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MP News: अस्पतालों में अभी भी ट्रांसजेंडर मरीजों को झेलना पड़ता है भेदभाव का व्यवहार, एम्स के शोध में खुलासा

Tue, 24 Feb 2026 06:27 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Tue, 24 Feb 2026 06:27 PM IST
सार

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल की नर्सिंग छात्रा के शोध में खुलासा हुआ कि अस्पतालों में ट्रांसजेंडर मरीजों को भेदभाव, असंवेदनशील व्यवहार, संवाद की कमी और लिंग-अनुकूल सुविधाओं के अभाव जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह शोध सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, पुणे में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रथम स्थान पर रहा।

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MP News: Transgender patients still face discrimination in hospitals, AIIMS research reveals
एम्स भोपाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी भोपाल के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान भोपाल की नर्सिंग छात्रा ने ऐसा शोध किया है, जिसने स्वास्थ्य सेवाओं की एक संवेदनशील सच्चाई को सामने ला दिया। एमएससी नर्सिंग (प्रसूति एवं स्त्री रोग) द्वितीय वर्ष की छात्रा सुश्री कोमल कथाले ने ट्रांसजेंडर समुदाय की स्वास्थ्य सेवाओं पर किए गए अपने अध्ययन के लिए राष्ट्रीय वैज्ञानिक शोध प्रस्तुति 2026 में प्रथम स्थान हासिल किया। यह सम्मेलन सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, पुणे के सिम्बायोसिस कॉलेज ऑफ नर्सिंग द्वारा आयोजित किया गया था।
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क्या था शोध का विषय?
शोध का विषय था तृतीयक देखभाल अस्पताल में ट्रांसजेंडर समुदाय की स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी अपेक्षाओं और अनुभवों का गुणात्मक अध्ययन।इसका मतलब है कि छात्रा ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से सीधे बातचीत कर उनके असली अनुभव, समस्याएं और उम्मीदों को समझने की कोशिश की। यह केवल आंकड़ों पर आधारित अध्ययन नहीं था, बल्कि उनके जीवन के वास्तविक अनुभवों पर आधारित शोध था।
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ट्रांसजेंडर समुदाय को क्या परेशानियां होती हैं?

1. भेदभाव और असहज व्यवहारः अस्पतालों में कई बार ट्रांसजेंडर मरीजों को अलग नजर से देखा जाता है। उन्हें सम्मानजनक व्यवहार नहीं मिलता, जिससे वे मानसिक रूप से आहत होते हैं।
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2. सही संवाद की कमीः डॉक्टर और स्टाफ कई बार उनकी पहचान और जरूरतों को सही तरीके से समझ नहीं पाते। इससे इलाज के दौरान असहज स्थिति बनती है।
3. लिंग-संवेदनशील सुविधाओं का अभावः अस्पतालों में अलग वार्ड, शौचालय या परामर्श व्यवस्था की कमी के कारण ट्रांसजेंडर मरीजों को असुविधा झेलनी पड़ती है।
4. सामाजिक पूर्वाग्रहः समाज में फैली गलत धारणाएं अस्पतालों के व्यवहार में भी दिखती हैं, जिससे कई लोग इलाज लेने से भी डरते हैं।

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शोध में क्या सुझाव दिए गए?
स्वास्थ्यकर्मियों को संवेदनशीलता और सम्मान का प्रशिक्षण दिया जाए।
अस्पतालों में सुरक्षित और समावेशी वातावरण बनाया जाए।
नीतिगत स्तर पर बदलाव कर ट्रांसजेंडर समुदाय को बराबरी का अधिकार सुनिश्चित किया जाए।
संवाद बेहतर हो और मरीज की पहचान का सम्मान किया जाए।

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क्यों है यह शोध महत्वपूर्ण?
यह अध्ययन बताता है कि स्वास्थ्य सेवा केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि सम्मान, संवेदनशीलता और समान अधिकार भी उतने ही जरूरी हैं। ट्रांसजेंडर समुदाय को बराबरी और गरिमा के साथ स्वास्थ्य सुविधा मिलना उनका अधिकार है। एम्स भोपाल की यह उपलब्धि स्वास्थ्य क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।

 
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