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MP News: भोपाल कलेक्टर के आदेश, विशेष दुकान या संस्थान से स्कूल सामग्री खरीदने दबाव बनाने पर होगी कार्रवाई

Mon, 10 Apr 2023 05:34 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: आनंद पवार Updated Mon, 10 Apr 2023 05:34 PM IST
सार

राजधानी में स्कूल माफिया और दलालों पर लगाम लगाने भोपाल कलेक्टर ने आदेश जारी किए है। कलेक्टर ने निजी स्कूलों को अभिभावकों को किसी विशेष दुकान या संस्थान से सामग्री खरीदने दबाव बनाने पर कार्रवाई के निर्देश अधिकारियों को दिये हैं। 

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MP News: Bhopal Collector's order, action will be taken on making pressure to buy school material from special
भोपाल कलेक्टर आशीष सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ग्वालियर कलेक्टर के बाद भोपाल कलेक्टर ने भी शिक्षा माफिया पर अंकुश लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया। कलेक्टर आशीष सिंह ने किसी एक विशेष दुकान या संस्थान से स्कूल सामग्री खरीदने दबाव बनाने पर कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। स्कूल खुलते ही किसी एक जगह से बैग, ड्रेस और कोर्स की किताबे खरीदने के लिए स्कूल प्रबंधन द्वारा दबाव बनाया जाता है। इसकी कहीं कोई सुनवाई नहीं होने से अभिभावकों को मजबूरी में मनमाने दाम पर सामग्री खरीदना पड़ती है। निजी स्कूलों की मनमानी का बोझ अभिभावकों की जेब पर पड़ता है। अब भोपाल कलेक्टर के आदेश को शिक्षा माफिया और दलालों पर अंकुश लगाने की दिशा में ठोस कदम बताया जा रहा है। 
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भोपाल कलेक्टर आशीष सिंह ने सभी एसडीएम और जिला शिक्षा अधिकारी  को निर्देश दिए है कि जिले में धारा 144 के अंतर्गत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी है। जिसके अंतर्गत कोई भी शिक्षा संस्थान, स्कूल, विद्यालय अपने विद्यार्थियों को किसी विशेष संस्थान, दुकान से पुस्तक, किताब और स्टेशनरी का सामान खरीदने के लिए दबाव नहीं डालेगा और ना ही ऐसी किसी प्रकार के निर्देश देगा। यदि किसी स्कूल ,संस्थान के विरुद्ध किसी प्रकार की  शिकायत मिलती है, तो उसके प्रति अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। कलेक्टर ने सभी अधिकारियो को कहा है कि जिले में यह सुनिश्चित करें कि बच्चो और पालकों पर किसी प्रकार का दबाब नहीं बनाया जाए। यदि किसी भी संस्थान के द्वारा  इस प्रकार का कोई निर्देश या समान खरीदने के लिए प्रेरित किया जाता है तो उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
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मोटी कमाई का है जरिया
निजी स्कूलों को नए सत्र में करोड़ों की कमाई ड्रेस, बैग, कॉपी, पुस्तक से ही हो जाती है। शहर के बड़े स्कूल विशेष दुकान से पालकों को सामान खरीदने के लिए कहते है। इन सामग्री पर ही अभिभावकों को 8 से 10 हजार रुपए प्रति छात्र खर्च हो जाती है। फिर वहां से कमीशन पाते हैं। निजी स्कूलों की इस मनमानी का आर्थिक बोझ अभिभावकों के ऊपर पड़ता हैं।
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