{"_id":"694160d240799d71a801f17f","slug":"mp-news-controversy-erupts-as-hospital-information-is-removed-from-the-health-department-s-portal-allegation-2025-12-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"MP News: स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल से अस्पतालों की जानकारी हटते ही विवाद, फर्जी अस्पतालों को संरक्षण का आरोप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
MP News: स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल से अस्पतालों की जानकारी हटते ही विवाद, फर्जी अस्पतालों को संरक्षण का आरोप
Tue, 16 Dec 2025 07:10 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Tue, 16 Dec 2025 07:10 PM IST
सार
मध्यप्रदेश स्वास्थ्य विभाग द्वारा पोर्टल से अस्पतालों में पंजीकृत डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की जानकारी हटाए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। एनएसयूआई ने आरोप लगाया है कि इस फैसले से फर्जी अस्पतालों और कागजी डॉक्टरों को बढ़ावा मिलेगा तथा मरीजों से जानकारी का अधिकार छीना गया है।
विज्ञापन
संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं एमपी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और पारदर्शिता को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने अपने आधिकारिक पोर्टल से निजी व सरकारी अस्पतालों में पदस्थ डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की सार्वजनिक जानकारी हटा दी है। इस बदलाव के बाद अब आम नागरिक यह सत्यापित नहीं कर पाएंगे कि कोई अस्पताल वैध रूप से पंजीकृत है या वहां कौन-कौन से डॉक्टर और नर्स कार्यरत हैं। स्वास्थ्य विभाग के इस कदम ने न केवल मरीजों की जानकारी तक पहुंच सीमित कर दी है, बल्कि व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
एनएसयूआई का आरोप: फर्जीवाड़े को खुली छूट
इस फैसले को लेकर एनएसयूआई ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर तीखा हमला बोला है। एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार का कहना है कि पोर्टल से स्टाफ की जानकारी हटाना सीधे-सीधे फर्जी अस्पतालों और कागजी डॉक्टरों को संरक्षण देने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब एक ही डॉक्टर या नर्स का नाम कई अस्पतालों में एक साथ दर्ज कराना आसान हो जाएगा और इसकी सार्वजनिक जांच का रास्ता भी बंद हो गया है।
बिना सूचना बदलाव, संदेह और गहराया
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पोर्टल पर यह बदलाव बिना किसी पूर्व सूचना या स्पष्टीकरण के किया गया। इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। पहले पोर्टल पर अस्पतालों की पूरी प्रोफाइल उपलब्ध रहती थी, जिसमें डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और रेट चार्ट तक की जानकारी शामिल होती थी, लेकिन अब यह सब अचानक गायब कर दिया गया है।
विज्ञापन
एक डॉक्टर, कई अस्पताल,अब पकड़ से बाहर
एनएसयूआई का दावा है कि पहले पोर्टल के जरिए कम से कम यह देखा जा सकता था कि कोई डॉक्टर या नर्स कितने अस्पतालों में पंजीकृत है। अब यह निगरानी पूरी तरह समाप्त हो गई है। रवि परमार ने कहा कि इस बदलाव से फर्जी सर्टिफिकेट, डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन और बिना योग्य स्टाफ के अस्पताल संचालन को बढ़ावा मिलेगा, जिसका सीधा असर मरीजों की सुरक्षा पर पड़ेगा।
यह भी पढ़ें-विधानसभा के विशेष सत्र से पहले कांग्रेस विधायक दल की अहम बैठक कल, रणनीति को मिलेगा अंतिम रूप
कागजों पर नियम, हकीकत में लापरवाही
