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MP News: सरकारी खजाने पर नजर रखने वालों पर शिकंजा, 530 से ज्यादा पर FIR; 223 करोड़ की रकम वापस
Mon, 24 Aug 2026 09:35 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Mon, 24 Aug 2026 09:35 PM IST
सार
मध्यप्रदेश में सरकारी पैसों की हेराफेरी पकड़ने के लिए डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। जांच के बाद 530 से ज्यादा लोगों पर एफआईआर हुई और 223 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में वापस लाए गए हैं।
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वल्लभ भवन, भोपाल
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मध्यप्रदेश में सरकारी पैसों के गबन और वित्तीय गड़बड़ियों पर अब डेटा के जरिए नजर रखी जा रही है। स्टेट फाइनेंशियल इंटेलिजेंस सेल (एसएफआईसी) की जांच में सामने आए मामलों में 530 से ज्यादा लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई गई है। गंभीर मामलों में 22 कर्मचारियों को नौकरी से भी बर्खास्त किया गया है। कार्रवाई के बाद अब तक 223 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में वापस लाए जा चुके हैं। एसएफआईसी वर्ष 2011 से अब तक हुए सरकारी वित्तीय लेनदेन का डेटा खंगाल रहा है। विश्लेषण के दौरान करीब 315 करोड़ रुपये के लेनदेन संदिग्ध पाए गए हैं। इनमें से जांच में प्रमाणित 61 करोड़ रुपये के गबन की वसूली की जा चुकी है। इसके अलावा सरकारी बैंक खातों से अलग-अलग तरीके से ट्रांसफर हुई 162 करोड़ रुपये की राशि वापस सरकारी खजाने में जमा कराई गई है।
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डेटा से पकड़ में आ रही गड़बड़ी
सरकार ने वित्तीय लेनदेन में होने वाली गड़बड़ियों को पकड़ने के लिए डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल शुरू किया है। पुराने रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है, ताकि ऐसे लेनदेन सामने आ सकें जो सामान्य जांच में आसानी से पकड़ में नहीं आते। जांच में गंभीर अनियमितता सामने आने पर पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने के साथ संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा रही है। गबन के मामलों में कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए पुलिस से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की लागू धाराओं में केस दर्ज करने को कहा गया है। इससे सरकारी राशि की हेराफेरी और डिजिटल माध्यम से की गई वित्तीय गड़बड़ी के मामलों में कानूनी कार्रवाई का दायरा बढ़ा है।
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अब मैन्युअल सिस्टम पर रोक
सरकार ने भविष्य में इस तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए वित्तीय व्यवस्था को ज्यादा डिजिटल और सुरक्षित बनाया है। ई-जीपीएफ और ई-डीपीएफ में ऑनलाइन मंजूरी व्यवस्था लागू की गई है। इसके अलावा टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, डिजिटल सिग्नेचर, आधार आधारित भुगतान और वेतन-भत्तों की कैपिंग जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। सरकारी भुगतान के लिए आरओएमएस पोर्टल और आरबीआई के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म को भी अनिवार्य किया गया है। इससे फर्जी भुगतान, अनधिकृत ट्रांसफर और सरकारी राशि के दुरुपयोग पर निगरानी और मजबूत होने की उम्मीद है।
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सरकार ने वित्तीय लेनदेन में होने वाली गड़बड़ियों को पकड़ने के लिए डेटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल शुरू किया है। पुराने रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है, ताकि ऐसे लेनदेन सामने आ सकें जो सामान्य जांच में आसानी से पकड़ में नहीं आते। जांच में गंभीर अनियमितता सामने आने पर पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने के साथ संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा रही है। गबन के मामलों में कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए पुलिस से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की लागू धाराओं में केस दर्ज करने को कहा गया है। इससे सरकारी राशि की हेराफेरी और डिजिटल माध्यम से की गई वित्तीय गड़बड़ी के मामलों में कानूनी कार्रवाई का दायरा बढ़ा है।
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अब मैन्युअल सिस्टम पर रोक
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