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MP: ओंकारेश्वर एवं जहानगढ़ बनेंगे दो नए वन्य जीव अभयारण्य, राज्य वन्यप्राणी बोर्ड की बैठक में CM ने दी मंजूरी

Thu, 13 Mar 2025 10:25 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, भोपाल, मध्य प्रदेश
न्यूज डेस्क, भोपाल, मध्य प्रदेश Published by: आनंद पवार Updated Thu, 13 Mar 2025 10:25 PM IST
सार

वन्य जीव संरक्षण की दिशा में एक कदम ओर बढ़ाते हुए अब प्रदेश में दो नए वन्य जीव अभयारण्य स्थापित किए जाएंगे। यह नए वन्य जीव अभयारण्य ओंकारेश्वर एवं जहानगढ़ में स्थापित किए जाएंगे। 

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MP: Omkareshwar and Jahangarh will be two new wildlife sanctuaries, CM gave approval in the meeting of State W
सीएम डॉ. मोहन यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में मध्यप्रदेश राज्य वन्यप्राणी बोर्ड की 28वीं बैठक में 2 वन्य जीव अभयारण्य की स्थापना को मंजूरी दी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार के प्रभावी प्रयासों का ही सुखद परिणाम है कि प्रदेश में बाघ, तेंदुआ, चीता, हाथी, घड़ियाल के साथ-साथ विलुप्त होती प्रजाति के गिद्धों की संख्या में भी वृद्धि हो रही है। गत माह 17 से 19 फरवरी 2025 को हुई ताजा गिद्ध जनगणना के अनुसार प्रदेश में 12 हजार 981 गिद्ध पाए गए हैं। गिद्धों की संख्या बीते वर्ष में ही 19 प्रतिशत बढ़ी है। उन्होंने बताया कि ओंकारेश्वर वन्य जीव अभयारण्य देवास-खंडवा जिले के करीब 614.0709 वर्ग कि.मी. वन रकबे में तथा जहानगढ़ वन्य जीव अभयारण्य श्योपुर जिले के 6.328 वर्ग कि.मी. वन रकबे पर विकसित किया जाएगा। 
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रेस्क्यू सेंटर की स्थापना में लाएं तेजी
बैठक में जानकारी दी गई कि उज्जैन जिले के नौलखी में वन्य जीव रेस्क्यू सेंटर कम जू प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेस्क्यू सेंटर कम जू को वन्य जीव पर्यटन के लिहाज से तैयार किया जाए। बैठक में बताया गया कि उज्जैन की तरह एक वन्य जीव रेस्क्यू सेंटर कम जू का निर्माण जबलपुर जिले में भी प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री ने वन विभाग के अधिकारियों को वन्य जीवों के संरक्षण के निर्देशित करते हुए कहा कि मगरमच्छ सड़कों एवं आबादी क्षेत्र में न पहुंचे, इसके लिए उन्हें खाली पड़ी नदियों में पुनर्स्थापित किया जाए। मु्ख्यमंत्री ने कहा कि वन्य जीवों के संरक्षण एवं पुनर्वास के लिए विशेषज्ञों को आमंत्रित कर कार्यशालाएं एवं संयुक्त बैठक आयोजित की जाएं। देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए वन्य जीवों के संरक्षण को पर्यटन से जोड़ते हुए परियोजना तैयार करने की आवश्यकता है। 
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असम से गैंडें और अफ्रीका से जिराफ लाने की तैयारी 
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्य जीव पर्यटन बोर्ड थलचर (वनचर), जलचर और नभचर तीनों श्रेणियों के जीव-जंतुओं, पशु-पक्षियों एवं वन्य प्राणियों के कल्याण की चिंता करे। यह सभी प्राणी हमारी वृहद जैव विविधता की धरोहर है। हमें इन्हें बचाना है, इनके विकास के लिए अनुकूलित वातावरण उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री ने टाइगर, चीतों एवं घड़ियालों का घर बन चुके मध्य प्रदेश में असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से गैंडों को लाने और साऊथ अफ्रीका से जिराफ को लाकर यहां बसाने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए।  
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जनजातीय बंधु वनों के प्राकृतिक संरक्षक  
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय बंधु वनों के प्राकृतिक संरक्षक है। इसीलिए वन विभाग यह सुनिश्चित करे कि प्रदेश के किसी भी जनजातीय क्षेत्र में जनजातीय वर्ग के श्रद्धालुओं को उनके प्राकृतिक देव स्थानों तक पहुंचने और देव आराधना/अनुष्ठान करने में किसी भी प्रकार की कोई कठिनाई न आने पाए। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन्य प्राणी बोर्ड द्वारा प्रस्तावित किए गए 33 विकास प्रस्तावों में से 30 विकास प्रस्तावों का अनुमोदन किया।
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