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MP News: एमपी पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों में अब रामचरितमानस के बाद गीता पाठ, बढ़ा सियासी पारा
Fri, 07 Nov 2025 06:49 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Fri, 07 Nov 2025 06:49 PM IST
सार
मध्य प्रदेश पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों में रामचरित्रमानस के बाद अब गीता का पाठ होगा। इसको लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने इसे पुलिस का भगवाकरण करने का आरोप लगाया है। वहीं, भाजपा ने पलटवार करते हुए इसे नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति से जुड़ने वाला कदम बताया है।
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एमपी पुलिस को गीता का ज्ञान
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश पुलिस के प्रशिक्षण विभाग ने अब सभी प्रशिक्षण केंद्रों में भगवद्गीता पाठ शुरू करने के निर्देश दिए हैं। प्रशिक्षण में शामिल नए पुलिसकर्मियों को गीता के पाठ से धार्मिक और नैतिक जीवन जीने की प्रेरणा मिलेगी। यह निर्देश पुलिस प्रशिक्षण के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) राजा बाबू सिंह ने राज्य के सभी आठ पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों के अधीक्षकों को दिए हैं। वर्तमान में इन केंद्रों में करीब 4,000 महिला और पुरुष प्रशिक्षु जुलाई से नौ माह की आरक्षक (कॉन्स्टेबल) ट्रेनिंग ले रहे हैं। राजा बाबू सिंह ने बताया कि गीता पाठ का उद्देश्य प्रशिक्षणार्थियों में अनुशासन, नैतिकता और धर्म के प्रति आस्था बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि “भगवद्गीता हमारा शाश्वत ग्रंथ है। इसका नियमित पाठ जीवन को सही दिशा देता है और मनुष्य को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। सिंह ने निर्देश दिया है कि भगवद्गीता का एक अध्याय रोजाना पढ़ा जा सकता है, खासकर भगवान श्रीकृष्ण के पवित्र माह (अगहन कृष्ण) में। यह पाठ प्रशिक्षुओं के दैनिक ध्यान सत्र से पहले किया जाएगा।
इससे पहले, जुलाई में प्रशिक्षण सत्र की शुरुआत पर सिंह ने सभी संस्थानों में रामचरितमानस का पाठ शुरू कराने के निर्देश दिए थे, ताकि प्रशिक्षणार्थियों में अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास हो सके। रामचरितमानस भगवान श्रीराम के जीवन, त्याग और मर्यादा की कथा पर आधारित है। बता दें कि ADG राजा बाबू सिंह, जो 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं, उन्होंने 2019 में ग्वालियर रेंज के पुलिस प्रमुख रहते हुए भी एक ऐसा ही अभियान चलाया था। उस समय उन्होंने स्थानीय जेलों में कैदियों और अन्य लोगों को गीता की प्रतियां वितरित की थीं।
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यह संविधान की भावना के खिलाफ है
वहीं, पुलिस की इस पहले पर मध्य प्रदेश कांग्रेस मीडिया कॉर्डिनेटर अभिनव बरौलिया ने कहा कि पुलिस जैसी धर्मनिरपेक्ष संस्था में धार्मिक ग्रंथों का पाठ कराना संविधान की भावना के खिलाफ है। सरकार प्रशासनिक संस्थाओं को धार्मिक रंग देने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस का काम कानून व्यवस्था बनाए रखना है, न कि धार्मिक शिक्षा देना। अब सरकार भगवद्गीता, रामचरितमानस जैसे पाठों के माध्यम से पुलिस विभाग का भगवाकरण कर रही है। इससे सरकारी संस्थाओं की निष्पक्षता पर प्रश्न उठते हैं।
इसे सकारात्मक रूप से देखना चाहिए
वहीं, भाजपा प्रवक्ता दुर्गेश केसवानी ने कहा कि भगवद्गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन के आदर्श और कर्म के सिद्धांतों को सिखाने वाला ग्रंथ है। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस प्रशिक्षण में गीता का एक अध्याय पढ़ने से अधिकारी और जवानों में अनुशासन, संयम और सत्य के प्रति निष्ठा आती है, तो इसे सकारात्मक रूप में देखा जाना चाहिए।
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इससे पहले, जुलाई में प्रशिक्षण सत्र की शुरुआत पर सिंह ने सभी संस्थानों में रामचरितमानस का पाठ शुरू कराने के निर्देश दिए थे, ताकि प्रशिक्षणार्थियों में अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास हो सके। रामचरितमानस भगवान श्रीराम के जीवन, त्याग और मर्यादा की कथा पर आधारित है। बता दें कि ADG राजा बाबू सिंह, जो 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं, उन्होंने 2019 में ग्वालियर रेंज के पुलिस प्रमुख रहते हुए भी एक ऐसा ही अभियान चलाया था। उस समय उन्होंने स्थानीय जेलों में कैदियों और अन्य लोगों को गीता की प्रतियां वितरित की थीं।
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यह संविधान की भावना के खिलाफ है
वहीं, पुलिस की इस पहले पर मध्य प्रदेश कांग्रेस मीडिया कॉर्डिनेटर अभिनव बरौलिया ने कहा कि पुलिस जैसी धर्मनिरपेक्ष संस्था में धार्मिक ग्रंथों का पाठ कराना संविधान की भावना के खिलाफ है। सरकार प्रशासनिक संस्थाओं को धार्मिक रंग देने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस का काम कानून व्यवस्था बनाए रखना है, न कि धार्मिक शिक्षा देना। अब सरकार भगवद्गीता, रामचरितमानस जैसे पाठों के माध्यम से पुलिस विभाग का भगवाकरण कर रही है। इससे सरकारी संस्थाओं की निष्पक्षता पर प्रश्न उठते हैं।
इसे सकारात्मक रूप से देखना चाहिए
वहीं, भाजपा प्रवक्ता दुर्गेश केसवानी ने कहा कि भगवद्गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन के आदर्श और कर्म के सिद्धांतों को सिखाने वाला ग्रंथ है। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस प्रशिक्षण में गीता का एक अध्याय पढ़ने से अधिकारी और जवानों में अनुशासन, संयम और सत्य के प्रति निष्ठा आती है, तो इसे सकारात्मक रूप में देखा जाना चाहिए।
