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MP News: मध्य प्रदेश के बाघों को दूसरे राज्यों में भेजने से रोकें, एनटीसीए से तत्काल दखल की मांग

Sun, 19 Jan 2025 10:18 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Sun, 19 Jan 2025 10:18 PM IST
सार

मध्यप्रदेश के बाघों को ओडिशा, राजस्थान और छत्तीसगढ़ भेजने की प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियां उठाई हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई को रोकने की मांग की है। 

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MP News: Stop sending tigers of Madhya Pradesh to other states, demand immediate intervention from NTCA
सभी 10 मेल टाइगर कर रहे हैं एक दूसरे की टेरिटरी को ओवरलैप - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश के वन्यजीवों को अन्य राज्यों में भेजने की प्रक्रिया पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने इस मुद्दे पर राज्य के वन विभाग और एनटीसीए को पत्र लिखकर बाघों को ओडिशा, राजस्थान और छत्तीसगढ़ भेजने की कार्यवाही को रोकने की मांग की है। उन्होंने बाघों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। 
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शिकायत में एनटीसीए के निर्देशों पर ओडिशा में बाघों को भेजने से पहले वहां की सुरक्षा व्यवस्था और कानूनी प्रावधानों की समीक्षा करने की मांग की। यह भी उल्लेख किया कि पिछले साल ओडिशा के सिमलीपाल टाइगर रिजर्व में एक बाघ का शिकार हुआ था, जिसे लेकर चिंता जताई गई थी। इसके अलावा, 2018 में सतकोशिया टाइगर रिजर्व में भी एक बाघ का शिकार हुआ था, जो मध्य प्रदेश से भेजे गए थे।
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संजय धुबरी टाइगर रिजर्व से मादा बाघिन को ओडिशा भेजने की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि ओडिशा में बाघों की संख्या बहुत कम है और वहां शिकार की स्थिति असुरक्षित है, इसलिए बाघों को वहां भेजना खतरनाक हो सकता है। इसके अलावा भोपाल सर्किल में रातापानी के बाघों में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं हैं। बाघों में fibroma नामक बीमारी फैल रही है और एक बाघ की मौत भी हो चुकी है। इसके बावजूद वन विभाग द्वारा इस समस्या के समाधान के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए हैं।
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उन्होंने इस मामले में एनटीसीए से तत्काल दखल देने की अपील की है। वाइल्ड लाइफ एक्टविस्ट अजय दुबे ने एनटीसीए से आग्रह किया है कि वे अपने एसओपी और कानूनी प्रावधानों का पालन करते हुए बाघों को भेजने की प्रक्रिया को सुनिश्चित करें और उचित कदम उठाएं। उन्होंने पत्र के माध्यम से अधिकारियों से इस विषय पर त्वरित कार्रवाई की मांग की है, ताकि बाघों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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