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MP Vidhansabha Satra: उपाध्यक्ष का पद लेने कांग्रेस का दांव, अध्यक्ष के निर्वाचन में दिया भाजपा का साथ

Mon, 18 Dec 2023 04:18 PM IST
दिनेश शर्मा अमर उजाला, न्यूज डेस्क, भोपाल
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, भोपाल Published by: दिनेश शर्मा Updated Mon, 18 Dec 2023 04:18 PM IST
सार

नरेंद्र सिंह तोमर ने सोमवार को विधानसभा अध्यक्ष के लिए नामांकन जमा किया। कांग्रेस विधायक दल ने भी उन्हें अपना समर्थन दिया है। 

 

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MP Vidhan Sabha Satra: Congress supported BJP in the election of Assembly Speaker.
विधानसभा अध्यक्ष के लिए कांग्रेस ने भी भाजपा का साथ दिया है। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

विधानसभा में उपाध्यक्ष का पद हासिल करने के लिए कांग्रेस अपना पूरा जोर लगा रही है। इसके लिए कांग्रेस ने पूरी रणनीति बना ली है। कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष के निर्वाचन में अपना कैंडिडेट न उतारने का फैसला लिया है। इतना ही नहीं कांग्रेस ने इस मामले में भाजपा का समर्थन किया है। 
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सोमवार को भारतीय जनता पार्टी विधायक दल की ओर से पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए प्रमुख सचिव एपी सिंह के पास अपना नामांकन भरा। इस मौके पर कांग्रेस विधायक भी भाजपा विधायकों के साथ तोमर के समर्थन में खड़े नजर आए। कांग्रेस की ओर से नेता-प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और पूर्व नेता-प्रतिपक्ष अजय सिंह इस प्रक्रिया में शामिल हुए। वहीं भाजपा से मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव व पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह सहित अन्य विधायक मौजूद रहे। 
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सीएम ने किया स्वागत 
इधर, कांग्रेस विधायक दल से मिले समर्थन पर मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने कहा कि आज विपक्ष ने सकारात्मक संदेश दिया है। नवीन अध्यक्ष का नामांकन जमा किया है। विपक्ष के इस सहयोग का स्वागत करता हूं। इससे पहले कांग्रेस ने 2018 में सत्ता में वापसी करने पर अध्यक्ष के साथ ही उपाध्यक्ष का पद भी अपने पास ही रख लिया था। इसके बाद से सत्ता परिवर्तन होने पर भाजपा ने भी कांग्रेस को उपाध्यक्ष का पद नहीं दिया। हालांकि भाजपा ने किसी और को भी पूरे सत्र के दौरान उपाध्यक्ष नहीं बनाया था। इस बार कांग्रेस इस जुगत में है कि भाजपा उसे उपाध्यक्ष का पद दे दे। 
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ऐसे टूटी थी परंपरा 
15वीं विधानसभा के गठन के बाद अध्यक्ष के निर्वाचन के समय भाजपा ने परंपरा को तोड़ते हुए अपना उम्मीदवार मैदान में उतार दिया था। इसके बाद से ही उपाध्यक्ष को लेकर भी दोनों पार्टियों के बीच विवाद की स्थिति बन गई थी। इसके पहले अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव आपसी सहमति से निर्विरोध कर लिया जाता था। जहां अध्यक्ष का पद सत्ता पक्ष के पास रहता था तो वहीं उपाध्यक्ष का पद विपक्ष को दे दिया जाता था। लेकिन 2018 में कांग्रेस ने जब अध्यक्ष पद के लिए एनपी प्रजापति का नाम सामने किया था तो भाजपा ने जगदीश देवड़ा को मैदान में उतार दिया। हालांकि देवड़ा चुनाव हार गए थे। इसके बाद कांग्रेस ने उपाध्यक्ष का पद भी विपक्ष को नहीं दिया।
 
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