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MP NEWS: अब पूरे प्रदेश में जल वितरण का जिम्मा एक एजेंसी को, सरकार ला रही नई व्यवस्था!
Wed, 21 May 2025 09:23 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Wed, 21 May 2025 09:23 PM IST
सार
जल संकट और वितरण में असमानता जैसी समस्याओं से निपटने के लिए मध्य प्रदेश सरकार राज्यव्यापी जल प्रबंधन को केंद्रीकृत करने की दिशा में अहम कदम उठाने जा रही है। सरकार जल्द ही एक एकीकृत एजेंसी के गठन का प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष रखने वाली है, जो पूरे प्रदेश में जल आपूर्ति की जिम्मेदारी संभालेगी।
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जल।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश सरकार अब राज्य में जल प्रबंधन और वितरण की व्यवस्था को केंद्रीकृत करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत प्रदेशभर में जल वितरण का जिम्मा एक एजेंसी को सौंपने की तैयारी है, जिसे जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए पेश किया जा सकता है। संबंधित एजेंसी को अपनी पाइपलाइन व्यवस्था और जल आपूर्ति क्षमता को जनसंख्या और क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार विकसित करना होगा। भविष्य की योजनाएं जल मांग के अनुमान और दीर्घकालिक जरूरतों के आधार पर तैयार की जाएंगी। पुरानी परियोजनाओं की क्षमता भी बढ़ाई जाएंगी, ताकि आपातकालीन स्थितियों में निर्बाध जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
अभी कई विभागों में बंटी है जिम्मेदारी
फिलहाल राज्य में जल आपूर्ति का काम नगर निगम, ग्रामीण विकास विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई), जल निगम और जल संसाधन विभाग जैसे कई अलग-अलग विभागों द्वारा किया जा रहा है। इससे जल वितरण में तालमेल की कमी, अनावश्यक देरी और संसाधनों की बर्बादी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। सरकार द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति ने इस व्यवस्था में व्यापक बदलाव की सिफारिश करते हुए सुझाव दिया है कि जल वितरण की जिम्मेदारी पूरे प्रदेश में एक एकीकृत एजेंसी को सौंपी जाए। यह एजेंसी संबंधित विभागों, निकायों और संस्थाओं को उनकी आवश्यकता के अनुसार पानी उपलब्ध कराएगी।
गुजरात मॉडल से मिली प्रेरणा
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव पी. नरहरि ने बताया कि समिति की सिफारिशों के आधार पर इस नए मॉडल को लागू करने की योजना बनाई गई है। यह व्यवस्था गुजरात राज्य के मॉडल पर आधारित है, जहां एकल एजेंसी ही समूचे राज्य में जल वितरण का काम करती है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद जल वितरण के लिए नीतिगत ढांचा तैयार किया जाएगा, जिसमें भविष्य की जल परियोजनाओं की दिशा और प्राथमिकताएं तय की जाएंगी।
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अभी कई विभागों में बंटी है जिम्मेदारी
फिलहाल राज्य में जल आपूर्ति का काम नगर निगम, ग्रामीण विकास विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई), जल निगम और जल संसाधन विभाग जैसे कई अलग-अलग विभागों द्वारा किया जा रहा है। इससे जल वितरण में तालमेल की कमी, अनावश्यक देरी और संसाधनों की बर्बादी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। सरकार द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति ने इस व्यवस्था में व्यापक बदलाव की सिफारिश करते हुए सुझाव दिया है कि जल वितरण की जिम्मेदारी पूरे प्रदेश में एक एकीकृत एजेंसी को सौंपी जाए। यह एजेंसी संबंधित विभागों, निकायों और संस्थाओं को उनकी आवश्यकता के अनुसार पानी उपलब्ध कराएगी।
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गुजरात मॉडल से मिली प्रेरणा
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव पी. नरहरि ने बताया कि समिति की सिफारिशों के आधार पर इस नए मॉडल को लागू करने की योजना बनाई गई है। यह व्यवस्था गुजरात राज्य के मॉडल पर आधारित है, जहां एकल एजेंसी ही समूचे राज्य में जल वितरण का काम करती है। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद जल वितरण के लिए नीतिगत ढांचा तैयार किया जाएगा, जिसमें भविष्य की जल परियोजनाओं की दिशा और प्राथमिकताएं तय की जाएंगी।
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