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MP News: बिहार में सीएम डॉ. मोहन यादव बोले- भाजपा में कोई कार्यकर्ता कब पीएम-सीएम बन जाए कोई नहीं जानता
Thu, 18 Jan 2024 08:39 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Thu, 18 Jan 2024 08:39 PM IST
सार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मुझे द्वारिकाधीश के अनन्य भक्त हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे चुना है। चाय बेचकर जिसका परिवार चलता हो, संघर्षों में जिन्होंने जीवन जिया ऐसे नरेंद्र मोदी जी आज हमारे देश के प्रधानमंत्री हैं।
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बिहार में अन्य नेताओं के साथ
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को बिहार दौरे पर थे। पटना में उनका भव्य स्वागत किया गया। श्रीकृष्ण चेतना विकास मंच के अभिनंदन कार्यक्रम में भगवान श्रीकृष्ण व यदुवंश का जिक्र कर राज्य के यादवों को साधा तो सत्तारूढ़ दल के मुखिया व सीएम नीतीश कुमार और राजद प्रमुख लालू यादव का नाम तक नहीं लिया। मप्र का सीएम बनाकर भाजपा ने यूपी व बिहार के यादव वोटों को साधने का कदम उठाया है। डॉ. मोहन यादव का सीएम बनने के बाद यह पहला बिहार दौरा था।
मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने जब डॉ. मोहन यादव को कमान सौंपी तो बिहार के राजनीतिक महकमे में हंगामा मच गया। तब से अब तक, जब-जब मोहन यादव के नाम पर बिहार में सत्ताधारी युनाइटेड जनता दल या राज्य की सबसे बड़ी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं से बात की गई तो जवाब उलटा मिला। राजद ने तो लालू प्रसाद यादव के सामने मोहन यादव को नगण्य ही बताया था। लेकिन, जब मौका डॉ. मोहन यादव को मिला तो उन्होंने लालू के नाम की चर्चा तक नहीं की। अच्छी-बुरी किसी भी तरह से नहीं की। भाजपा के विरोध का झंडा बुलंद करने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भी उन्होंने नाम नहीं लिया।
कार्यक्रम में बिहार के पूर्व मंत्री व बिहार भाजपा के भूतपूर्व प्रदेश अध्यक्ष नंद किशोर यादव, पूर्व मंत्री व सांसद रामकृपाल यादव ने डॉ. मोहन यादव का सम्मान किया। सीएम डॉ. मोहन यादव ने अपने पूरे भाषण में दो बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिया। एक बार यादव कुल के व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाने के लिए धन्यवाद देने के नाम पर और दूसरी बार चाय बेचने वाले की मेहनत की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने की बात कहते हुए जिक्र किया।
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वृंदावन बिहारी लाल की जय...
अपने भाषण को सीएम डॉ. यादव ने यदुकुल, यदुवंशी, गोपाल आदि शब्दों पर केंद्रित रखा। इस भीड़ में ज्यादातर यादव जाति के नेता थे, इसलिए उन्होंने यदुवंश और श्रीकृष्ण पर एक तरह से धार्मिक-आध्यात्मिक प्रवचन दिया। उन्होंने बिहार के जयकारे के पहले वृंदावन बिहारी लाल का जिक्र किया और यदुकुल शिरोमणी श्रीकृष्ण से बिहार का रिश्ता बताया। मतलब, शुरू से अंत तक मोहन यादव ने सिर्फ यादवों पर केंद्रित बात की।
कार्यक्रम के दौरान जब-जब उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण का नाम लिया, तब-तब खूब नारेबाजी हुई। इसके साथ ही पीएम मोदी के नाम पर भी नारेबाजी हुई। अगर लालू का नाम लेने पर कुछ उलट हो जाता तो उससे अच्छा था कि नाम लिया ही नहीं जाए। जहां तक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सवाल है तो इस समय बिहार की राजनीति में संभावनाओं को देखते हुए भाजपा ने सीएम के प्रति नरमी का रुख कर लिया है। भाजपा नेता नीतीश पर सीधा हमला नहीं कर रहे हैं। नीतीश कुमार के पुराने साथी राज्यसभा सांसद व पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी एक्टिव हैं। मतलब, अगर नीतीश कुमार राजद के साथ असहज हुए तो भाजपा कोई रास्ता निकाल सकती है। राम मंदिर, सीट शेयरिंग आदि को लेकर राजद-जदयू के स्टैंड में दिख रही दूरी भी शायद वजह हो कि मोहन यादव ने नीतीश का नाम ही नहीं लिया।
