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मध्यप्रदेश: पेंशनरों को कर्मचारियों से कम महंगाई राहत देने पर विवाद, फैसले को बताया असंवैधानिक

Fri, 30 Oct 2026 06:08 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Fri, 30 Oct 2026 06:08 PM IST
सार

मध्यप्रदेश में पेंशनरों को कर्मचारियों के मुकाबले कम महंगाई राहत देने के फैसले पर विरोध शुरू हो गया है। पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने इसे समानता के अधिकार के खिलाफ बताते हुए केंद्र के समान डीआर देने की मांग की है।

 

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MP Pensioners Protest Lower Dearness Relief, Call State Government’s Decision Unconstitutional
पेंशनर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अमोद सक्सेना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार
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मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की दरों में अंतर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने राज्य सरकार के उस फैसले पर आपत्ति जताई है, जिसमें कर्मचारियों को एक जनवरी 2026 से दो प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ाने का निर्णय लिया गया है, जबकि पेंशनरों को एक जुलाई 2026 से दो प्रतिशत महंगाई राहत देने की बात कही गई है। एसोसिएशन ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 में दिए गए समानता के अधिकार के विपरीत बताते हुए मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर आदेश में संशोधन की मांग की है। एसोसिएशन की मांग है कि पेंशनरों को भी कर्मचारियों की तरह एक जनवरी 2026 से दो प्रतिशत महंगाई राहत दी जाए। इसके अलावा एक जुलाई 2026 से तीन प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि का आदेश जारी किया जाए। संगठन का कहना है कि पेंशनरों को भी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए उसी बाजार और महंगाई का सामना करना पड़ता है, जिससे कर्मचारी प्रभावित होते हैं। ऐसे में महंगाई राहत की प्रभावी तारीख और वृद्धि में अंतर का कोई औचित्य नहीं है। ्र
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नाकरा मामले के फैसले का दिया हवाला
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष आमोद सक्सेना ने कहा कि पेंशनरों को कर्मचारियों से अलग तारीख और दर से महंगाई राहत देना समानता के सिद्धांत पर सवाल खड़े करता है। संगठन ने अपने पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले डीएस नाकरा़ बनाम भारत संघ (1982) का भी हवाला दिया है। एसोसिएशन के संरक्षक गणेश दत्त जोशी के मुताबिक, सरकार को इस फैसले में प्रतिपादित पेंशनरों के कल्याण और समानता संबंधी सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए आदेश में संशोधन करना चाहिए।
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केंद्र के फैसले को बनाया आधार
एसोसिएशन ने केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए एक जुलाई 2026 से महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में तीन प्रतिशत वृद्धि का भी उल्लेख किया है। संगठन का तर्क है कि जब केंद्र सरकार ने महंगाई के प्रभाव को देखते हुए अपने कर्मचारियों और पेंशनरों को राहत दी है, तो राज्य सरकार को भी इसी व्यवस्था के अनुरूप निर्णय लेना चाहिए। भोपाल जिला अध्यक्ष सुरेश शर्मा सहित संगठन के अन्य पदाधिकारियों ने भी सरकार से दोनों तारीखों के लिए महंगाई राहत के आदेश जल्द जारी करने की मांग की है। एसोसिएशन ने कहा है कि महंगाई राहत में देरी और अलग-अलग तारीखों के कारण पेंशनरों में नाराजगी बढ़ रही है। संगठन चाहता है कि सरकार इस संबंध में स्पष्ट और समयबद्ध नीति तय करे।
 
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