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MP-महाराष्ट्र के बीच ताप्ती बेसिन पर समझौता: 20 हजार करोड़ की परियोजना से बदलेगा सिंचाई और व्यापार का नक्शा
Sat, 10 May 2025 08:53 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, भोपाल, मध्य प्रदेश
न्यूज डेस्क, भोपाल, मध्य प्रदेश
Published by: आनंद पवार
Updated Sat, 10 May 2025 08:53 PM IST
सार
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच जल प्रबंधन और क्षेत्रीय विकास को लेकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। भोपाल में शनिवार को दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने ताप्ती बेसिन मेगा ग्राउंड वॉटर रीचार्ज परियोजना पर समझौता किया, जो न केवल सिंचाई और भूजल सुधार के लिहाज से, बल्कि आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग के नए रास्ते खोलने वाला साबित होगा।
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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भोपाल में शनिवार को मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच ताप्ती बेसिन परियोजना को लेकर एक ऐतिहासिक समझौता हुआ। यह परियोजना दुनिया की सबसे बड़ी ग्राउंड वॉटर रिचार्ज परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों डॉ. मोहन यादव और देवेंद्र फडणवीस ने इस बहुप्रतीक्षित परियोजना पर एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इससे भूजल स्तर सुधरेगा और सिंचाई बेहतर होगी। हम महाराष्ट्र से जुड़कर अपनी पुरानी विरासत को जीवित करेंगे। महाराष्ट्र बंदरगाहों से व्यापार बढ़ाएंगे। जबलपुर से नागपुर तक डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनाया जाएगा।
25 साल बाद फिर हुई अंतरराज्यीय बैठक
देवेंद्र फडणवीस ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताया और कहा कि 5 साल बाद आज अंतरराज्यीय नियंत्रण बोर्ड की मीटिंग हुई। उन्होंने ताप्ती बेसिन परियोजना को लेकर कहा कि यह न केवल सिंचाई के लिहाज से बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को गति देने वाली साबित होगी। उन्होंने बताया कि करीब 2 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को इस परियोजना से लाभ मिलेगा और खारे पानी की समस्या का समाधान भी होगा। उन्होंने इसे दुनिया के अनूठे जल प्रबंधन प्रयासों में से एक बताया और कहा कि अब केंद्र सरकार से भी इस परियोजना के लिए सहायता मांगी जाएगी।
केंद्र सरकार देगी 90% लागत
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस एमओयू को दोनों राज्यों के बीच सहयोग का नया अध्याय बताया। परियोजना पर 20 हजार करोड़ रुपए लागत आएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस परियोजना की 90 प्रतिशत लागत वहन करेगी। वहीं, दोनों राज्य 5-5 प्रतिशत राशि लगाएंगे। साथ ही यह भी बताया कि मध्य प्रदेश नदियों की भूमि है और यहां से निकलने वाली नदियों से कई राज्यों को लाभ मिलता है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का आभार जताते हुए कहा कि इस परियोजना की नींव उन्हीं के कार्यकाल में पड़ी थी। यह परियोजना ताप्ती नदी के बाढ़ के पानी को दो चट्टानों के बीच स्थित 250 वर्ग किमी के प्राकृतिक बजाड़ा जोन में भूमिगत स्टोर करेगी। यह भू-वैज्ञानिक संरचना जल संरक्षण के लिए उपयुक्त मानी जाती है और इससे 50 किलोमीटर के दायरे में हर साल भूजल स्तर में लगभग 2 मीटर तक वृद्धि संभव होगी।
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धार्मिक पर्यटन का सर्किट बनाएंगे
सीएम ने कहा कि तापी बेसिन मेगा रीचार्ज प्रोजेक्ट प्राकृतिक है। पूरे विश्व में इससे अच्छा प्रोजेक्ट कहीं नहीं है। पानी की कमी से कई लोगों को कष्ट था। मुझे इस बात की खुशी है कि ये प्रोजेक्ट पूरे निमाड़ के लिए जीवन रेखा का काम करेगा। इससे भूजल स्तर सुधरेगा और सिंचाई बेहतर होगी। हम महाराष्ट्र से जुड़कर अपनी पुरानी विरासत को जीवित करेंगे। महाराष्ट्र बंदरगाहों से व्यापार बढ़ाएंगे। जबलपुर से नागपुर तक डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनाया जाएगा। इससे लागत मे बचत होगी। सीएम डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर को नासिक के त्र्यंबकेश्वर, भीमाशंकर और घृष्णेश्वर से जोड़कर धार्मिक पर्यटन का सर्किट बनाएंगे।