माता सीता की जन्मस्थली को प्रणाम
डॉ. यादव ने कहा कि माता सीता की जन्मस्थली बिहार आकर मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूं। ऐसी पवित्र धरती को मैं प्रणाम करता हूं। यह भगवान महावीर स्वामी जी की धरती है, जिससे बिहार की पहचान है। साथ ही सम्राट अशोक की भी धरती है। सम्राट अशोक का मध्य प्रदेश उज्जैन से खासतौर पर अलग तरह का रिश्ता रहा है। हजारों साल से मध्यप्रदेश और बिहार का रिश्ता है। प्राचीन काल से मध्यप्रदेश की भूमिका महत्वपूर्ण रही थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाबा महाकाल की नगरी में ही भगवान श्रीकृष्ण का विवाह हुआ।
भारत में गाय के प्रति व्यक्त होता है वास्तविक सम्मान
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि परमात्मा से, प्रकृति से प्रेम करने का उदाहरण अगर कहीं दिखाई देता है तो निश्चित रूप से वह सर्वाधिक यादव समाज से दिखाई देता है, जो गौपालन के माध्यम से अपना जीवन चलाते हैं। परमात्मा के माध्यम से प्रकृति प्रेम को भी दिखाते हैं। जो प्रकृति से प्रेम करता है, जो जीव मात्र से प्रेम करता है, वो ही तो गोपाल हो सकता है। इसके अलावा कौन गोपाल होता है, गोपाल वो नहीं होते, दुनिया में कई देश है हमारे अलावा, अमेरिका, इंग्लैंड में भी गाय माता बहुत सारे लोग पालते हैं, लेकिन उनके पालने के तरीके और हमारे पालने के तरीके में काफी अंतर है। हम अशक्त और बीमार गायों की देखभाल भी करते हैं। उनके हाल पर नहीं छोड़ देते। हम गाय माता में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास देखते हैं। गायों में मां का स्वरूप भी देखते हैं। गौ-माता का वास्तविक सम्मान हमारे देश की संस्कृति है।
भाजपा में कौन कब सीएम बन जाए कोई नहीं जानता
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भाजपा आज विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है। यहां के कार्यकर्ताओं को ऐसा प्रशिक्षण, शिक्षण मिलता है जहां राष्ट्रभक्त के रूप में लोकतंत्र को मजबूत करने का काम किया जाता है। यादव ने कहा कि भाजपा एक ऐसी पार्टी है जहां छोटे छोटे कार्यकर्ता भी कब पीएम और सीएम बन जाए कोई नहीं जानता। उन्होंने बिहार की तारीफ करते हुए कहा कि हम सभी जानते हैं कि 2000-3000 साल पहले यह प्रदेश ही लोकतंत्र का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। यही नहीं आपातकाल के दौरान भी बिहार ने संघर्ष का शंखनाद कर देश में उदाहरण प्रस्तुत किया।
दुनिया का मार्गदर्शन कर रही है गीता
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि श्रीकृष्णजी ने अपनी पूरी शिक्षा का सार कर्म और श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से दिया जो आज दुनिया का मार्गदर्शन कर रही है। भगवान श्रीकृष्ण ने अव्यवस्था और अधर्म के विरुद्ध, धर्म की स्थापना के लिए संघर्ष किया। यह हमारा सौभाग्य है कि हम सभी भगवान श्रीकृष्ण के वंशज हैं।
द्वारिकाधीश के अनन्य भक्त पीएम मोदी जी ने मुझे चुना
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मुझे द्वारिकाधीश के अनन्य भक्त हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे चुना है। चाय बेचकर जिसका परिवार चलता हो, संघर्षों में जिन्होंने जीवन जिया ऐसे नरेंद्र मोदी जी आज हमारे देश के प्रधानमंत्री हैं। कोई भी क्रांतिकारी या आजादी का सिपाही हो, अगर गीता भी पढ़ी तो उन्हें लगता है, जीवन अधूरा है। महात्मा गांधी से लेकर के तमाम क्रांतिकारियों और जिन्होंने भी गीता को पढ़ा संकल्प किया, गीता सदैव उसका पाथेय बनकर मार्गदर्शन करती रही। ये हमारा सौभाग्य है।
