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MP News: चित्रकूट में सम्पन्न ‘अरण्यवासी श्रीराम व्याख्यानमाला’, युवाओं और समाज को मिला आध्यात्मिक संदेश
Sun, 14 Sep 2025 06:36 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Sun, 14 Sep 2025 06:36 PM IST
सार
चित्रकूट के डॉ. राममनोहर लोहिया सभागार में आयोजित ‘अरण्यवासी श्रीराम व्याख्यानमाला – शाश्वतम्’ में भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्श और संदेशों को आधुनिक समाज और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि प्रभु राम का जीवन मर्यादा, धर्म और करुणा पर आधारित है, जो आज भी नैतिक और आध्यात्मिक विकास का मार्ग दिखाता है।
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अरण्यवासी श्रीराम व्याख्यानमाला कार्यक्रम का आयोजन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
श्रीरामचंद्र पथ गमन न्यास, भोपाल के तत्वावधान में शुक्रवार को दीनदयाल शोध संस्थान, चित्रकूट के डॉ. राममनोहर लोहिया सभागार में ‘अरण्यवासी श्रीराम व्याख्यानमाला – शाश्वतम्’ का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत प्रभु राम की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन से हुई। इस व्याख्यानमाला में प्रभु श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों और संदेशों को आज के समाज व युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि राम का जीवन मर्यादा, धर्म और करुणा पर आधारित है, जो आधुनिक समय में भी नैतिक और आध्यात्मिक सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त करता है।
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मर्यादा और धर्म का जीवन दर्शन
अध्यक्षीय उद्बोधन में अभय महाजन ने कहा कि राम का नाम सभी आंतरिक बुराइयों को दूर करता है और उनके जीवन से सत्य, करुणा और आत्मसंयम का पालन करना सीखा जा सकता है। नवलेश दीक्षित ने चित्रकूट को ब्रह्मांड का सबसे बड़ा तीर्थस्थल बताते हुए कहा कि राम का जीवन सत्य, प्रेम और समतामूलक समाज का संदेश देता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे भौतिकता की दौड़ से दूर रहकर आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाएं।
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राम ने अपने आदर्शों से जनमानस को प्रेरित किया
महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. भरत मिश्रा ने कहा कि भगवान राम ने समाज को स्वावलंबी और एकजुट बनाने का कार्य किया। महंत सीताशरण दास ने वनवास को सामाजिक समरसता का प्रतीक बताते हुए कहा कि श्री राम ने अपने आदर्शों से जनमानस को प्रेरित किया। डॉ. रामनारायण त्रिपाठी ने चित्रकूट की महिमा का वर्णन करते हुए इसे तप, त्याग और आध्यात्मिकता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि प्रभु राम का दर्शन केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि जीवन में सत्य, धर्म और मानवतावादी मूल्यों का व्यावहारिक उदाहरण है।
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मर्यादा और धर्म का जीवन दर्शन
अध्यक्षीय उद्बोधन में अभय महाजन ने कहा कि राम का नाम सभी आंतरिक बुराइयों को दूर करता है और उनके जीवन से सत्य, करुणा और आत्मसंयम का पालन करना सीखा जा सकता है। नवलेश दीक्षित ने चित्रकूट को ब्रह्मांड का सबसे बड़ा तीर्थस्थल बताते हुए कहा कि राम का जीवन सत्य, प्रेम और समतामूलक समाज का संदेश देता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे भौतिकता की दौड़ से दूर रहकर आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाएं।
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राम ने अपने आदर्शों से जनमानस को प्रेरित किया
महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. भरत मिश्रा ने कहा कि भगवान राम ने समाज को स्वावलंबी और एकजुट बनाने का कार्य किया। महंत सीताशरण दास ने वनवास को सामाजिक समरसता का प्रतीक बताते हुए कहा कि श्री राम ने अपने आदर्शों से जनमानस को प्रेरित किया। डॉ. रामनारायण त्रिपाठी ने चित्रकूट की महिमा का वर्णन करते हुए इसे तप, त्याग और आध्यात्मिकता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि प्रभु राम का दर्शन केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि जीवन में सत्य, धर्म और मानवतावादी मूल्यों का व्यावहारिक उदाहरण है।
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