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MP News: MP के टाइगर स्टेट के खिताब पर सस्पेंस बरकरार, सेंट्रल इंडिया के आंकड़ों से अधिकारियों की उम्मीद कायम
Sun, 09 Apr 2023 08:16 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Sun, 09 Apr 2023 08:16 PM IST
सार
स्टेट्स ऑफ टाइगर्स 2022 रिपोर्ट में राज्य अनुसार बाघों की संख्या जारी नहीं हुई है। राज्य अनुसार संख्या 29 जुलाई को आने की संभावना है। हालांकि नई रिपोर्ट में सेंट्रल इंडिया लैंडस्कैप और ईस्टर्न घाट में बाघों की संख्या बढ़ने से एमपी के पास टाइगर स्टेट का दर्जा बरकरार रहने की उम्मीद बढ़ी है।
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टाइगर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को स्टेट्स ऑफ टाइगर्स 2022 रिपोर्ट जारी कर दी है। इसके मुताबिक देश में कम से कम 3167 बाघ हैं। जुलाई में विस्तृत रिपोर्ट आएगी, जिसमें राज्यवार आंकड़े घोषित होंगे। तब तक यह आंकड़ा बढ़ सकता है। अलग-अलग तरीकों से की गई गणना के आंकड़ों का एनालिसिस जारी है। यह 2018 के 2,967 बाघों के वास्तविक आंकड़ों से 200 अधिक है। मध्य प्रदेश जिस सेंट्रल इंडिया और ईस्टर्न घाट लैंडस्कैप में आता है। यहां बाघों की संख्या में सबसे अधिक बढ़ोतरी हुई है। वहीं, कर्नाटक के वेस्टर्न घाट लैंडस्कैप में शुरुआती अनुमानों में आंकड़ों में गिरावट दर्ज की गई है। इस आधार पर अधिकारी दावा कर रहे हैं कि मध्यप्रदेश का टाइगर स्टेट का खिताब कायम रहने वाला है।
हर बार स्टेट्स ऑफ टाइगर्स रिपोर्ट में वास्तविक नंबर दिए जाते थे। इस बार ऐसा नहीं हुआ। प्रोजेक्ट टाइगर के 50 साल पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने जो आंकड़े पेश किए, वह लैंडस्कैप के अनुसार जारी किए हैं। इसमें कम से कम बाघों की संख्या दी गई है, जो वास्तविक रिपोर्ट में बढ़ सकती है। मध्यप्रदेश के प्रमुख मुख्य वनसंरक्षक (वन्यजीव) जसबीर सिंह चौहान ने कहा कि 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर विस्तृत रिपोर्ट आएगी। जो रिपोर्ट पीएम ने जारी की है, उसके अनुसार मध्यप्रदेश में बाघों की संख्या में इजाफा होने की उम्मीद बढ़ी है। अभी यह संख्या और बढ़ेगी। अभी जहां साइन (पगमार्क समेत अन्य विधियां) सर्वे हुआ है और कैमरा ट्रैप नहीं लगे हैं, वहां की संख्या भी इसमें जुड़ेगी।
नई रिपोर्ट देखें तो सेंट्रल इंडिया लैंडस्कैप और ईस्टर्न घाट में बाघों की संख्या 2018 में 1,033 थी, जो बढ़कर 1,161 हो गई है। इस लैंडस्कैप में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, झारखंड, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश शामिल है। शुरुआती आकलन कहता है कि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र को छोड़कर अन्य राज्यों में बाघों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं हुई है। ऐसे में माना जा सकता है कि मध्यप्रदेश का टाइगर स्टेट का खिताब फिलहाल कायम रहेगा। दूसरी ओर, गोवा, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु को मिलाकर वेस्टर्न घाट लैंडस्कैप बनता है। यहां 2018 में 981 बाघ थे, जो नई रिपोर्ट के अनुसार 2022 में कम से कम 812 है।
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जटिल है रिपोर्ट, पर उम्मीद कायम
भारतीय वन सेवा के रिटायर्ड अधिकारी आरजी सोनी का कहना है कि अभी बाघों की संख्या 3600 तक पहुंच सकती है। पिछली बार भी कैमरा ट्रैप के आंकड़े के अनुसार 2400 बाघों का नंबर आया था, जो बढ़कर 2900 के करीब पहुंची थी। नई रिपोर्ट बताती है कि सेंट्रल इंडिया लैंडस्कैप में बाघों की संख्या बढ़ी है। इसमें मध्यप्रदेश का इलाका सबसे बड़ा है। यहां छह टाइगर रिजर्व हैं, जो किसी भी अन्य राज्य में नहीं है। इसी वजह से उम्मीद कायम है कि टाइगर स्टेट का खिताब हमारे पास कायम रहेगा। फिर भी रिपोर्ट जटिल है। इसमें ट्रैप कैमरे और अन्य विधियों से प्राप्त नमूनों के आधार पर नंबर दिए हैं। इस वजह से जुलाई में उलटफेर की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
बाघों का शिकार एक बड़ी चुनौती
