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MP News: भोपाल में पुलिस अधीक्षकों ने सीखे लोक प्रबंधन के गुर, पुरस्कार वही जो उपयोगी हो

Sat, 15 Oct 2022 11:34 AM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: रवींद्र भजनी Updated Sat, 15 Oct 2022 11:34 AM IST
सार

भोपाल में पुलिस अधिकारियों को लोक प्रबंधन के गुर सिखाने के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान उन्हें बताया गया कि पुरस्कार वही देना चाहिए जो उपयोगी हो।

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MP News: In Bhopal, the superintendents of police learned the tricks of public management, the award is only u
भोपाल में पुलिस अधिकारियों के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पुलिस अधिकारियों के दैनिक जीवन में सफल लोक प्रबंधन और किसी विशेष परियोजनाओं के संचालन के दौरान अपनी टीम को इकट्ठा करने, नेतृत्व करने और सशक्त बनाने में उनके व्यवहार और नेतृत्व कौशल एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पुलिस अधिकारियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी और पुलिस मुख्यालय भोपाल ने अपर पुलिस अधीक्षकों के कौशल को मज़बूत करने के लिए लोक प्रबंधन विषय पर प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया। यह प्रशिक्षण सत्र पुलिस अधिकारियों के मिड करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम का एक हिस्सा था। इस सत्र में नवीन कृष्ण राय, प्रबंधक, सरकारी मामले, आईआईएम इंदौर ने प्रतिभागियों को संबोधित किया।

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इस सत्र में नवीन ने प्रतिभागियों को लोक प्रबंधन के महत्वपूर्ण पहलुओं से परिचित कराया। इसमें प्रबंधन के सिद्धांतों और मॉडलों के माध्यम से व्यक्ति की स्वयं की टीम, विभाग या संगठन के भीतर और बाहर के लोगों को मैनेज करने के तरीकों पर चर्चा की। यह भी समझने का प्रयास किया गया कि सामान्यतः लोग अपने निर्णय कैसे लेते हैं। लोगों के निर्णय लेने पर बात करने के लिए स्कीमा सिद्धांत की मदद ली गई। इसके अनुसार लोगों की अपनी धारणाएं होती हैं जिसका निर्माण वे अपने जन्म के बाद अपने आस-पास के लोगों और चीजों को देखकर करते हैं। लोग ऐसी नई चीजों और जानकारियों का विरोध करते हैं जो उनकी अपनी धारणाओं के विपरीत होती हैं। प्रतिभागियों को प्रॉस्पेक्ट सिद्धांत की मदद से बताया गया कि लोग लाभ और हानि को अलग-अलग महत्व देते हैं। किसी लाभ से मिली खुशी उतने ही हानि से हुए दुख से कम होती है।
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किसी के संगठन के भीतर लोगों के प्रबंधन के लिए हाइजेनबर्ग टू-फैक्टर थ्योरी, एक्सपेक्टेंसी थ्योरी ऑफ मोटिवेशन और सिचुएशनल लीडरशिप सिद्धांत जैसे मोटिवेशन के सिद्धांतों पर भी चर्चा की गई। प्रतिभागियों को सलाह दी गई कि वे हाइजीन फेक्टर के महत्व को समझें और यह सुनिश्चित करें कि किसी व्यक्ति को प्रेरित करने के लिए पुरस्कृत करते समय यह ध्यान रखें कि उस व्यक्ति को मिलने वाले पुरस्कार की उस व्यक्ति की नजरों में कितना मूल्य और उपयोगिता है। संगठन या टीम के बाहर के लोगों के प्रबंधन के लिए ओवरटोन विंडो और ब्रिज एक्स्पेरिमेंट जैसी आवश्यक अवधारणाओं पर प्रकाश डाला गया।

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