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MP News: MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, वक्फ भूमि की लीज नीलामी वैध, याचिका खारिज
Fri, 23 May 2025 06:44 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Fri, 23 May 2025 06:44 PM IST
सार
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर ने वक्फ कृषि भूमि की लीज नीलामी को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए वक्फ बोर्ड की प्रक्रिया को पूरी तरह वैध ठहराया है।
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वक्फ बोर्ड, एमपी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर ने वक्फ कृषि भूमि की लीज नीलामी को लेकर दाखिल याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि वक्फ बोर्ड की प्रक्रिया पूरी तरह वैध और विधिसम्मत है। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। अमीर आजाद अंसारी व अन्य द्वारा दायर की गई याचिका में दो मुख्य आपत्तियां उठाई गई थीं। पहली, कि आदेश पर हस्ताक्षर करने वाली डॉ. फरजाना गजाल पूर्णकालिक सीईओ नहीं हैं और दूसरी कि नीलामी का अधिकार केवल मुतवल्ली को है। कोर्ट ने दोनों तर्कों को अस्वीकार्य करते हुए स्पष्ट किया कि डॉ. गजाल की नियुक्ति वक्फ अधिनियम की धारा 23 के अनुरूप है। उनकी नियुक्ति में 'अस्थायी' शब्द केवल निर्धारित कार्यकाल को दर्शाता है। इससे उनकी वैधता पर कोई असर नहीं पड़ता।
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कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 1994 का परिपत्र अब अमान्य है, क्योंकि 2014 के नियमों ने इसे प्रतिस्थापित कर दिया है। नए नियमों के तहत वक्फ संपत्तियों को लीज पर देने का अधिकार वक्फ बोर्ड और मुतवल्ली दोनों को है।
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वक्फ बोर्ड की वैधता की पुष्टि
वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि न्यायालय का यह निर्णय सच्चाई और संस्था की पारदर्शिता की जीत है। उन्होंने कहा कि यह आदेश प्रमाण है कि न्यायपालिका दुर्भावनापूर्ण प्रयासों के विरुद्ध संस्थानों की रक्षा करती है। इससे वक्फ बोर्ड की वैधता की पुष्टि हुई है।
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कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 1994 का परिपत्र अब अमान्य है, क्योंकि 2014 के नियमों ने इसे प्रतिस्थापित कर दिया है। नए नियमों के तहत वक्फ संपत्तियों को लीज पर देने का अधिकार वक्फ बोर्ड और मुतवल्ली दोनों को है।
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वक्फ बोर्ड की वैधता की पुष्टि
वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि न्यायालय का यह निर्णय सच्चाई और संस्था की पारदर्शिता की जीत है। उन्होंने कहा कि यह आदेश प्रमाण है कि न्यायपालिका दुर्भावनापूर्ण प्रयासों के विरुद्ध संस्थानों की रक्षा करती है। इससे वक्फ बोर्ड की वैधता की पुष्टि हुई है।
