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एमपी: राजभवन के 2011 से भेजे गए पत्रों का होगा निरीक्षण, हाईकोर्ट ने आरटीआई कार्यकर्ता अजय दुबे को दी अनुमति
Tue, 03 Nov 2026 08:47 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Tue, 03 Nov 2026 08:47 PM IST
सार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने आरटीआई कार्यकर्ता अजय दुबे को राजभवन के उन दस्तावेजों के निरीक्षण की अनुमति दी है, जो 2011 से राज्यपाल ने प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति पर केंद्र सरकार को भेजे थे। इन रिपोर्टों पर केंद्र सरकार की ओर से मिले जवाब भी निरीक्षण के दायरे में होंगे। रिकॉर्ड देखने के बाद दुबे प्रमाणित प्रतियों के लिए आवेदन कर सकेंगे।
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मध्यप्रदेश लोक भवन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश राजभवन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों तक पहुंच के मामले में हाईकोर्ट ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत निरीक्षण की अनुमति देने के निर्देश दिए हैं। सामाजिक एवं वन्यजीव संरक्षण कार्यकर्ता अजय दुबे की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश अल्पेश वाई. कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगल पीठ ने यह आदेश दिया। अदालत ने दुबे की रिट याचिका का निराकरण करते हुए एकल पीठ के पूर्व आदेश में संशोधन किया है। साथ ही प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा 23 फरवरी 2012 को पारित आदेश को प्रभावी रूप से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
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कोर्ट के आदेश के अनुसार, दुबे को मध्य प्रदेश राजभवन जाकर उन अभिलेखों का निरीक्षण करने की अनुमति मिलेगी, जो वर्ष 2011 से राज्यपाल द्वारा प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति के संबंध में केंद्र सरकार को भेजे गए और उन रिपोर्टों पर केंद्र की तरफ से आए जवाब। निरीक्षण के बाद वे अपनी जरूरत के अनुसार संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकेंगे। इस मामले में अब राजभवन के रिकॉर्ड तक पहुंच का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि निरीक्षण के दौरान कौन-कौन से दस्तावेज उपलब्ध होंगे और उनमें क्या जानकारियां सामने आएंगी। यह आदेश आरटीआई के तहत सरकारी अभिलेखों के निरीक्षण और सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया से जुड़ा है।
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कोर्ट के आदेश के अनुसार, दुबे को मध्य प्रदेश राजभवन जाकर उन अभिलेखों का निरीक्षण करने की अनुमति मिलेगी, जो वर्ष 2011 से राज्यपाल द्वारा प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति के संबंध में केंद्र सरकार को भेजे गए और उन रिपोर्टों पर केंद्र की तरफ से आए जवाब। निरीक्षण के बाद वे अपनी जरूरत के अनुसार संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकेंगे। इस मामले में अब राजभवन के रिकॉर्ड तक पहुंच का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि निरीक्षण के दौरान कौन-कौन से दस्तावेज उपलब्ध होंगे और उनमें क्या जानकारियां सामने आएंगी। यह आदेश आरटीआई के तहत सरकारी अभिलेखों के निरीक्षण और सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया से जुड़ा है।
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