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MP News: होम्योपैथी क्लीनिकों के लिए खत्म हुई MPPCB सर्टिफिकेट की अनिवार्यता,रजिस्ट्रेशन-रिन्यूअल अब होगा आसान
Thu, 16 Apr 2026 04:08 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Thu, 16 Apr 2026 04:08 PM IST
सार
होम्योपैथी क्लीनिकों के लिए MPPCB सर्टिफिकेट की अनिवार्यता खत्म होने से प्रदेश के चिकित्सकों को बड़ी राहत मिली है। अब रजिस्ट्रेशन और रिन्यूअल की प्रक्रिया सरल, तेज और कम खर्चीली होगी, जिससे खासतौर पर छोटे और ग्रामीण क्लीनिकों को संचालन में सहूलियत मिलेगी।
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होम्योपैथी स्वास्थ्य कल्याण केन्द्र भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रदेश के हजारों होम्योपैथी चिकित्सकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने होम्योपैथी क्लीनिकों के लिए एमपीपीसीबी (Madhya Pradesh Pollution Control Board) सर्टिफिकेट की अनिवार्यता में छूट देने का फैसला किया है। यह निर्णय उन रिपोर्ट्स के आधार पर लिया गया है, जिनमें साफ किया गया कि इन क्लीनिकों से बायोमेडिकल वेस्ट का उत्पादन नहीं होता।
पहले क्या था नियम?
अब तक प्रदेश में होम्योपैथी क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टरों को भी अन्य चिकित्सा संस्थानों की तरह एमपीपीसीबी सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य था। इसके बिना न तो क्लीनिक का रजिस्ट्रेशन हो पाता था और न ही उसका नवीनीकरण। इस प्रक्रिया में समय और कागजी कार्रवाई ज्यादा होने से चिकित्सकों को परेशानी का सामना करना पड़ता था।
अब क्या बदलाव किया गया है?
नए आदेश के अनुसार, होम्योपैथी क्लीनिकों के लिए एमपीपीसीबी सर्टिफिकेट की अनिवार्यता में राहत दी गई है। यानी अब रजिस्ट्रेशन और रिन्यूअल की प्रक्रिया में यह शर्त बाध्यकारी नहीं रहेगी। इससे ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण की प्रक्रिया आसान और तेज हो जाएगी।
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यह है निर्णय का आधार
राज्य होम्योपैथी काउंसिल और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्तर पर यह स्पष्ट किया गया कि होम्योपैथी क्लीनिकों में ऐसा कोई बायोमेडिकल वेस्ट उत्पन्न नहीं होता, जिसके लिए सख्त प्रदूषण नियंत्रण अनुमति जरूरी हो। इसी आधार पर यह छूट दी गई है।
यह भी पढ़ें-345 विधानसभा सीटें और 43 लोकसभा सीटें, 33% महिला आरक्षण से बदलेगा पूरा समीकरण
चिकित्सकों को होगा फायदा
- रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण की प्रक्रिया सरल होगी
- अनावश्यक दस्तावेजों और अनुमति से राहत मिलेगी
- समय और खर्च दोनों की बचत होगी
- छोटे और ग्रामीण क्षेत्रों में क्लीनिक चलाने में सहूलियत बढ़ेगी
यह भी पढ़ें-एमपी में 42 डिग्री पार पहुंचा पारा, आज 16 जिलों में लू का अलर्ट, अगले चार दिन और झुलसाएंगे
राजनीतिक और संगठनात्मक प्रयास भी रहे अहम
इस मुद्दे को उठाने और समाधान तक पहुंचाने में भारतीय जनता पार्टी चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रयास भी सामने आए। प्रदेश संयोजक डॉ. विशाल बघेल की पहल और लगातार फॉलोअप के बाद यह निर्णय संभव हो पाया। जिला सह-संयोजक डॉ. हरेंद्र सिंह भदौरिया ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय सामूहिक प्रयासों का परिणाम है और इससे चिकित्सकों को अनावश्यक प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी।
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पहले क्या था नियम?
अब तक प्रदेश में होम्योपैथी क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टरों को भी अन्य चिकित्सा संस्थानों की तरह एमपीपीसीबी सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य था। इसके बिना न तो क्लीनिक का रजिस्ट्रेशन हो पाता था और न ही उसका नवीनीकरण। इस प्रक्रिया में समय और कागजी कार्रवाई ज्यादा होने से चिकित्सकों को परेशानी का सामना करना पड़ता था।
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अब क्या बदलाव किया गया है?
नए आदेश के अनुसार, होम्योपैथी क्लीनिकों के लिए एमपीपीसीबी सर्टिफिकेट की अनिवार्यता में राहत दी गई है। यानी अब रजिस्ट्रेशन और रिन्यूअल की प्रक्रिया में यह शर्त बाध्यकारी नहीं रहेगी। इससे ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण की प्रक्रिया आसान और तेज हो जाएगी।
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यह है निर्णय का आधार
राज्य होम्योपैथी काउंसिल और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्तर पर यह स्पष्ट किया गया कि होम्योपैथी क्लीनिकों में ऐसा कोई बायोमेडिकल वेस्ट उत्पन्न नहीं होता, जिसके लिए सख्त प्रदूषण नियंत्रण अनुमति जरूरी हो। इसी आधार पर यह छूट दी गई है।
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चिकित्सकों को होगा फायदा
- रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण की प्रक्रिया सरल होगी
- अनावश्यक दस्तावेजों और अनुमति से राहत मिलेगी
- समय और खर्च दोनों की बचत होगी
- छोटे और ग्रामीण क्षेत्रों में क्लीनिक चलाने में सहूलियत बढ़ेगी
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राजनीतिक और संगठनात्मक प्रयास भी रहे अहम
इस मुद्दे को उठाने और समाधान तक पहुंचाने में भारतीय जनता पार्टी चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रयास भी सामने आए। प्रदेश संयोजक डॉ. विशाल बघेल की पहल और लगातार फॉलोअप के बाद यह निर्णय संभव हो पाया। जिला सह-संयोजक डॉ. हरेंद्र सिंह भदौरिया ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय सामूहिक प्रयासों का परिणाम है और इससे चिकित्सकों को अनावश्यक प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी।
