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MP News: एम्स के चिकित्सकों ने ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीजों को लौटाई मुस्कान, जायगोमैटिक इम्प्लांट से मिली राहत

Wed, 12 Nov 2025 07:35 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Wed, 12 Nov 2025 07:35 PM IST
सार

ब्लैक फंगस से जबड़ा खो चुके मरीजों के चेहरे पर फिर मुस्कान लौटी है। एम्स भोपाल के डेंटल विशेषज्ञों ने अत्याधुनिक जायगोमैटिक इम्प्लांट तकनीक से 52 मरीजों को फिर से बोलने, खाने और आत्मविश्वास से जीने की नई उम्मीद दी है।

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MP News: AIIMS doctors brought back smiles to patients suffering from black fungus, providing relief through z
एम्स के चिकित्सकों की टीम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोविड-19 महामारी के दौरान ब्लैक फंगस (म्यूकोरमायकोसिस) से प्रभावित होकर जिन मरीजों ने अपना जबड़ा (मैक्सिला) खो दिया था, अब वे फिर से सामान्य रूप से बोल और मुस्कुरा पा रहे हैं। यह संभव हुआ है एम्स भोपाल के डेंटिस्ट्री विभाग के विशेषज्ञों की मेहनत और नवीनतम जायगोमैटिक इम्प्लांट तकनीक की बदौलत। एम्स भोपाल के डेंटल विशेषज्ञों ने इन मरीजों का प्रोस्थेटिक रिहैबिलिटेशन कर उन्हें नया जीवन दिया है। यह शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है और कोरिया के प्रतिष्ठित जर्नल आर्काइव्स ऑफ क्रेनियोफेशियल सर्जरी (ACFS) में प्रकाशित हुआ है।
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52 मरीजों पर किया गया सफल उपचार
एम्स भोपाल में इस अध्ययन के तहत 52 मरीजों पर यह तकनीक अपनाई गई, जिनमें से अधिकांश कोविड के दौरान ब्लैक फंगस संक्रमण से जबड़ा खो चुके थे। सर्जरी के बाद मरीजों के खाने, बोलने और चेहरे की बनावट में जबरदस्त सुधार देखा गया। इस शोध का नेतृत्व डॉ. अंशुल राय (प्रोफेसर, डेंटिस्ट्री विभाग) ने किया। टीम में डॉ. बाबूलाल, डॉ. जेनिश भट्टी, डॉ. जितेन्द्र कुमार, डॉ. विकास विजयन और डॉ. जुबिन ठक्कर शामिल रहे।
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3डी प्रिंटिंग तकनीक बनी सफलता की कुंजी
डॉ. अंशुल राय ने बताया कि टीम ने सर्जरी की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए 3डी प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग किया। इससे जायगोमैटिक इम्प्लांट की सही स्थिति का पूर्वानुमान लगाया गया, जिससे जोखिम कम हुआ और परिणाम उत्कृष्ट रहे। जबड़े के हट जाने के बाद कई मरीजों ने घर से निकलना बंद कर दिया था। यह तकनीक न सिर्फ उनके चेहरे की सुंदरता वापस लाई, बल्कि आत्मविश्वास भी लौटाया।


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नया आत्मविश्वास, नई जिंदगी
इस तकनीक से मरीजों की जीवन गुणवत्ता (Quality of Life) में उल्लेखनीय सुधार देखा गया। कई मरीज अब फिर से सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं और सामान्य जीवन जी रहे हैं। यह उपलब्धि न केवल एम्स भोपाल बल्कि पूरे देश के लिए गौरव की बात है। कोविड-19 के बाद ब्लैक फंगस संक्रमण से ग्रस्त मरीजों के पुनर्वास में एम्स भोपाल का यह योगदान चिकित्सा जगत में नई दिशा दिखा रहा है।
 
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