20 को इंदौर में कैबिनेट, 31 को भोपाल में कार्यक्रम
दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच जाम घाट परियोजना, जबलपुर-महाराष्ट्र सड़क संपर्क, ज्योतिर्लिंगों को जोड़ने और ऐतिहासिक शख्सियतों से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा आगामी बैठकों और आयोजनों की रूपरेखा भी तय की गई, जिनमें 20 मई को इंदौर में कैबिनेट बैठक और 31 मई को भोपाल में एक प्रमुख कार्यक्रम शामिल है।
"अब जल समझौता होगा व्यावहारिक"-सीएम मोहन
डॉ. मोहन यादव ने बीते वर्षों की असफलताओं पर टिप्पणी करने से परहेज करते हुए कहा कि अब दोनों राज्यों के बीच जल वितरण का संतुलित और व्यावहारिक समाधान निकलेगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग में संतुलन जरूरी है और इस दिशा में यह परियोजना एक मील का पत्थर साबित होगी।
एमपी के इतने जिलों को फायदा
तापी बेसिन मेगा रीचार्ज परियोजना विश्व की सबसे बड़ी ग्राउंड रिचार्ज परियोजना है। इस परियोजना को राष्ट्रीय जल परियोजना घोषित कराने के लिए केंद्र सरकार से चर्चा की जाएगी। इस मेगा रिचार्ज योजना में 31.13 टीएमसी पानी का उपयोग होगा। इसमें से 11.76 टीएमसी मध्यप्रदेश को और 19.36 टीएमसी पानी महाराष्ट्र के हिस्से में आएगा। इस प्रोजेक्ट से मध्यप्रदेश के 1 लाख 23 हजार 82 हैक्टेयर और महाराष्ट्र के 2 लाख 34 हजार 706 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी। इससे प्रदेश के बुरहानपुर-खण्डवा जिले की बुरहानपुर, नेपानगर, खकनार एवं खालवा की 4 तहसीलें लाभान्वित होंगी।
चार जल संरचनाएं प्रस्तावित
- खरिया गुटीघाट बांध स्थल पर लो डायवर्सन वियर :- यह वियर दोनों राज्यों की सीमा पर मध्य प्रदेश की खंडवा जिले की खालवा तहसील एवं महाराष्ट्र की अमरावती तहसील में प्रस्तावित है. इसकी जल भराव क्षमता 8.31 टीएमसी प्रस्तावित है।
- दाई तट नहर प्रथम चरण :- प्रस्तावित खरिया गुटीघाट वियर क़े दाएं तट से 221 किलोमीटर लंबी नहर प्रस्तावित है, जो मध्य प्रदेश में 110 किलोमीटर बनेगी. इस नहर से मध्य प्रदेश के 55 हज़ार 89 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी।
- बाई तट नहर प्रथम चरण :- प्रस्तावित खरिया गुटीघाट वियर के बाएं तट से 135.64 किलोमीटर लंबी
- नहर प्रस्तावित है जो मध्यप्रदेश में 100.42 किलोमीटर बनेगी। इस नहर से मध्यप्रदेश के 44 हज़ार 993 हेक्टर क्षेत्र में सिंचाई प्रस्तावित है।
- बाईं तट नहर द्वितीय चरण :- यह नहर बाईं तट नहर प्रथम चरण के आर डी 90.89 कि मी से 14 किलोमीटर लम्बी टनल के माध्यम से प्रवाहित होगी. इसकी लंबाई 123.97 किलोमीटर होगी।
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25 साल बाद फिर हुई अंतरराज्यीय बैठक
देवेंद्र फडणवीस ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताया और कहा कि 5 साल बाद आज अंतरराज्यीय नियंत्रण बोर्ड की मीटिंग हुई। उन्होंने ताप्ती बेसिन परियोजना को लेकर कहा कि यह न केवल सिंचाई के लिहाज से बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को गति देने वाली साबित होगी। उन्होंने बताया कि करीब 2 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को इस परियोजना से लाभ मिलेगा और खारे पानी की समस्या का समाधान भी होगा। उन्होंने इसे दुनिया के अनूठे जल प्रबंधन प्रयासों में से एक बताया और कहा कि अब केंद्र सरकार से भी इस परियोजना के लिए सहायता मांगी जाएगी।
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केंद्र सरकार देगी 90% लागत