एनएसयूआई नेताओं का आरोप है कि प्रदेश में कई निजी अस्पताल सिर्फ कागजों पर ही नियमों का पालन कर रहे हैं। कथित तौर पर रिश्वत लेकर भौतिक निरीक्षण की फर्जी रिपोर्ट तैयार की जाती है, जिसके आधार पर अस्पतालों को मान्यता और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। संगठन ने इसे प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि संगठित भ्रष्टाचार करार दिया है।
यह भी पढ़ें-वोटर लिस्ट की सघन पड़ताल, मृत-गायब और शिफ्टेड मतदाताओं का हो रहा सत्यापन
एनएसयूआई की चेतावनी और मांगें
एनएसयूआई ने सरकार से मांग की है कि स्वास्थ्य विभाग तुरंत सभी अस्पतालों में पंजीकृत डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की जानकारी दोबारा ऑनलाइन सार्वजनिक करे।संगठन ने एक डॉक्टर या नर्स के कई अस्पतालों में पंजीयन की उच्च स्तरीय जांच, फर्जी अस्पतालों और कूटरचित निरीक्षण रिपोर्ट बनाने वाले अधिकारियों पर एफआईआर तथा दोषी अस्पतालों की मान्यता रद्द करने की मांग की है। एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन आंदोलन और कानूनी कदम उठाएगा।
विज्ञापन
एनएसयूआई का आरोप: फर्जीवाड़े को खुली छूट
इस फैसले को लेकर एनएसयूआई ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर तीखा हमला बोला है। एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार का कहना है कि पोर्टल से स्टाफ की जानकारी हटाना सीधे-सीधे फर्जी अस्पतालों और कागजी डॉक्टरों को संरक्षण देने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब एक ही डॉक्टर या नर्स का नाम कई अस्पतालों में एक साथ दर्ज कराना आसान हो जाएगा और इसकी सार्वजनिक जांच का रास्ता भी बंद हो गया है।
विज्ञापन
बिना सूचना बदलाव, संदेह और गहराया
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पोर्टल पर यह बदलाव बिना किसी पूर्व सूचना या स्पष्टीकरण के किया गया। इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। पहले पोर्टल पर अस्पतालों की पूरी प्रोफाइल उपलब्ध रहती थी, जिसमें डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और रेट चार्ट तक की जानकारी शामिल होती थी, लेकिन अब यह सब अचानक गायब कर दिया गया है।
विज्ञापन
एक डॉक्टर, कई अस्पताल,अब पकड़ से बाहर
एनएसयूआई का दावा है कि पहले पोर्टल के जरिए कम से कम यह देखा जा सकता था कि कोई डॉक्टर या नर्स कितने अस्पतालों में पंजीकृत है। अब यह निगरानी पूरी तरह समाप्त हो गई है। रवि परमार ने कहा कि इस बदलाव से फर्जी सर्टिफिकेट, डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन और बिना योग्य स्टाफ के अस्पताल संचालन को बढ़ावा मिलेगा, जिसका सीधा असर मरीजों की सुरक्षा पर पड़ेगा।
यह भी पढ़ें-विधानसभा के विशेष सत्र से पहले कांग्रेस विधायक दल की अहम बैठक कल, रणनीति को मिलेगा अंतिम रूप
कागजों पर नियम, हकीकत में लापरवाही
एनएसयूआई नेताओं का आरोप है कि प्रदेश में कई निजी अस्पताल सिर्फ कागजों पर ही नियमों का पालन कर रहे हैं। कथित तौर पर रिश्वत लेकर भौतिक निरीक्षण की फर्जी रिपोर्ट तैयार की जाती है, जिसके आधार पर अस्पतालों को मान्यता और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। संगठन ने इसे प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि संगठित भ्रष्टाचार करार दिया है।
यह भी पढ़ें-वोटर लिस्ट की सघन पड़ताल, मृत-गायब और शिफ्टेड मतदाताओं का हो रहा सत्यापन
एनएसयूआई की चेतावनी और मांगें
एनएसयूआई ने सरकार से मांग की है कि स्वास्थ्य विभाग तुरंत सभी अस्पतालों में पंजीकृत डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की जानकारी दोबारा ऑनलाइन सार्वजनिक करे।संगठन ने एक डॉक्टर या नर्स के कई अस्पतालों में पंजीयन की उच्च स्तरीय जांच, फर्जी अस्पतालों और कूटरचित निरीक्षण रिपोर्ट बनाने वाले अधिकारियों पर एफआईआर तथा दोषी अस्पतालों की मान्यता रद्द करने की मांग की है। एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन आंदोलन और कानूनी कदम उठाएगा।