कई संस्थाओं ने किया अभिनंदन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सांदीपनी आश्रम उज्जैन में शिक्षा ग्रहण की थी। मध्यप्रदेश में जहां-जहां भगवान श्रीकृष्ण के चरण पड़े हैं, उन स्थानों को तीर्थ स्थान के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया है। डॉ. यादव ने गांधी मैदान स्थित श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में शंख ध्वनि के बीच दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। विभिन्न संगठनों द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव को पुष्पगुच्छ, शॉल व अभिनंदन पत्र भेंट कर तथा मुकुट पहनाकर स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का श्रीकृष्ण चेतना विचार मंच के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) श्री राजेन्द्र प्रसाद, महासचिव (पूर्व आईएएस) डॉ. गोरेलाल यादव, महामंडलेश्वर महंत डॉ. सुखदेव दास, बिहार प्रदेश यादव महासभा, श्री कृष्ण चेतना परिषद, श्री कृष्ण चेतना संघ, श्री कृष्ण विचार मंच, श्री गोपीकृष्ण गो आश्रम, जयपाल सिंह यादव फाउंडेशन के पदाधिकारियों आदि ने स्वागत किया।
पटना के इस्कॉन मंदिर में किए दर्शन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पटना के इस्कॉन मंदिर पहुंचे। उनके साथ बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी और नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा भी साथ रहे। यहां श्री यादव इस्कॉन मंदिर पहुंच कर राधा रानी और भगवान कृष्ण की पूजा अर्चना की और आशीर्वाद लिया। वे भगवान की आरती में भी शामिल हुए। इस्कॉन मंदिर के अध्यक्ष कृष्ण कृपादास जी ने स्वागत किया तथा इस्कॉन के 125 वें साल पर प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा दिए गए सिक्के को उपहार स्वरूप भेंट किया। श्री कृष्ण कृपादास जी ने मुख्यमंत्री को भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा देकर और सिर पर चर्मी रखकर आशीर्वाद भी दिया।
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मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने जब डॉ. मोहन यादव को कमान सौंपी तो बिहार के राजनीतिक महकमे में हंगामा मच गया। तब से अब तक, जब-जब मोहन यादव के नाम पर बिहार में सत्ताधारी युनाइटेड जनता दल या राज्य की सबसे बड़ी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं से बात की गई तो जवाब उलटा मिला। राजद ने तो लालू प्रसाद यादव के सामने मोहन यादव को नगण्य ही बताया था। लेकिन, जब मौका डॉ. मोहन यादव को मिला तो उन्होंने लालू के नाम की चर्चा तक नहीं की। अच्छी-बुरी किसी भी तरह से नहीं की। भाजपा के विरोध का झंडा बुलंद करने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भी उन्होंने नाम नहीं लिया।
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कार्यक्रम में बिहार के पूर्व मंत्री व बिहार भाजपा के भूतपूर्व प्रदेश अध्यक्ष नंद किशोर यादव, पूर्व मंत्री व सांसद रामकृपाल यादव ने डॉ. मोहन यादव का सम्मान किया। सीएम डॉ. मोहन यादव ने अपने पूरे भाषण में दो बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिया। एक बार यादव कुल के व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाने के लिए धन्यवाद देने के नाम पर और दूसरी बार चाय बेचने वाले की मेहनत की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने की बात कहते हुए जिक्र किया।
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वृंदावन बिहारी लाल की जय...