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस एमओयू को दोनों राज्यों के बीच सहयोग का नया अध्याय बताया। परियोजना पर 20 हजार करोड़ रुपए लागत आएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस परियोजना की 90 प्रतिशत लागत वहन करेगी। वहीं, दोनों राज्य 5-5 प्रतिशत राशि लगाएंगे। साथ ही यह भी बताया कि मध्य प्रदेश नदियों की भूमि है और यहां से निकलने वाली नदियों से कई राज्यों को लाभ मिलता है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का आभार जताते हुए कहा कि इस परियोजना की नींव उन्हीं के कार्यकाल में पड़ी थी। यह परियोजना ताप्ती नदी के बाढ़ के पानी को दो चट्टानों के बीच स्थित 250 वर्ग किमी के प्राकृतिक बजाड़ा जोन में भूमिगत स्टोर करेगी। यह भू-वैज्ञानिक संरचना जल संरक्षण के लिए उपयुक्त मानी जाती है और इससे 50 किलोमीटर के दायरे में हर साल भूजल स्तर में लगभग 2 मीटर तक वृद्धि संभव होगी।
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धार्मिक पर्यटन का सर्किट बनाएंगे
सीएम ने कहा कि तापी बेसिन मेगा रीचार्ज प्रोजेक्ट प्राकृतिक है। पूरे विश्व में इससे अच्छा प्रोजेक्ट कहीं नहीं है। पानी की कमी से कई लोगों को कष्ट था। मुझे इस बात की खुशी है कि ये प्रोजेक्ट पूरे निमाड़ के लिए जीवन रेखा का काम करेगा। इससे भूजल स्तर सुधरेगा और सिंचाई बेहतर होगी। हम महाराष्ट्र से जुड़कर अपनी पुरानी विरासत को जीवित करेंगे। महाराष्ट्र बंदरगाहों से व्यापार बढ़ाएंगे। जबलपुर से नागपुर तक डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनाया जाएगा। इससे लागत मे बचत होगी। सीएम डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर को नासिक के त्र्यंबकेश्वर, भीमाशंकर और घृष्णेश्वर से जोड़कर धार्मिक पर्यटन का सर्किट बनाएंगे।
20 को इंदौर में कैबिनेट, 31 को भोपाल में कार्यक्रम
दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच जाम घाट परियोजना, जबलपुर-महाराष्ट्र सड़क संपर्क, ज्योतिर्लिंगों को जोड़ने और ऐतिहासिक शख्सियतों से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा आगामी बैठकों और आयोजनों की रूपरेखा भी तय की गई, जिनमें 20 मई को इंदौर में कैबिनेट बैठक और 31 मई को भोपाल में एक प्रमुख कार्यक्रम शामिल है।
"अब जल समझौता होगा व्यावहारिक"-सीएम मोहन
डॉ. मोहन यादव ने बीते वर्षों की असफलताओं पर टिप्पणी करने से परहेज करते हुए कहा कि अब दोनों राज्यों के बीच जल वितरण का संतुलित और व्यावहारिक समाधान निकलेगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग में संतुलन जरूरी है और इस दिशा में यह परियोजना एक मील का पत्थर साबित होगी।
एमपी के इतने जिलों को फायदा
तापी बेसिन मेगा रीचार्ज परियोजना विश्व की सबसे बड़ी ग्राउंड रिचार्ज परियोजना है। इस परियोजना को राष्ट्रीय जल परियोजना घोषित कराने के लिए केंद्र सरकार से चर्चा की जाएगी। इस मेगा रिचार्ज योजना में 31.13 टीएमसी पानी का उपयोग होगा। इसमें से 11.76 टीएमसी मध्यप्रदेश को और 19.36 टीएमसी पानी महाराष्ट्र के हिस्से में आएगा। इस प्रोजेक्ट से मध्यप्रदेश के 1 लाख 23 हजार 82 हैक्टेयर और महाराष्ट्र के 2 लाख 34 हजार 706 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी। इससे प्रदेश के बुरहानपुर-खण्डवा जिले की बुरहानपुर, नेपानगर, खकनार एवं खालवा की 4 तहसीलें लाभान्वित होंगी।
चार जल संरचनाएं प्रस्तावित
- खरिया गुटीघाट बांध स्थल पर लो डायवर्सन वियर :- यह वियर दोनों राज्यों की सीमा पर मध्य प्रदेश की खंडवा जिले की खालवा तहसील एवं महाराष्ट्र की अमरावती तहसील में प्रस्तावित है. इसकी जल भराव क्षमता 8.31 टीएमसी प्रस्तावित है।
- दाई तट नहर प्रथम चरण :- प्रस्तावित खरिया गुटीघाट वियर क़े दाएं तट से 221 किलोमीटर लंबी नहर प्रस्तावित है, जो मध्य प्रदेश में 110 किलोमीटर बनेगी. इस नहर से मध्य प्रदेश के 55 हज़ार 89 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी।
- बाई तट नहर प्रथम चरण :- प्रस्तावित खरिया गुटीघाट वियर के बाएं तट से 135.64 किलोमीटर लंबी
- नहर प्रस्तावित है जो मध्यप्रदेश में 100.42 किलोमीटर बनेगी। इस नहर से मध्यप्रदेश के 44 हज़ार 993 हेक्टर क्षेत्र में सिंचाई प्रस्तावित है।
- बाईं तट नहर द्वितीय चरण :- यह नहर बाईं तट नहर प्रथम चरण के आर डी 90.89 कि मी से 14 किलोमीटर लम्बी टनल के माध्यम से प्रवाहित होगी. इसकी लंबाई 123.97 किलोमीटर होगी।
