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MP News: मंत्री जायसवाल बोले- पीएम विश्वकर्मा योजना में प्रदेश अग्रणी राज्यों में, 48 हजार को मिला ऋण
Sat, 27 Dec 2025 08:47 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Sat, 27 Dec 2025 08:47 PM IST
सार
कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री दिलीप जायसवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है, जहां पिछले दो वर्षों में 48 हजार से अधिक ऋण प्रकरण स्वीकृत और वितरित किए गए। विभाग ने कौशल प्रशिक्षण, ई-वाउचर, टूल-किट वितरण और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कारीगरों और बुनकरों को रोजगार और बाजार उपलब्ध कराए।
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मंत्री दिलीप जायसवाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। योजना के तहत राज्य ने ऋण प्रकरणों की स्वीकृति में चौथा और वितरण में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। पिछले दो वर्षों में 48,063 ऋण प्रकरणों के लिए 436.34 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए और 42,559 प्रकरणों के लिए 378.06 करोड़ रुपये वितरित किए गए। राज्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार हस्तशिल्प और हैंडलूम उत्पादों को ब्रॉण्ड मृगनयनी, विंध्या वैली, कबीरा और प्राकृत के माध्यम से प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों और धार्मिक केंद्रों में प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही इंदौर में आयोजित साड़ी वॉकथान जैसे कार्यक्रमों के जरिए पारंपरिक वस्त्र पहनने की संस्कृति को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
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विभाग ने 2,16,013 हितग्राहियों को कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया, 85,536 को टूल-किट और 2,45,513 को ई-वाउचर वितरित किए। हाथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास निगम और खादी बोर्ड द्वारा 65 करोड़ रुपये से अधिक के विक्रय एम्पोरियम और प्रदर्शनियों का आयोजन किया गया। डिण्डोरी के रॉट आयरन, उज्जैन के बटिक प्रिंट, ग्वालियर के कालीन शिल्प, बालाघाट के बारासिवनी हाथकरघा साड़ी और जबलपुर के पत्थर शिल्प को जीआई टैग प्रदान किया गया। राज्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में मलबरी पौध-रोपण और टसर कोकून उत्पादन के माध्यम से 5,451 किसानों को लाभ पहुंचाया गया। इसके अलावा 1015.21 लाख रुपये का खादी उत्पादन किया गया और 650 बुनकरों तथा कारीगरों को रोजगार से जोड़ा गया।
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कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग ने नवाचारों के माध्यम से उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा दिया है। “एक जिला-एक उत्पाद” योजना के तहत जरी-जरजोदी, जूट, लकड़ी के खिलौने, बाग प्रिंट, चंदेरी साड़ी, दतिया गुड़ और उज्जैन के बटिक प्रिंट को लोकप्रिय बनाया गया। मृगनयनी एम्पोरियम द्वारा बंगलुरु, हैदराबाद, गोवा और कोलकाता में प्रदर्शनी आयोजित की गई। विभाग ने डिजिटलीकरण और ईआरपी सॉफ्टवेयर के माध्यम से उत्पादन, विपणन और विकास गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया है। इसके अलावा डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के जरिए कारीगरों के उत्पादों का प्रचार किया जा रहा है।
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विभाग ने 2,16,013 हितग्राहियों को कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया, 85,536 को टूल-किट और 2,45,513 को ई-वाउचर वितरित किए। हाथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास निगम और खादी बोर्ड द्वारा 65 करोड़ रुपये से अधिक के विक्रय एम्पोरियम और प्रदर्शनियों का आयोजन किया गया। डिण्डोरी के रॉट आयरन, उज्जैन के बटिक प्रिंट, ग्वालियर के कालीन शिल्प, बालाघाट के बारासिवनी हाथकरघा साड़ी और जबलपुर के पत्थर शिल्प को जीआई टैग प्रदान किया गया। राज्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में मलबरी पौध-रोपण और टसर कोकून उत्पादन के माध्यम से 5,451 किसानों को लाभ पहुंचाया गया। इसके अलावा 1015.21 लाख रुपये का खादी उत्पादन किया गया और 650 बुनकरों तथा कारीगरों को रोजगार से जोड़ा गया।
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कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग ने नवाचारों के माध्यम से उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा दिया है। “एक जिला-एक उत्पाद” योजना के तहत जरी-जरजोदी, जूट, लकड़ी के खिलौने, बाग प्रिंट, चंदेरी साड़ी, दतिया गुड़ और उज्जैन के बटिक प्रिंट को लोकप्रिय बनाया गया। मृगनयनी एम्पोरियम द्वारा बंगलुरु, हैदराबाद, गोवा और कोलकाता में प्रदर्शनी आयोजित की गई। विभाग ने डिजिटलीकरण और ईआरपी सॉफ्टवेयर के माध्यम से उत्पादन, विपणन और विकास गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया है। इसके अलावा डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के जरिए कारीगरों के उत्पादों का प्रचार किया जा रहा है।
