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MP News: लाड़ली लक्ष्मी उत्सव में बेटियों के साथ पौधे लगाकर बोले मुख्यमंत्री- "बेटियां ही हैं हमारी महालक्ष्मी
Fri, 02 May 2025 10:19 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Fri, 02 May 2025 10:19 PM IST
सार
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2007 में शुरू की गई मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना के माध्यम से अब तक प्रदेश की 50 लाख 45 हजार से अधिक बालिकाएं योजना से जुड़ चुकी हैं। इनमें से 12.85 लाख बेटियों को छात्रवृत्ति के रूप में 648 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है।
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सीएम लाड़ली लक्ष्मियों के साथ पौधरोपण किया
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश में शुक्रवार को ‘लाड़ली लक्ष्मी उत्सव’ उत्साह और संकल्प के साथ मनाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में कार्यक्रम के दौरान प्रदेश की बेटियों के साथ पौधारोपण कर इस विशेष दिन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि बेटियां केवल परिवार की नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की धुरी हैं। "बेटियां ही हमारी महालक्ष्मी हैं और उनकी सुरक्षा, शिक्षा व आत्मनिर्भरता के लिए हमारी सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी बच्चियों को लाड़ली लक्ष्मी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे पढ़-लिखकर अपने जीवन को संवारें और आत्मनिर्भर बनें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार उनके हर सपने को पूरा करने में मदद करेगी और हर कदम पर उनके साथ खड़ी रहेगी।
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‘एक बेटी, एक पौधा’ का दिया संदेश
मुख्यमंत्री ने आंवला, आम, संतरा और नींबू के पौधे बेटियों के साथ मिलकर लगाए और कहा कि प्रत्येक माता-पिता को अपनी बेटी के नाम एक पौधा जरूर लगाना चाहिए और उसकी परवरिश उसी तरह करनी चाहिए जैसे अपने बच्चों की करते हैं। यह अभियान सिर्फ पर्यावरण की चिंता नहीं, बेटियों के उज्जवल भविष्य का प्रतीक है।
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50 लाख से अधिक बेटियां बनीं ‘लाड़ली’
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2007 में शुरू की गई मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना के माध्यम से अब तक प्रदेश की 50 लाख 45 हजार से अधिक बालिकाएं योजना से जुड़ चुकी हैं। इनमें से 12.85 लाख बेटियों को छात्रवृत्ति के रूप में 648 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है।
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लाड़ली लक्ष्मी योजना: बच्चियों के भविष्य की आर्थिक ढाल
लाड़ली लक्ष्मी योजना बालिका शिक्षा और सुरक्षा की दिशा में सरकार की एक बड़ी पहल है। योजना के तहत बालिकाओं को कक्षा 6, 9, 11 और 12 में क्रमशः 2000, 4000, 6000 और 6000 रुपये की छात्रवृत्ति मिलती है। 12वीं के बाद उच्च शिक्षा के लिए 25,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दो किश्तों में दी जाती है। साथ ही 21 वर्ष की आयु पूरी करने और वैध आयु में विवाह के बाद, लाभार्थी को एकमुश्त 1 लाख रुपये दिए जाते हैं।
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योजना को कानूनी आधार देने के लिए अधिनियम लागू
सरकार ने वर्ष 2018 में ‘लाड़ली लक्ष्मी (बालिका प्रोत्साहन) अधिनियम’ लागू कर योजना को कानूनी मजबूती दी, जिससे बालिकाओं को मिलने वाले लाभ की गारंटी सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही योजना के विस्तार स्वरूप लाड़ली लक्ष्मी 2.0 भी शुरू की गई, जिसमें बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए अधिक अवसर और सहायता दी जाती है।
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‘एक बेटी, एक पौधा’ का दिया संदेश
मुख्यमंत्री ने आंवला, आम, संतरा और नींबू के पौधे बेटियों के साथ मिलकर लगाए और कहा कि प्रत्येक माता-पिता को अपनी बेटी के नाम एक पौधा जरूर लगाना चाहिए और उसकी परवरिश उसी तरह करनी चाहिए जैसे अपने बच्चों की करते हैं। यह अभियान सिर्फ पर्यावरण की चिंता नहीं, बेटियों के उज्जवल भविष्य का प्रतीक है।
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50 लाख से अधिक बेटियां बनीं ‘लाड़ली’
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2007 में शुरू की गई मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना के माध्यम से अब तक प्रदेश की 50 लाख 45 हजार से अधिक बालिकाएं योजना से जुड़ चुकी हैं। इनमें से 12.85 लाख बेटियों को छात्रवृत्ति के रूप में 648 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है।
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लाड़ली लक्ष्मी योजना: बच्चियों के भविष्य की आर्थिक ढाल
लाड़ली लक्ष्मी योजना बालिका शिक्षा और सुरक्षा की दिशा में सरकार की एक बड़ी पहल है। योजना के तहत बालिकाओं को कक्षा 6, 9, 11 और 12 में क्रमशः 2000, 4000, 6000 और 6000 रुपये की छात्रवृत्ति मिलती है। 12वीं के बाद उच्च शिक्षा के लिए 25,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दो किश्तों में दी जाती है। साथ ही 21 वर्ष की आयु पूरी करने और वैध आयु में विवाह के बाद, लाभार्थी को एकमुश्त 1 लाख रुपये दिए जाते हैं।
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योजना को कानूनी आधार देने के लिए अधिनियम लागू
सरकार ने वर्ष 2018 में ‘लाड़ली लक्ष्मी (बालिका प्रोत्साहन) अधिनियम’ लागू कर योजना को कानूनी मजबूती दी, जिससे बालिकाओं को मिलने वाले लाभ की गारंटी सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही योजना के विस्तार स्वरूप लाड़ली लक्ष्मी 2.0 भी शुरू की गई, जिसमें बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए अधिक अवसर और सहायता दी जाती है।