अपने भाषण को सीएम डॉ. यादव ने यदुकुल, यदुवंशी, गोपाल आदि शब्दों पर केंद्रित रखा। इस भीड़ में ज्यादातर यादव जाति के नेता थे, इसलिए उन्होंने यदुवंश और श्रीकृष्ण पर एक तरह से धार्मिक-आध्यात्मिक प्रवचन दिया। उन्होंने बिहार के जयकारे के पहले वृंदावन बिहारी लाल का जिक्र किया और यदुकुल शिरोमणी श्रीकृष्ण से बिहार का रिश्ता बताया। मतलब, शुरू से अंत तक मोहन यादव ने सिर्फ यादवों पर केंद्रित बात की।
कार्यक्रम के दौरान जब-जब उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण का नाम लिया, तब-तब खूब नारेबाजी हुई। इसके साथ ही पीएम मोदी के नाम पर भी नारेबाजी हुई। अगर लालू का नाम लेने पर कुछ उलट हो जाता तो उससे अच्छा था कि नाम लिया ही नहीं जाए। जहां तक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सवाल है तो इस समय बिहार की राजनीति में संभावनाओं को देखते हुए भाजपा ने सीएम के प्रति नरमी का रुख कर लिया है। भाजपा नेता नीतीश पर सीधा हमला नहीं कर रहे हैं। नीतीश कुमार के पुराने साथी राज्यसभा सांसद व पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी एक्टिव हैं। मतलब, अगर नीतीश कुमार राजद के साथ असहज हुए तो भाजपा कोई रास्ता निकाल सकती है। राम मंदिर, सीट शेयरिंग आदि को लेकर राजद-जदयू के स्टैंड में दिख रही दूरी भी शायद वजह हो कि मोहन यादव ने नीतीश का नाम ही नहीं लिया।
माता सीता की जन्मस्थली को प्रणाम
डॉ. यादव ने कहा कि माता सीता की जन्मस्थली बिहार आकर मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूं। ऐसी पवित्र धरती को मैं प्रणाम करता हूं। यह भगवान महावीर स्वामी जी की धरती है, जिससे बिहार की पहचान है। साथ ही सम्राट अशोक की भी धरती है। सम्राट अशोक का मध्य प्रदेश उज्जैन से खासतौर पर अलग तरह का रिश्ता रहा है। हजारों साल से मध्यप्रदेश और बिहार का रिश्ता है। प्राचीन काल से मध्यप्रदेश की भूमिका महत्वपूर्ण रही थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाबा महाकाल की नगरी में ही भगवान श्रीकृष्ण का विवाह हुआ।
भारत में गाय के प्रति व्यक्त होता है वास्तविक सम्मान
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि परमात्मा से, प्रकृति से प्रेम करने का उदाहरण अगर कहीं दिखाई देता है तो निश्चित रूप से वह सर्वाधिक यादव समाज से दिखाई देता है, जो गौपालन के माध्यम से अपना जीवन चलाते हैं। परमात्मा के माध्यम से प्रकृति प्रेम को भी दिखाते हैं। जो प्रकृति से प्रेम करता है, जो जीव मात्र से प्रेम करता है, वो ही तो गोपाल हो सकता है। इसके अलावा कौन गोपाल होता है, गोपाल वो नहीं होते, दुनिया में कई देश है हमारे अलावा, अमेरिका, इंग्लैंड में भी गाय माता बहुत सारे लोग पालते हैं, लेकिन उनके पालने के तरीके और हमारे पालने के तरीके में काफी अंतर है। हम अशक्त और बीमार गायों की देखभाल भी करते हैं। उनके हाल पर नहीं छोड़ देते। हम गाय माता में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास देखते हैं। गायों में मां का स्वरूप भी देखते हैं। गौ-माता का वास्तविक सम्मान हमारे देश की संस्कृति है।
भाजपा में कौन कब सीएम बन जाए कोई नहीं जानता
