रता परीक्षा लेना उचित नहीं है। अध्यापक संघर्ष समिति के पदाधिकारी भारत भार्गव ने कहा कि कई शिक्षक 20 से 28 साल तक सेवा कर चुके हैं। ऐसे में दादा-दादी और नाना-नानी की उम्र में दोबारा परीक्षा कराना शिक्षकों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से शिक्षकों में नाराजगी है। भार्गव के मुताबिक उनकी नियुक्ति 1998 में हुई थी और करीब 28 साल की सेवा के बावजूद सरकारी पोर्टल पर उनकी सेवा अवधि केवल आठ साल दिखाई जा रही है।
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वेतनमान और वरिष्ठता का मुद्दा भी उठाया
भारत भार्गव ने कहा कि शिक्षकों को 10 साल का छठा और ढाई साल का सातवां वेतनमान नहीं मिला। इसके साथ ही कई शिक्षकों की वर्षों की सेवा को शून्य कर दिया गया। शिक्षकों का कहना है कि उनकी वरिष्ठता और सेवा अवधि से जुड़े मामलों का भी समाधान किया जाना चाहिए।


सांसद-विधायक पेंशन ले रहे तो शिक्षक क्यों नहीं?
धरने में पुरानी पेंशन योजना का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। भारत भार्गव ने कहा कि सांसद और विधायक आजीवन पेंशन, वेतन और भत्तों का लाभ लेते हैं। शिक्षकों ने कभी इस पर सवाल नहीं उठाया। फिर लंबे समय तक सरकारी सेवा देने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने में सरकार को आपत्ति क्यों है।

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डेढ़ लाख शिक्षक परीक्षा के दायरे में
स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के करीब डेढ़ लाख शिक्षक शिक्षक पात्रता परीक्षा के दायरे में बताए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने परीक्षा कराने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल को परीक्षा एजेंसी बनाया गया है। शिक्षकों का कहना है कि वे सरकार के इस फैसले का विरोध जारी रखेंगे। प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि किसी भी स्थिति में परीक्षा में शामिल नहीं होंगे और पुरानी पेंशन तथा वरिष्ठता बहाली की मांग को लेकर आंदोलन आगे बढ़ाया जाएगा।

 
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