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MP News: मध्य प्रदेश में वन्य-जीव पर्यटन अभियान की शुरुआत, सीएम डॉ. मोहन यादव चंबल अभयारण का करेंगे दौरा
Fri, 03 Jan 2025 05:15 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Fri, 03 Jan 2025 05:15 PM IST
सार
मुख्यमंत्री ने बताया कि चंबल अभयारण्य में 26 दुर्लभ कछुआ प्रजातियां पाई जाती हैं। यहां की नदियों और घाटियों के किनारे परिपूर्ण दृश्य और विविध जीवों के अवलोकन के लिए पर्यटकों के लिए यह एक आदर्श स्थल है।
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सीएम डॉ. मोहन यादव
विस्तार
मध्य प्रदेश में वन्य-जीव पर्यटन अभियान की शुरुआत शनिवार से हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस अभियान की शुरुआत करते हुए चंबल अभयारण्य का दौरा करेंगे। इस दौरान वह चंबल नदी के घड़ियाल अभयारण्य की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगे और पर्यटन सुविधाओं का जायजा लेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश को प्रकृति ने कई वरदान दिए हैं, जिसमें सघन वन, विविध वृक्ष और वन्य-जीव शामिल हैं। राज्य बाघ, तेंदुआ और घड़ियाल जैसी प्रजातियों का घर है और यह दुनिया भर में घड़ियालों की सबसे बड़ी संख्या वाला क्षेत्र है। चंबल नदी में दुनिया के 85 प्रतिशत घड़ियाल पाए जाते हैं, जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं।
1978 में इसे वन्य-जीव अभयारण्य के रूप में मान्यता मिली
चंबल अभयारण्य, जो मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के साझा प्रयासों से स्थापित हुआ है, एक प्रमुख वन्य-जीव संरक्षण परियोजना है। 1978 में इसे वन्य-जीव अभयारण्य के रूप में मान्यता मिली थी। यहां घड़ियाल, लाल मुकुट वाले कछुए और गांगेय डॉल्फिनों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि चंबल अभयारण्य में 26 दुर्लभ कछुआ प्रजातियां पाई जाती हैं। यहां की नदियों और घाटियों के किनारे परिपूर्ण दृश्य और विविध जीवों के अवलोकन के लिए पर्यटकों के लिए यह एक आदर्श स्थल है। शीतकाल में विशेष रूप से घड़ियालों को देखने का सर्वोत्तम समय होता है, जब यह पानी से बाहर आते हैं।
घड़ियाल, लाल मुकुट वाले कछुए और डॉल्फ़िन पाए जाते हैं
मुख्यमंत्री के इस दौरे से मध्य प्रदेश में वन्य-जीव पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय पर्यटन और संरक्षण गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभयारण्य लगभग साढ़े पांच वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। पहाड़ियों और रेतीले समुद्र तटों की तरह चंबल नदी तटों से यह धरती भरी हुई है। यह वन्य-जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित है और इसका मुख्यालय मुरैना में है। घड़ियालों और गंगा डॉल्फिनों का निवास स्थान, पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया है। घड़ियाल, लाल मुकुट वाले कछुए और डॉल्फ़िन यहां पाए जाते हैं। अन्य जानवर जो (दुर्लभ) श्रेणी में हैं, उनमें मगरमच्छ, चिकने-लेपित ऊदबिलाव, धारीदार लकड़बग्घा और भारतीय भेड़िये हैं, जो संरक्षण सूची की अनुसूची-1 में शामिल हैं।
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शीतकाल है घड़ियाल देखने का उपयुक्त समय
चंबल में घड़ियाल अभयारण्य देखने के लिए यात्रा का सर्वोत्तम समय अक्टूबर से जून तक रहता है। शीतकाल में घड़ियाल देखने और यह क्षेत्र घूमने का सबसे अच्छा समय माना गया है। राष्ट्रीय चंबल वन्य-जीव अभयारण्य में प्रकृति को देखने की बहुत सी गतिविधियां होती हैं। घड़ियाल, डॉल्फ़िन, अन्य सरीसृप, जल निकायों और सुंदर परिदृश्य की फोटोग्राफी नाव की सवारी से की जा सकती है। यहाँ की घाटियों और नदियों के किनारे पगडंडियों पर चलना प्रकृति को करीब से देखने का मौका देता है। चंबल नदी लगभग एक हजार किलोमीटर लंबी है। पर्यटक चंबल घड़ियाल सफारी अभयारण्य का आनंद उक्त क्षेत्र के निकटवर्ती नगरों में रहवास सुविधा का उपयोग ले सकते हैं।
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1978 में इसे वन्य-जीव अभयारण्य के रूप में मान्यता मिली
चंबल अभयारण्य, जो मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के साझा प्रयासों से स्थापित हुआ है, एक प्रमुख वन्य-जीव संरक्षण परियोजना है। 1978 में इसे वन्य-जीव अभयारण्य के रूप में मान्यता मिली थी। यहां घड़ियाल, लाल मुकुट वाले कछुए और गांगेय डॉल्फिनों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि चंबल अभयारण्य में 26 दुर्लभ कछुआ प्रजातियां पाई जाती हैं। यहां की नदियों और घाटियों के किनारे परिपूर्ण दृश्य और विविध जीवों के अवलोकन के लिए पर्यटकों के लिए यह एक आदर्श स्थल है। शीतकाल में विशेष रूप से घड़ियालों को देखने का सर्वोत्तम समय होता है, जब यह पानी से बाहर आते हैं।
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घड़ियाल, लाल मुकुट वाले कछुए और डॉल्फ़िन पाए जाते हैं
मुख्यमंत्री के इस दौरे से मध्य प्रदेश में वन्य-जीव पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय पर्यटन और संरक्षण गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभयारण्य लगभग साढ़े पांच वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। पहाड़ियों और रेतीले समुद्र तटों की तरह चंबल नदी तटों से यह धरती भरी हुई है। यह वन्य-जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित है और इसका मुख्यालय मुरैना में है। घड़ियालों और गंगा डॉल्फिनों का निवास स्थान, पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया है। घड़ियाल, लाल मुकुट वाले कछुए और डॉल्फ़िन यहां पाए जाते हैं। अन्य जानवर जो (दुर्लभ) श्रेणी में हैं, उनमें मगरमच्छ, चिकने-लेपित ऊदबिलाव, धारीदार लकड़बग्घा और भारतीय भेड़िये हैं, जो संरक्षण सूची की अनुसूची-1 में शामिल हैं।
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शीतकाल है घड़ियाल देखने का उपयुक्त समय
चंबल में घड़ियाल अभयारण्य देखने के लिए यात्रा का सर्वोत्तम समय अक्टूबर से जून तक रहता है। शीतकाल में घड़ियाल देखने और यह क्षेत्र घूमने का सबसे अच्छा समय माना गया है। राष्ट्रीय चंबल वन्य-जीव अभयारण्य में प्रकृति को देखने की बहुत सी गतिविधियां होती हैं। घड़ियाल, डॉल्फ़िन, अन्य सरीसृप, जल निकायों और सुंदर परिदृश्य की फोटोग्राफी नाव की सवारी से की जा सकती है। यहाँ की घाटियों और नदियों के किनारे पगडंडियों पर चलना प्रकृति को करीब से देखने का मौका देता है। चंबल नदी लगभग एक हजार किलोमीटर लंबी है। पर्यटक चंबल घड़ियाल सफारी अभयारण्य का आनंद उक्त क्षेत्र के निकटवर्ती नगरों में रहवास सुविधा का उपयोग ले सकते हैं।
