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एमपी राज्यसभा चुनाव: तमिलनाडु की अविनाशी सीट के नतीजें पर टिका मध्य प्रदेश का सियासी समीकरण

Thu, 23 Apr 2026 07:52 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Thu, 23 Apr 2026 07:52 PM IST
सार

मध्य प्रदेश के आगामी राज्यसभा चुनाव का गणित इस बार तमिलनाडु और केरल के विधानसभा चुनाव नतीजों से प्रभावित हो सकता है।  केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन और जॉर्ज कुरियन की जीत-हार एमपी में राज्यसभा सीटों के समीकरण बदल सकती है। 

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MP Rajya Sabha elections: Madhya Pradesh's political equation hinges on the results of Tamil Nadu's Avinashi s
केरल में भाजपा उम्मीवार जॉर्ज कुरियन और तमिलनाडु में भाजपा प्रत्याशी डॉ. एल मुरुगन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव का गणित इस बार प्रदेश से दूर दक्षिण भारत के चुनाव परिणामों से प्रभावित होता नजर आ रहा है। खासकर राज्यसभा में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे केंद्रीय मंत्री डॉ. एल मुरुगन तमिलनाडु और जॉर्ज कुरियन केरल की कांजीरापल्ली विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में है। इनकी हार जीत  मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है। कुरियन का कार्यकाल पूरा हो रहा है। मुरुगन यदि चुनाव जीते तो राज्यसभा में उनकी सीट खाली हो जाएगी। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक के लिए है। तमिलनाडू की अविनाशी सीट से प्रत्याशी डॉ. एल मुरुगन है। यहां पर 23 अप्रैल आज मतदान हुआ है। वहीं, केरल में 9 अप्रैल को एक चरण में वोट डाले गए।  कुरियन और मुरुगन के चुनाव का रिजल्ट 4 मई को आएगा। 
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दक्षिण से जुड़ेगा एमपी का समीकरण
यदि तमिलनाडु की अविनाशी सीट से चुनाव लड़ रहे डॉ. एल मुरुगन चुनाव जीतते है, तो उन्हें राज्यसभा सदस्यता छोड़नी पड़ेगी। उनका कार्यकाल 2030 तक का है। मध्य प्रदेश से वह दूसरी बार राज्यसभा गए हैं।  ऐसे में मध्य प्रदेश में खाली होने वाली सीटों की संख्या बढ़ सकती है। अभी जहां तीन सीटों पर चुनाव होना है, वहीं इस्तीफे की स्थिति में यह संख्या चार तक पहुंच सकती है। 
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एक सीट के लिए 58 वोट जरूरी 
मध्य प्रदेश विधानसभा की 230 सीटों के आधार पर राज्यसभा की एक सीट के लिए 58 वोट जरूरी हैं। भाजपा के पास 160 से अधिक विधायक हैं, जिससे उसकी दो सीटें लगभग तय मानी जा रही हैं। असली मुकाबला तीसरी और संभावित चौथी सीट को लेकर है। कांग्रेस के पास कागजों पर करीब 65 विधायक हैं, लेकिन कुछ कारणों से प्रभावी संख्या घटकर लगभग 62 रह गई है। ऐसे में 58 के आंकड़े से मामूली बढ़त कांग्रेस के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति बना रही है। 

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कांग्रेस की चुनौती
भाजपा के पास दो सीटें सुरक्षित करने के बाद भी पर्याप्त अतिरिक्त वोट मौजूद हैं, जिससे वह तीसरी सीट पर दावेदारी मजबूत कर सकती है। वहीं कांग्रेस के भीतर उम्मीदवार चयन को लेकर असमंजस और अंदरूनी खींचतान की स्थिति बनी हुई है। यदि सीटों की संख्या बढ़ती है, तो नए चेहरे सामने आ सकते हैं।  बता दें मध्य प्रदेश में राज्यसभा में मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्य कर रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और भाजपा की सीट पर सुमेर सिंह सोलंकी और जार्ज कुरियन का कार्यकाल पूरा हो गया है। ऐसे में मुरुगन विधानसभा का चुनाव जीत गए तो भाजपा की तीसरी सीट भी खाली हो सकती है। हालांकि मुरुगन को अब तक चार बार चुनाव में सफलता नहीं मिल सकी है। बता दें तमिलनाडु में भाजपा एआईएडीएमके के साथ गठबंधन में 27 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं।  
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