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MP News: पत्नी की पिटाई करने वाले वरिष्ठ आईपीएस पुरुषोत्तम शर्मा ने मांगा वीआरएस
Thu, 08 Jun 2023 06:51 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Thu, 08 Jun 2023 06:51 PM IST
सार
वरिष्ठ आईपीएस पुरुषोत्तम शर्मा का पत्नी की पिटाई करते हुए एक वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो पर संज्ञान लेकर सरकार ने सितंबर 2020 में उन्हें सस्पेंड कर दिया था। कोर्ट ने उनके निलंबन के आदेश को निरस्त कर दिया था।
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आईपीएस पुरुषोत्तम शर्मा
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मध्य प्रदेश कैडर के 1986 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी पुरुषोत्तम शर्मा ने सरकार से वीआरएस मांगा है। शर्मा ने योग्यता के अनुसार पोस्टिंग नहीं मिलने के कारण वीआरएस की मांग की है।
बता दें सुप्रीम कोर्ट ने पुरुषोत्तम शर्मा के पक्ष में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने राज्य सरकार की कार्रवाई को निरस्त किया था। पुरुषोत्तम शर्मा का पत्नी की पिटाई करते हुए एक वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो पर संज्ञान लेकर सरकार ने सितंबर 2020 में उन्हें निलंबित कर दिया था। निलंबन के बाद शर्मा ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण में याचिका दायर की थी। जहां से मई 2022 में उनको बहाल करने के आदेश हुए थे। इस आदेश के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई थी। इसकी सुनवाई में शर्मा ने बताया कि उनके निलंबन को बिना नियमों के लगातार बढ़ाया जा रहा है।
कोर्ट की सुनवाई में अपना पक्ष रखते हुए बताया कि निलंबन की पहली अवधि छह माह होती है। इसके बाद निलंबन अवधि बढ़ाने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी की सिफारिश आवश्यक है। इस कमेटी के बिना ही सरकार उनकी निलंबन की अवधि को बढ़ाती रही, जो कि अवैधानिक है। इसके बाद कोर्ट की डबल बैंच ने प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर सरकार के निलंबन आदेश को निरस्त कर दिया। इसके बाद पुरुषोत्तम शर्मा का निलंबन निरस्त कर पीएचक्यू में स्पेशल डीजी बनाया था।
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बता दें सुप्रीम कोर्ट ने पुरुषोत्तम शर्मा के पक्ष में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने राज्य सरकार की कार्रवाई को निरस्त किया था। पुरुषोत्तम शर्मा का पत्नी की पिटाई करते हुए एक वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो पर संज्ञान लेकर सरकार ने सितंबर 2020 में उन्हें निलंबित कर दिया था। निलंबन के बाद शर्मा ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण में याचिका दायर की थी। जहां से मई 2022 में उनको बहाल करने के आदेश हुए थे। इस आदेश के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई थी। इसकी सुनवाई में शर्मा ने बताया कि उनके निलंबन को बिना नियमों के लगातार बढ़ाया जा रहा है।
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कोर्ट की सुनवाई में अपना पक्ष रखते हुए बताया कि निलंबन की पहली अवधि छह माह होती है। इसके बाद निलंबन अवधि बढ़ाने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी की सिफारिश आवश्यक है। इस कमेटी के बिना ही सरकार उनकी निलंबन की अवधि को बढ़ाती रही, जो कि अवैधानिक है। इसके बाद कोर्ट की डबल बैंच ने प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर सरकार के निलंबन आदेश को निरस्त कर दिया। इसके बाद पुरुषोत्तम शर्मा का निलंबन निरस्त कर पीएचक्यू में स्पेशल डीजी बनाया था।
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