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एमपी: कूनो में चीते की गोली लगने से मौत के बाद उठे पुराने मामलों पर सवाल, NTCA से आठ बिंदुओं पर जांच की मांग

Fri, 30 Oct 2026 08:58 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Fri, 30 Oct 2026 08:58 PM IST
सार

कूनो में चीते KNG22 की गोली लगने से मौत के बाद वन्यजीवों की सुरक्षा और वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। पर्यावरण एवं वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने एनटीसीए को पत्र लिखकर पूर्व में हुई संदिग्ध मौतों, शिकार की घटनाओं और अधिकारियों की जवाबदेही समेत आठ बिंदुओं पर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

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MP: Cheetah’s Shooting Death in Kuno Raises Questions Over Past Cases; Probe Sought on 8 Issues from NTCA
चीता की मौत मामले में वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने आठ बिन्दुओं पर की जांच की मांग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कूनो नेशनल पार्क में 19 माह के नर चीते KNG22 की गोली लगने से हुई मौत के बाद अब चीता लैंडस्केप की सुरक्षा व्यवस्था और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए एसटीएफ गठित की है और केंद्र सरकार की उच्चस्तरीय टीम भी जांच के लिए पहुंची थी। इसी बीच पर्यावरण एवं वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के सदस्य सचिव को पत्र लिखकर कूनो और आसपास के चीता लैंडस्केप में वन्यजीवों की सुरक्षा से जुड़े आठ बिंदुओं पर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। दुबे ने अपने पत्र में कहा है कि जांच केवल हाल में हुई चीते की मौत तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूर्व में हुई वन्यजीवों की संदिग्ध मौतों, शिकार की घटनाओं, निगरानी व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही की भी पड़ताल होनी चाहिए। उन्होंने एनटीसीए से जांच रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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पवन की मौत की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
पत्र में सबसे पहले नर चीते पवन की मौत का मामला उठाया गया है। दुबे ने बताया कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), मध्यप्रदेश के 30 अगस्त 2024 के आदेश से पवन की मौत के विभिन्न पहलुओं की जांच के लिए समिति बनाई गई थी। उन्होंने सवाल किया है कि समिति ने क्या निष्कर्ष दिए और रिपोर्ट के आधार पर अब तक क्या कार्रवाई हुई। पत्र में पवन की मौत अप्राकृतिक होने और गोली मारे जाने की आशंका जताते हुए जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की गई है। 
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पहाड़गढ़ में दो चीतों से जुड़ी घटनाओं की जांच हो
दुबे ने मुरैना के पहाड़गढ़ क्षेत्र में 6 जून 2026 को घायल अवस्था में रेस्क्यू की गई मादा चीता KGP11 की मौत का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, 27 माह की इस चीता की पालपुर में उपचार के दौरान मौत हुई थी और उसे गोली लगने की आशंका की जांच होनी चाहिए। पत्र में 25 अक्टूबर को इसी क्षेत्र में एक अन्य चीते को गोली मारे जाने की घटना का भी जिक्र है। उन्होंने दोनों घटनाओं के पीछे संभावित शिकारियों और गिरोह की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। 

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पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट सार्वजनिक करने पर सवाल
चीता प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद वर्ष 2022 से अब तक मृत चीतों की पोस्टमार्टम, हिस्टोपैथोलॉजिकल और फोरेंसिक रिपोर्ट के साथ वीडियोग्राफी सार्वजनिक नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। दुबे ने पूछा है कि दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया और बोत्सवाना के साथ हुए समझौतों में ऐसा कौन-सा प्रावधान है, जिसके तहत इन रिपोर्टों को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। उन्होंने संबंधित एमओयू और उनके गोपनीयता संबंधी प्रावधानों का सार्वजनिक करने की मांग की है। 

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स्निफर डॉग्स की मौत और गश्त व्यवस्था की पड़ताल
पत्र में कूनो के दो स्निफर डॉग्स की मार्च 2024 और जून 2026 में हुई अप्राकृतिक मौतों का मामला भी उठाया गया है। दुबे ने पूछा है कि इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई हुई। साथ ही उन्होंने स्निफर डॉग्स की अनुपस्थिति में पार्क में गश्त और वन्यजीवों की ट्रैकिंग की व्यवस्था की जांच कराने की मांग की है। 

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लापता बाघिन और तेंदुआ शिकार गिरोहों का मामला
दुबे ने माधव टाइगर रिजर्व, शिवपुरी में पन्ना टाइगर रिजर्व से लाई गई रेडियो कॉलर वाली बाघिन के लापता होने का मामला भी उठाया है। उन्होंने आशंका जताई है कि बाघिन का शिकार किया गया हो सकता है और इसकी उच्चस्तरीय जांच की जानी चाहिए। इसके अलावा पत्र में वर्ष 2025 और 2026 के दौरान कूनो, श्योपुर, शिवपुरी, मुरैना और सवाई माधोपुर क्षेत्र में रेडियो कॉलर लगे तेंदुओं के शिकार से जुड़े दो गिरोहों के पकड़े जाने का उल्लेख है। दुबे का कहना है कि इन घटनाओं के बावजूद वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की प्रशासनिक जवाबदेही तय नहीं की गई। 

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फील्ड डायरेक्टर के प्रभार और श्रमिकों के भुगतान का मुद्दा
पत्र में माधव टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर को कूनो नेशनल पार्क के चीता प्रोजेक्ट के फील्ड डायरेक्टर का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने पर भी आपत्ति जताई गई है। दुबे ने इसे सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2025 के आदेश और एनटीसीए के निर्देशों के विपरीत बताते हुए प्रभार व्यवस्था की जांच की मांग की है। उन्होंने चीता प्रोजेक्ट में काम कर रहे स्थानीय श्रमिकों और ट्रैकर्स के पिछले दो वर्षों से लंबित मजदूरी एवं भत्तों का भुगतान भी तत्काल कराने की मांग की है। दुबे ने एनटीसीए से इन सभी बिंदुओं पर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने, जांच रिपोर्ट और संबंधित समझौते सार्वजनिक करने तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और शिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
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