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प्रदेश में बंद बस स्टैंड फिर होंगे शुरू, सीएम यादव ने कलेक्टर को दिए निर्देश, हर जिले में रूट की समीक्षा होगी
Tue, 29 Sep 2026 10:31 PM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Tue, 29 Sep 2026 10:31 PM IST
सार
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेश में बंद पड़े बस डिपो और बस स्टैंडों को फिर से शुरू करने के लिए कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं। सुगम परिवहन सेवा के विस्तार के साथ हर जिले में बस रूट की समीक्षा होगी, जबकि 2031 तक 14,981 बसें चलाने का लक्ष्य रखा गया है।
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सीएम मोहन यादव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
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मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के विस्तार के साथ प्रदेश में बंद पड़े बस डिपो, टर्मिनल और खत्म हो चुके बस स्टैंडों को फिर से उपयोगी बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों से कहा कि जहां पुराने बस डिपो या टर्मिनल बंद हैं, वहां सफाई के साथ यात्रियों के बैठने और दूसरी जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएं। जहां बस स्टैंड की व्यवस्था खत्म हो चुकी है, वहां जमीन उपलब्ध कराकर नए बस स्टैंड विकसित किए जाएं। साथ ही सीएम ने हर जिले में रूट की समीक्षा करने के भी निर्देश दिए। 25 सितंबर से शुरू हुई मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत फिलहाल 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसें संचालित हो रही हैं। सरकार ने अगले पांच साल में इस सेवा का विस्तार करते हुए 2031 तक 14,981 बसें चलाने का लक्ष्य तय किया है। परिवहन विभाग के सर्वे के अनुसार प्रदेश के सात क्षेत्रों में 3636 मार्गों पर करीब 13,006 बसों की जरूरत का आकलन किया गया है।
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निजी बसों की फिटनेस और परमिट पर नजर
मुख्यमंत्री ने निजी बस ऑपरेटरों के व्यवस्थित संचालन पर भी जोर दिया। उन्होंने फिटनेस, परमिट की शर्तों और ड्राइवरों के संचालन व व्यवहार की नियमित जांच कराने को कहा है। इसके लिए मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियों के स्तर पर निरीक्षण किया जाएगा। बसों के निर्बाध संचालन के लिए थाना पुलिस और ट्रैफिक पुलिस का सहयोग भी लिया जाएगा।
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हर जिले में रूट की समीक्षा
जिला स्तरीय परिवहन सलाहकार समितियों की नियमित बैठकें कराने के निर्देश दिए गए हैं। इन समितियों के सामने रूट का प्रस्तुतिकरण कर स्थानीय जरूरत और यात्रियों के सुझाव लिए जाएंगे। कलेक्टरों को क्षेत्रीय कंपनियों के अधिकारियों से हर सप्ताह चर्चा करने के लिए भी कहा गया है।
आईटीएमएस से लेकर नए कार्यालय तक
परिवहन विभाग ने सेवा के तीन प्रमुख आधार बताए हैं—बस संचालन, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) और इंफ्रास्ट्रक्चर। यात्री एप के माध्यम से यात्रा की बेहतर योजना बना सकेंगे। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और सागर में अगले तीन माह में क्षेत्रीय सहायक कंपनियों के कार्यालय उपलब्ध कराने की तैयारी है। जबलपुर, रीवा और ग्वालियर में भी कार्यालय विकसित किए जा रहे हैं। सेवा के लिए स्वीकृत 1190 पदों में से 400 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी है। सरकार के मुताबिक पहले से संचालित फिट बसों को भी इस व्यवस्था में शामिल किया जा रहा है।
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निजी बसों की फिटनेस और परमिट पर नजर
मुख्यमंत्री ने निजी बस ऑपरेटरों के व्यवस्थित संचालन पर भी जोर दिया। उन्होंने फिटनेस, परमिट की शर्तों और ड्राइवरों के संचालन व व्यवहार की नियमित जांच कराने को कहा है। इसके लिए मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियों के स्तर पर निरीक्षण किया जाएगा। बसों के निर्बाध संचालन के लिए थाना पुलिस और ट्रैफिक पुलिस का सहयोग भी लिया जाएगा।
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हर जिले में रूट की समीक्षा
जिला स्तरीय परिवहन सलाहकार समितियों की नियमित बैठकें कराने के निर्देश दिए गए हैं। इन समितियों के सामने रूट का प्रस्तुतिकरण कर स्थानीय जरूरत और यात्रियों के सुझाव लिए जाएंगे। कलेक्टरों को क्षेत्रीय कंपनियों के अधिकारियों से हर सप्ताह चर्चा करने के लिए भी कहा गया है।
आईटीएमएस से लेकर नए कार्यालय तक
परिवहन विभाग ने सेवा के तीन प्रमुख आधार बताए हैं—बस संचालन, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) और इंफ्रास्ट्रक्चर। यात्री एप के माध्यम से यात्रा की बेहतर योजना बना सकेंगे। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और सागर में अगले तीन माह में क्षेत्रीय सहायक कंपनियों के कार्यालय उपलब्ध कराने की तैयारी है। जबलपुर, रीवा और ग्वालियर में भी कार्यालय विकसित किए जा रहे हैं। सेवा के लिए स्वीकृत 1190 पदों में से 400 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी है। सरकार के मुताबिक पहले से संचालित फिट बसों को भी इस व्यवस्था में शामिल किया जा रहा है।
