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MP News: प्रदेश कांग्रेस को फिर लगा 'पुराना रोग', पार्टी के पुराने दिग्गज उठाने लगे समन्वय को लेकर सरेआम सवाल

Wed, 01 Oct 2025 07:47 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Wed, 01 Oct 2025 07:47 PM IST
सार

मध्य प्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर गुटबाजी और समन्वय की कमी खुलकर सामने आ गई है। दिग्विजय सिंह के इंदौर दौरे और जिला अध्यक्षों की नियुक्तियों को लेकर प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं।

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MP News: The state Congress is once again suffering from its old ailment, with party veterans openly questioni
कांग्रेस का झंडा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाईकमान व वरिष्ठ नेताओं की लाख कोशिशों के बावजूद मध्य प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी खत्म नहीं हो रही है। वर्षों से मध्य प्रदेश में कांग्रेस इस रोग से ग्रसित है। इसी वजह से कांग्रेस की 15 माह की कमलनाथ सरकार भी गिर गई थी। अंतर्कलह को दूर करने के लिए पार्टी ने दूसरी पीढ़ी के नेताओं को आगे किया, लेकिन बीच बीच में कांग्रेस की गुटबाजी फिर से सामने आने लगी है। जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद पार्टी के कई नेता नियुक्तियों पर बवाल मचा है। अब हाल ही में दिग्विजय सिंह के बिना सूचना के इंदौर पहुंचने पर जिला अध्यक्ष ने सवाल उठाए हैं। ऐसे में प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की कार्यप्रणाली लगातार सवालों के घेरे में आ रही है। कमलेश्वर पटेल के बाद अब अरुण यादव ने पार्टी में समन्वय को लेकर सरेआम सवाल उठाए हैं।  हाल ही में इंदौर के शीतलामाता बाजार की कपड़ा दुकानों से  मुस्लिमों नौकरी से निकालने की विधायक पुत्र एकलव्य सिंह गौड़ की चेतावनी को लेकर चल रहे विवाद के बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सीधे बाजार में पहुंच गए थे। उनके शहर कांग्रेस इकाई को सूचना दिए बिना सीधे प्रदर्शन में भाग लेने को लेकर पार्टी के भीतर विरोध सामने आया। 
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पहले चौकसे और अब यादव ने उठाया मुद्दा
इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने बिना नाम लिए भोपाल से आने वाले नेताओं पर बिना सूचना कार्यक्रम करने पर आपत्ति जताई। इसके बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने लिखा कि पार्टी एवं पार्टी की विचारधारा के लिए वैचारिक और सतही संघर्ष आज समय की मांग है। सिर्फ भाषणों एवं बयानों से जहरीली विचारधाराओं से संघर्ष कर पाना नामुमिकन है। सभी को साथ रख कर अपनी विचारधारा को लेकर समन्वय और एकजुटता से हम संघर्ष करेंगे। तभी प्रदेश में हमारी सरकार बनाने का सपना साकार होगा। जिस साहस और ईमानदारी के साथ हमारे नेता राहुल गांधी संघर्ष कर रहे हें, उसका एक प्रतिशत भी मध्य प्रदेश में हम अंगीकार कर लें तो संघर्ष की राह आसान हो जाएगी। 
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जिलाध्यक्षों को लेकर करीब एक दर्जन जगह विवाद 
कांग्रेस ने लंबे समय बाद जिलाध्यक्षों के नाम की घोषणा की। इसके बाद ही करीब एक दर्जन जगह खुलकर नेताओं ने विरोध किया। इसमें पार्टी के कई कार्यकर्ताओं ने प्रदेश नेतृत्व पर अपने लोगों को पद बांटने का आरोप लगाया। भोपाल में माेनू सक्सेना ने इसका जमकर विरोध किया और वरिष्ठ नेताओं तक शिकायत करने की बात कही। वहीं, इंदौर ग्रामीण में पूर्व विधायक विपिन वानखेड़े को अध्यक्ष बनाया गया है। उनका भी कार्यकर्ता विरोध कर रहे हैं। यही स्थिति इंदौर शहर, उज्जैन ग्रामीण, देवास, सीहोर, सागर शहर और ग्रामीण, सीधी, दतिया और खंडवा के जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर दिखी।  इसके बाद पार्टी के विधायक कमलेश्वर पटेल ने कहा था कि गुटबाजी और प्रतिस्पर्धा हमेशा रही है, लेकिन इतनी गुटबाजी नहीं होना चाहिए। जो जिम्मेदार लोग हैं, उनकी जिम्मेदारी है।  प्रदेश प्रभारी का काम समन्वय बनाने का है, न कि पार्टी बनने का। उन्होंने कहा कि मेरा तो प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष से निवेदन है कि आपको खरगे जी, राहुल जी ने प्रदेश का महत्वपूर्ण पद दिया है, मुखिया बनाया है। आप सबको साथ लेकर चलिए।

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समन्वय राष्ट्रीय प्रभारी की जिम्मेदारी
इन मामलों पर वरिष्ठ पत्रकार दिनेश गुप्ता ने कहा कि कांग्रेस की राजनीति ऐसी ही चलती है, जो पावर में होता है वह अपनी चलाता है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के समन्वय का काम राष्ट्रीय प्रभारी की जिम्मेदारी होती है। यदि वह यह नहीं कर पा रहे हैं तो पार्टी को उनके बारे में सोचना चाहिए।
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