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MP News: मदरसों में खुशियों की लहर, जारी रहेगी फंडिंग, सरकारी स्कूल में नहीं ट्रांसफर होंगे बच्चे, जानें आदेश

Mon, 21 Oct 2024 04:02 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: अरविंद कुमार Updated Mon, 21 Oct 2024 04:02 PM IST
सार

दिल्ली से आए एक फैसले के बाद मध्यप्रदेश के मदरसों में खुशी की लहर है। फैसले के मुताबिक, मदरसों के बच्चे अब सरकारी स्कूल में ट्रांसफर नहीं होंगे। साथ ही मदरसों को मिल रही फंडिंग जारी रहेगी।

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MP Wave of happiness in madrasas funding will continue children will not be transferred to government schools
मदरसा स्कूल के बच्चे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की सिफारिशों पर सोमवार को रोक लगा दी। इस फैसले के बाद देश भर के मदरसों को भी सरकार की ओर से मिलने वाली फंडिंग जारी रहेगी। एनसीपीसीआर ने शिक्षा के अधिकार कानून का पालन नहीं करने पर सरकारी वित्त पोषित और सहायता प्राप्त मदरसों को मिलने वाली धनराशि रोकने की मांग की थी। अदालत के इस फैसले से प्रदेश के वे छह हजार से ज्यादा मदरसा भी राहत महसूस कर रहे हैं, जिन पर बंद होने की तलवार लटकी हुई थी।

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जानकारी के मुताबिक, एससी ने गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के छात्रों को सरकारी स्कूलों में भेजने के संबंध में NCPCR की सिफारिश भी खारिज कर दी। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने  सोमवार को इस मामले पर फैसला सुनाया। मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के वकील की दलीलों को पीठ ने सुना, जिसमें कहा गया कि एनसीपीसीआर और कुछ राज्यों की कार्रवाइयों पर रोक लगाने की जरूरत है।
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मुस्लिम संगठन ने उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा सरकारों के उस निर्देश को चुनौती दी है, जिसमें कहा गया कि गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के छात्रों को सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने आदेश दिया कि इस वर्ष सात जून और 25 जून को जारी एनसीपीसीआर के सिफारिश पर कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इसके चलते किए गए राज्यों के आदेश भी स्थगित रहेंगे। न्यायालय ने मुस्लिम संस्था को उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा के अलावा अन्य राज्यों को भी अपनी याचिका में पक्षकार बनाने की अनुमति दी।
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मप्र में लड़ रहा था आधुनिक मदरसा कल्याण संघ
मदरसों पर तालाबंदी के हालात को लेकर आधुनिक मदरसा कल्याण संघ लंबे अरसे से लड़ाई लड़ रहा था। संघ के मौहम्मद सुहैब कुरैशी, हाफिज जुनैद अहमद, कफिल अहमद आदि इस मामले को लेकर सरकार से लेकर प्रशासन तक गुहार लगा रहे हैं। इस मामले को लेकर अदालत में भी याचिका दाखिल की गई हैं। 

NCPCR का क्या है इस मामले पर तर्क
एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने बीते दिनों कहा था कि उन्होंने मदरसों को बंद करने के लिए कभी नहीं कहा। बल्कि, उन्होंने इन संस्थानों को सरकार की ओर से दी जाने वाली धनराशि पर रोक लगाने की सिफारिश की क्योंकि ये संस्थान गरीब मुस्लिम बच्चों को शिक्षा से वंचित कर रहे हैं। कानूनगो ने कहा कि गरीब पृष्ठभूमि के मुस्लिम बच्चों पर अक्सर धर्मनिरपेक्ष शिक्षा के बजाय धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए दबाव डाला जाता है।

उन्होंने कहा कि वह सभी बच्चों के लिए शिक्षा के समान अवसरों की वकालत करते हैं। दरअसल, एनसीपीसीआर ने एक हालिया रिपोर्ट में मदरसों की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताई थी। इस आधार पर ऐक्शन लेने की मांग की गई। हालांकि, इस रिपोर्ट पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। सत्तारूढ़ भाजपा पर अल्पसंख्यक संस्थानों को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाने का आरोप लगाया गया।


शिक्षा से जुड़े रहेंगे बच्चे
आधुनिक मदरसा कल्याण संघ के मौहम्मद सुहैब कुरैशी, हाफिज जुनैद अहमद, कफिल अहमद ने कहा कि आमतौर पर मदरसों में गरीब और पिछड़े तबके के बच्चे शिक्षा हासिल कर रहे हैं। अदालत का यह फैसला प्रदेश के हजारों मदरसा स्टूडेंट्स के लिए बड़ी राहत साबित होगा।

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