MP Politics: भाजपा और कांग्रेस का 'मिशन-47', क्या पीएम मोदी के बनाए भाजपा के माहौल का जवाब बनेंगे राहुल गांधी?
21 जुलाई को प्रियंका गांधी की ग्वालियर में सभा होगी और फिर अगस्त में राहुल गांधी की धार के सरदारपुर और शहडोल के ब्यौहारी में सभा होने वाली हैं। इन सभाओं का उद्देश्य आदिवासी वोटरों को कांग्रेस से जोड़े रखना है।
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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने तैयारियां बढ़ा दी हैं। भाजपा का पूरा फोकस आदिवासी सीटों पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन क्षेत्रों का दौरा कर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाया है। हालांकि, सीधी पेशाब कांड से भाजपा बैकफुट पर है। भाजपा की तरह कांग्रेस भी 'मिशन-47' पर ही काम कर रही है। 'मिशन-47' का मतलब है मध्यप्रदेश में आदिवासियों के लिए रिजर्व 47 सीटें, जिन पर मिली बड़ी जीत सत्ता के द्वार खोलती है। कांग्रेस ने इन सीटों पर जीत के लिए राहुल गांधी की सभाएं प्लान की हैं।
प्रदेश की सियासत में आदिवासी गेमचेंजर है
प्रदेश की राजनीति में आदिवासी वोटर अब तक गेमचेंजर साबित हुआ है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा ने आदिवासियों के बीच काम करके 2003 में कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर दिया था। इसके बाद 2008, 2013 में आदिवासियों को साधकर भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की। 2018 में आदिवासी वोट कांग्रेस की तरफ झुक गया। इसके चलते 15 साल बाद भाजपा की सरकार गई। प्रदेश की आदिवासियों के लिए आरक्षित 47 में से कांग्रेस को 30 और भाजपा को 16 सीटें मिली। इन 47 सीटों को मिलाकर करीब 90 सीटों पर आदिवासी वोटर प्रभाव रखते हैं। प्रदेश की करीब 22% आबादी अनुसूचित जनजाति वर्ग से है। इसी वर्ग के वोटर सरकार बनाने और बिगाड़ने में मुख्य भूमिका में है। इसके बाद से दोनों ही पार्टी आदिवासी वोटरों को साधने में जुटी हुई है।
कांग्रेस भी खुद को बता रही आदिवासी हितैषी
21 जुलाई को प्रियंका गांधी की ग्वालियर में सभा के बाद अगस्त में राहुल गांधी की धार के सरदारपुर और शहडोल के ब्यौहारी में सभा सभाएं आयोजित करने जा रही है। इन सभाओं के माध्यम से कांग्रेस आदिवासी वोटरों को साधना चाहती है। इसके अलावा कांग्रेस आदिवासी वोटरों को लुभाने की रणनीति पर भी काम कर रही है। आदिवासियों के मुद्दे उठाकर सरकार को घेर रही है। सीधी पेशाब कांड समेत आदिवासियों पर अत्याचार के मुद्दे को सदन में जोर-शोर से उठाया। इसके विरोध को लेकर आदिवासी स्वाभिमान यात्रा निकाल रही है।
सीधी की घटना से भाजपा बैकफुट पर है
कांग्रेस पार्टी खुद को आदिवासियों की सबसे बड़ी हितैषी बताने में जुटी हुई है। भाजपा प्रतिनिधि के आदिवासी के ऊपर पेशाब करने का वीडियो वायरल होने से भाजपा बैकफुट पर है। आदिवासी वोट बैंक छिटकने के डर है। इसलिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पीड़ित को बुलाकर उसके पैर धोना पड़ा। आरोपी प्रवेश शुक्ला के घर पर बुलडोजर चलया। इस डैमेज को कंट्रोल करने के लिए प्रदेश भाजपा ने आदिवासी वोटरों को साधने पर फोकस बड़ा दिया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विकास पर्व की शुरुआत आदिवासी जिले धार के कुक्षी में कार्यक्रम करके कर रहे हैं।
भाजपा दो साल से कर रही तैयारी
प्रदेश में भाजपा की सत्ता बरकरार रखने के लिए भाजपा दो साल से आदिवासियों को साधने में जुटी हुई है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहडोल में आदिवासियों के साथ संवाद करके बड़ा संदेश दिया। रानी दुर्गावती की शहादत दिवस पर पांच गौरव यात्रा निकाली गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय गौरव दिवस की शुरुआत करने के साथ ही हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम गोंड रानी रानी कमलापति के नाम पर रखा। प्रदेश सरकार ने पेसा नियम लागू करने के साथ ही कई योजनाएं शुरू की है। पिछले दो साल से भाजपा आदिवासियों के लिए काम कर रही है।
आदिवासी सीटों पर ऐसे बदले समीकरण -
2003 विधानसभा चुनाव- आदिवासियों के लिए 41 सीट रिजर्व थी। इसमें से भाजपा ने 37 सीटें जीती थी। जबकि कांग्रेस सिर्फ दो सीट पर सिमट गई थी। इसके अलावा गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने दो सीट जीती थी।
2008 विधानसभा चुनाव- आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या बढ़कर 47 हो गई। इसमें भाजपा ने 29 सीटें जीती। वहीं, कांग्रेस की सीटें बढ़कर 17 पहुंच गई।
2013 विधानसभा चुनाव- 47 सीटों में से भाजपा ने 31 सीटें जीती। वहीं, कांग्रेस की सीटें बढ़कर 15 पहुंच गई।
2018 विधानसभा चुनाव- 47 आरक्षित सीटों में से कांग्रेस ने 30 सीटें जीती, भाजपा को सिर्फ 16 सीटें ही मिली। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार जीता।
जयस भी बढ़ा रहा मुश्किल
मध्य प्रदेश में जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) का जनाधार भी तेजी से बढ़ रहा है। संगठन ने युवाओं को आदिवासी प्रभाव वाली 80 सीटों पर चुनाव लड़ाने का एलान किया है। इसके लिए संगठन लगातार जमीनी स्तर पर काम करते आ रहा है। जयस का बढ़ता जनाधार भाजपा और कांग्रेस के लिए मुसीबत बन रहा है।
