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MP News: बीयू के जवाहर छात्रावास में रैगिंग की शिकायत, फर्जी दस्तावेज से एडमिशन लेने वाला छात्र निष्कासित
Wed, 05 Nov 2025 05:45 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Wed, 05 Nov 2025 05:45 PM IST
सार
बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय के जवाहर छात्रावास में एक बार फिर रैगिंग से जुड़ा मामला सामने आया है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हॉस्टल में रह रहे छात्र को निष्कासित करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी छात्रावासों में सत्यापन अभियान चलाने का फैसला लिया है।
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बीयू भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय (बीयू) के जवाहर छात्रावास में रैगिंग से जुड़ी शिकायतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। विश्वविद्यालय की एंटी रैगिंग सेल में 9 अक्टूबर को एक नई शिकायत दर्ज हुई, जिसमें एक जूनियर छात्र ने सीनियर हर्ष चतुर्वेदी और हॉस्टल वॉर्डन डॉ. कपिल सोनी पर गंभीर आरोप लगाए। शिकायत का संज्ञान लेते हुए यूजीसी एंटी रैगिंग सेल ने बीयू प्रशासन को तत्काल जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश जारी किए।
फर्जी दस्तावेजों से लिया था प्रवेश
आंतरिक जांच में पता चला कि आरोपी छात्र हर्ष चतुर्वेदी ने फर्जी दस्तावेजों और जाली हस्ताक्षरों के आधार पर छात्रावास में प्रवेश प्राप्त किया था। जांच में सामने आया कि हर्ष ने आवेदन फॉर्म में विभागाध्यक्ष (HOD) के नकली हस्ताक्षर किए थे, फॉर्म पर फोटो नहीं थी और संलग्न दस्तावेज अधूरे थे। इतना ही नहीं, आवेदन में दर्ज मोबाइल नंबर भी गलत पाया गया। रिपोर्ट आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने एंटी रैगिंग समिति की अनुशंसा पर हर्ष चतुर्वेदी को विश्वविद्यालय और छात्रावास दोनों से निष्कासित कर दिया है।
सभी हॉस्टलों में चलेगा दस्तावेज सत्यापन अभियान
प्रबंधन ने बताया कि कुछ और छात्र फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर हॉस्टल में रह रहे हैं। ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए अब सभी हॉस्टलों में सत्यापन अभियान (वैरिफिकेशन ड्राइव) चलाया जाएगा। साथ ही, भविष्य में जूनियर और सीनियर छात्रों को अलग-अलग हॉस्टलों में रखने का निर्णय भी लिया गया है ताकि नए छात्रों को सुरक्षित वातावरण मिल सके।
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यह भी पढ़ें-किसानों को हर साल में मिलेगी 10 घंटे निर्बाद बिजली, विवादित सर्क्यूलर निरस्त,चीफ इंजीनियर को हटाया
वॉर्डन पर गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता छात्र ने वॉर्डन डॉ. कपिल सोनी पर भी लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि कई बार फोन कर शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की गई, लेकिन वॉर्डन ने कॉल रिसीव नहीं किया।
यह भी पढ़ें-भोपाल के शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों पर संकट, टीचर बने बीएलओ तो डेंगू नियंत्रण थमा
तीन महीने में सिर्फ एक क्लास अटेंड की
बीयूआईटी (Barkatullah University Institute of Technology) से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी छात्र हर्ष ने पिछले तीन महीनों में केवल एक ही क्लास में उपस्थिति दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में उसकी अकादमिक गतिविधियों में लापरवाही भी उजागर हुई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि शिकायत करने वाले छात्र से कई बार संपर्क साधने की कोशिश की गई, लेकिन वह फोन पर उपलब्ध नहीं हो सका। फिर भी, उपलब्ध साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई पूरी कर ली गई है।
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फर्जी दस्तावेजों से लिया था प्रवेश
आंतरिक जांच में पता चला कि आरोपी छात्र हर्ष चतुर्वेदी ने फर्जी दस्तावेजों और जाली हस्ताक्षरों के आधार पर छात्रावास में प्रवेश प्राप्त किया था। जांच में सामने आया कि हर्ष ने आवेदन फॉर्म में विभागाध्यक्ष (HOD) के नकली हस्ताक्षर किए थे, फॉर्म पर फोटो नहीं थी और संलग्न दस्तावेज अधूरे थे। इतना ही नहीं, आवेदन में दर्ज मोबाइल नंबर भी गलत पाया गया। रिपोर्ट आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने एंटी रैगिंग समिति की अनुशंसा पर हर्ष चतुर्वेदी को विश्वविद्यालय और छात्रावास दोनों से निष्कासित कर दिया है।
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सभी हॉस्टलों में चलेगा दस्तावेज सत्यापन अभियान
प्रबंधन ने बताया कि कुछ और छात्र फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर हॉस्टल में रह रहे हैं। ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए अब सभी हॉस्टलों में सत्यापन अभियान (वैरिफिकेशन ड्राइव) चलाया जाएगा। साथ ही, भविष्य में जूनियर और सीनियर छात्रों को अलग-अलग हॉस्टलों में रखने का निर्णय भी लिया गया है ताकि नए छात्रों को सुरक्षित वातावरण मिल सके।
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वॉर्डन पर गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता छात्र ने वॉर्डन डॉ. कपिल सोनी पर भी लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि कई बार फोन कर शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की गई, लेकिन वॉर्डन ने कॉल रिसीव नहीं किया।
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तीन महीने में सिर्फ एक क्लास अटेंड की
बीयूआईटी (Barkatullah University Institute of Technology) से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी छात्र हर्ष ने पिछले तीन महीनों में केवल एक ही क्लास में उपस्थिति दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में उसकी अकादमिक गतिविधियों में लापरवाही भी उजागर हुई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि शिकायत करने वाले छात्र से कई बार संपर्क साधने की कोशिश की गई, लेकिन वह फोन पर उपलब्ध नहीं हो सका। फिर भी, उपलब्ध साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई पूरी कर ली गई है।