बाघों के आवास और उनके संरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट तक में केस लड़ चुके वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे का कहना है कि हमारे यहां शिकार एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। 2022 में ही 38 बाघों की मौत हुई। कर्नाटक में हुई बाघों की मौतों से यह दोगुनी है। इस वजह से शिकार रोकना बेहद जरूरी है। टाइगर रिजर्व में जिन अधिकारियों को भेजा जाता है, उनके चयन में पारदर्शिता होनी चाहिए। इसी तरह इंसानों और बाघ के होने वाले संघर्ष को शून्य पर लाने के प्रयास बढ़ाने होंगे।
लैंडस्कैप अनुसार बाघों की संख्या
शिवालिक हिल्स एंड गंगेटिक प्लेन- 804
सेंट्रल इंडिया एंड ईस्टर्न घाट - 1161
वेस्टर्न घाट - 824
नार्थ-ईस्टर्न हिल्स् एंड ब्रह्मपुत्र प्लेन-194
सुंदरबन्स- 100
(नोट- रिपोर्ट अनुसार यह कैमरा ट्रैप के आकड़े हैं- 3080)
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हर बार स्टेट्स ऑफ टाइगर्स रिपोर्ट में वास्तविक नंबर दिए जाते थे। इस बार ऐसा नहीं हुआ। प्रोजेक्ट टाइगर के 50 साल पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने जो आंकड़े पेश किए, वह लैंडस्कैप के अनुसार जारी किए हैं। इसमें कम से कम बाघों की संख्या दी गई है, जो वास्तविक रिपोर्ट में बढ़ सकती है। मध्यप्रदेश के प्रमुख मुख्य वनसंरक्षक (वन्यजीव) जसबीर सिंह चौहान ने कहा कि 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर विस्तृत रिपोर्ट आएगी। जो रिपोर्ट पीएम ने जारी की है, उसके अनुसार मध्यप्रदेश में बाघों की संख्या में इजाफा होने की उम्मीद बढ़ी है। अभी यह संख्या और बढ़ेगी। अभी जहां साइन (पगमार्क समेत अन्य विधियां) सर्वे हुआ है और कैमरा ट्रैप नहीं लगे हैं, वहां की संख्या भी इसमें जुड़ेगी।
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नई रिपोर्ट देखें तो सेंट्रल इंडिया लैंडस्कैप और ईस्टर्न घाट में बाघों की संख्या 2018 में 1,033 थी, जो बढ़कर 1,161 हो गई है। इस लैंडस्कैप में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, झारखंड, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश शामिल है। शुरुआती आकलन कहता है कि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र को छोड़कर अन्य राज्यों में बाघों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं हुई है। ऐसे में माना जा सकता है कि मध्यप्रदेश का टाइगर स्टेट का खिताब फिलहाल कायम रहेगा। दूसरी ओर, गोवा, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु को मिलाकर वेस्टर्न घाट लैंडस्कैप बनता है। यहां 2018 में 981 बाघ थे, जो नई रिपोर्ट के अनुसार 2022 में कम से कम 812 है।
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जटिल है रिपोर्ट, पर उम्मीद कायम
भारतीय वन सेवा के रिटायर्ड अधिकारी आरजी सोनी का कहना है कि अभी बाघों की संख्या 3600 तक पहुंच सकती है। पिछली बार भी कैमरा ट्रैप के आंकड़े के अनुसार 2400 बाघों का नंबर आया था, जो बढ़कर 2900 के करीब पहुंची थी। नई रिपोर्ट बताती है कि सेंट्रल इंडिया लैंडस्कैप में बाघों की संख्या बढ़ी है। इसमें मध्यप्रदेश का इलाका सबसे बड़ा है। यहां छह टाइगर रिजर्व हैं, जो किसी भी अन्य राज्य में नहीं है। इसी वजह से उम्मीद कायम है कि टाइगर स्टेट का खिताब हमारे पास कायम रहेगा। फिर भी रिपोर्ट जटिल है। इसमें ट्रैप कैमरे और अन्य विधियों से प्राप्त नमूनों के आधार पर नंबर दिए हैं। इस वजह से जुलाई में उलटफेर की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
बाघों का शिकार एक बड़ी चुनौती
बाघों के आवास और उनके संरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट तक में केस लड़ चुके वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे का कहना है कि हमारे यहां शिकार एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। 2022 में ही 38 बाघों की मौत हुई। कर्नाटक में हुई बाघों की मौतों से यह दोगुनी है। इस वजह से शिकार रोकना बेहद जरूरी है। टाइगर रिजर्व में जिन अधिकारियों को भेजा जाता है, उनके चयन में पारदर्शिता होनी चाहिए। इसी तरह इंसानों और बाघ के होने वाले संघर्ष को शून्य पर लाने के प्रयास बढ़ाने होंगे।
लैंडस्कैप अनुसार बाघों की संख्या
शिवालिक हिल्स एंड गंगेटिक प्लेन- 804
सेंट्रल इंडिया एंड ईस्टर्न घाट - 1161
वेस्टर्न घाट - 824
नार्थ-ईस्टर्न हिल्स् एंड ब्रह्मपुत्र प्लेन-194
सुंदरबन्स- 100
(नोट- रिपोर्ट अनुसार यह कैमरा ट्रैप के आकड़े हैं- 3080)