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भाजपा आज विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है। यहां के कार्यकर्ताओं को ऐसा प्रशिक्षण, शिक्षण मिलता है जहां राष्ट्रभक्त के रूप में लोकतंत्र को मजबूत करने का काम किया जाता है। यादव ने कहा कि भाजपा एक ऐसी पार्टी है जहां छोटे छोटे कार्यकर्ता भी कब पीएम और सीएम बन जाए कोई नहीं जानता। उन्होंने बिहार की तारीफ करते हुए कहा कि हम सभी जानते हैं कि 2000-3000 साल पहले यह प्रदेश ही लोकतंत्र का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। यही नहीं आपातकाल के दौरान भी बिहार ने संघर्ष का शंखनाद कर देश में उदाहरण प्रस्तुत किया।
दुनिया का मार्गदर्शन कर रही है गीता
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि श्रीकृष्णजी ने अपनी पूरी शिक्षा का सार कर्म और श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से दिया जो आज दुनिया का मार्गदर्शन कर रही है। भगवान श्रीकृष्ण ने अव्यवस्था और अधर्म के विरुद्ध, धर्म की स्थापना के लिए संघर्ष किया। यह हमारा सौभाग्य है कि हम सभी भगवान श्रीकृष्ण के वंशज हैं।
द्वारिकाधीश के अनन्य भक्त पीएम मोदी जी ने मुझे चुना
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मुझे द्वारिकाधीश के अनन्य भक्त हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे चुना है। चाय बेचकर जिसका परिवार चलता हो, संघर्षों में जिन्होंने जीवन जिया ऐसे नरेंद्र मोदी जी आज हमारे देश के प्रधानमंत्री हैं। कोई भी क्रांतिकारी या आजादी का सिपाही हो, अगर गीता भी पढ़ी तो उन्हें लगता है, जीवन अधूरा है। महात्मा गांधी से लेकर के तमाम क्रांतिकारियों और जिन्होंने भी गीता को पढ़ा संकल्प किया, गीता सदैव उसका पाथेय बनकर मार्गदर्शन करती रही। ये हमारा सौभाग्य है।
कई संस्थाओं ने किया अभिनंदन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सांदीपनी आश्रम उज्जैन में शिक्षा ग्रहण की थी। मध्यप्रदेश में जहां-जहां भगवान श्रीकृष्ण के चरण पड़े हैं, उन स्थानों को तीर्थ स्थान के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया है। डॉ. यादव ने गांधी मैदान स्थित श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में शंख ध्वनि के बीच दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। विभिन्न संगठनों द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव को पुष्पगुच्छ, शॉल व अभिनंदन पत्र भेंट कर तथा मुकुट पहनाकर स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का श्रीकृष्ण चेतना विचार मंच के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) श्री राजेन्द्र प्रसाद, महासचिव (पूर्व आईएएस) डॉ. गोरेलाल यादव, महामंडलेश्वर महंत डॉ. सुखदेव दास, बिहार प्रदेश यादव महासभा, श्री कृष्ण चेतना परिषद, श्री कृष्ण चेतना संघ, श्री कृष्ण विचार मंच, श्री गोपीकृष्ण गो आश्रम, जयपाल सिंह यादव फाउंडेशन के पदाधिकारियों आदि ने स्वागत किया।
पटना के इस्कॉन मंदिर में किए दर्शन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पटना के इस्कॉन मंदिर पहुंचे। उनके साथ बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी और नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा भी साथ रहे। यहां श्री यादव इस्कॉन मंदिर पहुंच कर राधा रानी और भगवान कृष्ण की पूजा अर्चना की और आशीर्वाद लिया। वे भगवान की आरती में भी शामिल हुए। इस्कॉन मंदिर के अध्यक्ष कृष्ण कृपादास जी ने स्वागत किया तथा इस्कॉन के 125 वें साल पर प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा दिए गए सिक्के को उपहार स्वरूप भेंट किया। श्री कृष्ण कृपादास जी ने मुख्यमंत्री को भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा देकर और सिर पर चर्मी रखकर आशीर्वाद भी दिया।
