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Bhopal: डीएमई की नियुक्ति पर छिड़ा विवाद, डॉक्टर बोले- 24 घंटे में का आदेश वापस नहीं लिया गया तो होगा आंदोलन
Fri, 02 May 2025 07:49 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Fri, 02 May 2025 07:49 PM IST
सार
डॉ. अरुणा कुमार को चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन (DME) बनाए जाने पर विवाद छिड़ गया है। जूनियर और सीनियर डॉक्टर विरोध में उतर आए हैं। 24 घंटे में आदेश वापस नहीं लेने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
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डॉ. अरुणा कुमार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पहले से विवादों में रही डॉ. अरुणा कुमार को चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन (DME) बनाए जाने पर एक बार फिर से विवाद छिड़ गया है। जूनियर और सीनियर डॉक्टर विरोध में उतर आए हैं। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जूडा) और मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (एमटीए) ने इस नियुक्ति का विरोध करते हुए सरकार को 24 घंटे में आदेश निरस्त करने की चेतावनी दी है। दोनों संगठनों ने चेतावनी दी है कि पुनर्विचार नहीं हुआ तो सभी आंदोलन करेंगे ।
प्रशासनिक व्यवहार पूर्व में विवादास्पद रहा
डॉ. अरूणा कुमार की नियुक्ति के विरोध में सबसे पहले जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने गुरुवार को ही उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल को पत्र भेजकर इस निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की। जूडा ने आरोप लगाया कि डॉ. कुमार का प्रशासनिक व्यवहार पूर्व में विवादास्पद रहा है, जिससे कॉलेजों का शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हुआ है। जूडा ने मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (एमटीए) को पत्र लिखकर समर्थन भी मांगा। उन्होंने पत्र में लिखा कि डॉ. कुमार के कार्यकाल में एक महिला जूनियर डॉक्टर ने मानसिक प्रताड़ना के चलते आत्महत्या का कदम उठाया था। इससे पूर्व भी उनके रवैये को लेकर कॉलेज परिसर में तनाव की स्थिति बन चुकी है।
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बुलाई आपात बैठक, नियुक्ति रद्द करने की मांग
जूडा के पत्र के बाद एमटीए ने शुक्रवार को एग्जीक्यूटिव बॉडी की आपात बैठक बुलाई। इसमें डॉ. राकेश मालवीय, डॉ. अविनाश ठाकुर और डॉ. कविता कुमार सहित अन्य पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में निर्णय लिया गया कि डॉ. अरुणा कुमार की नियुक्ति छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के हितों के विपरीत है और सरकार को इसे 24 घंटे में निरस्त करना चाहिए। एमटीए ने उपमुख्यमंत्री को भेजे पत्र में लिखा है कि जब डॉ. कुमार हमीदिया अस्पताल में स्त्री रोग विभागाध्यक्ष थीं, तब उनके रवैये से असंतोष इतना बढ़ा कि कई डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया और महिला चिकित्सकों ने सामूहिक त्यागपत्र की चेतावनी तक दे दी थी। साथ ही दो बार जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल भी उन्हीं के कार्यकाल में हुई थी।पत्र में एक महिला जूनियर डॉक्टर के कमरे में चोरी की घटना और उसके बाद डॉ. कुमार के व्यवहार पर उठे सवालों का भी उल्लेख है। इतना ही नहीं, एक छात्रा द्वारा आत्महत्या करने के मामले में भी उनके खिलाफ मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगे थे।
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चिकित्सा शिक्षा की गरिमा के खिलाफ
जूडा ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार जल्द कोई निर्णय नहीं लेती, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। एसोसिएशन ने इस नियुक्ति को छात्रहित और चिकित्सा शिक्षा की गरिमा के खिलाफ बताया है। ज्ञापन में जूडा के अध्यक्ष डॉ. कुलदीप गुप्ता, उपाध्यक्ष डॉ. निखिल अग्रवाल और महासचिव डॉ. अंकित स्वामी समेत अन्य पदाधिकारियों के हस्ताक्षर हैं।
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प्रशासनिक व्यवहार पूर्व में विवादास्पद रहा
डॉ. अरूणा कुमार की नियुक्ति के विरोध में सबसे पहले जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने गुरुवार को ही उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल को पत्र भेजकर इस निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की। जूडा ने आरोप लगाया कि डॉ. कुमार का प्रशासनिक व्यवहार पूर्व में विवादास्पद रहा है, जिससे कॉलेजों का शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हुआ है। जूडा ने मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (एमटीए) को पत्र लिखकर समर्थन भी मांगा। उन्होंने पत्र में लिखा कि डॉ. कुमार के कार्यकाल में एक महिला जूनियर डॉक्टर ने मानसिक प्रताड़ना के चलते आत्महत्या का कदम उठाया था। इससे पूर्व भी उनके रवैये को लेकर कॉलेज परिसर में तनाव की स्थिति बन चुकी है।
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बुलाई आपात बैठक, नियुक्ति रद्द करने की मांग
जूडा के पत्र के बाद एमटीए ने शुक्रवार को एग्जीक्यूटिव बॉडी की आपात बैठक बुलाई। इसमें डॉ. राकेश मालवीय, डॉ. अविनाश ठाकुर और डॉ. कविता कुमार सहित अन्य पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में निर्णय लिया गया कि डॉ. अरुणा कुमार की नियुक्ति छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के हितों के विपरीत है और सरकार को इसे 24 घंटे में निरस्त करना चाहिए। एमटीए ने उपमुख्यमंत्री को भेजे पत्र में लिखा है कि जब डॉ. कुमार हमीदिया अस्पताल में स्त्री रोग विभागाध्यक्ष थीं, तब उनके रवैये से असंतोष इतना बढ़ा कि कई डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया और महिला चिकित्सकों ने सामूहिक त्यागपत्र की चेतावनी तक दे दी थी। साथ ही दो बार जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल भी उन्हीं के कार्यकाल में हुई थी।पत्र में एक महिला जूनियर डॉक्टर के कमरे में चोरी की घटना और उसके बाद डॉ. कुमार के व्यवहार पर उठे सवालों का भी उल्लेख है। इतना ही नहीं, एक छात्रा द्वारा आत्महत्या करने के मामले में भी उनके खिलाफ मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगे थे।
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चिकित्सा शिक्षा की गरिमा के खिलाफ
जूडा ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार जल्द कोई निर्णय नहीं लेती, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। एसोसिएशन ने इस नियुक्ति को छात्रहित और चिकित्सा शिक्षा की गरिमा के खिलाफ बताया है। ज्ञापन में जूडा के अध्यक्ष डॉ. कुलदीप गुप्ता, उपाध्यक्ष डॉ. निखिल अग्रवाल और महासचिव डॉ. अंकित स्वामी समेत अन्य पदाधिकारियों के हस्ताक्षर हैं।
